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Hisar News: गोशालाओं की चुनौती... सरकारी मदद नाकाफी, दानदाताओं का मिला सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 02 Mar 2026 12:43 AM IST
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हिसार की देवीभवन गोशाला।
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हिसार। जिले की गोशालाओं और नंदीशालाओं का संचालन अब दानदाताओं के सहारे हो रहा है, क्योंकि सरकार की ओर से दी जा रही प्रोत्साहन राशि पर्याप्त नहीं है। भुगतान में देरी के कारण भूसा और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद में भी परेशानी आ रही है। इसमें हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला भी शामिल है, जो सड़क हादसों में घायल पशुओं के इलाज के लिए प्रसिद्ध है।
गोशालाओं के संचालन में सरकारी मदद नाकाफी साबित हो रही है। सरकार की ओर से चारा अनुदान के लिए 88.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। भुगतान में देरी और भूसा की बढ़ी कीमतें गोशाला संचालन को प्रभावित कर रही हैं। अप्रैल महीने में सस्ती तूड़ी मिल जाती है, लेकिन ऑफ सीजन में हरे चारे, भूसा और पुआल की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं।
दानदाताओं का योगदान
शहर के देवी भवन और शांतिभवन में स्थित गोशालाएं घनी आबादी के बीच स्थित हैं, जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है। इसके अलावा सिरसा-दिल्ली और जयपुर-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे 65 से अधिक गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें लाडवा, डाया, मंगाली, किरमारा और हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला में बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं।
समाजसेवी वेदप्रकाश गांव धान्सू में राधा-कृष्ण गोशाला के प्रधान हैं। इस अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से लगे हैं। वे गोसेवा समेत अन्य धार्मिक कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं और अन्य लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके तहत गोकथा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जा रहे हैं। गोशाला संघ के प्रधान शमशेर आर्य और अन्य गोशाला संचालकों का कहना है कि वे हमेशा सरकार और दानदाताओं से सहयोग की उम्मीद करते हैं। इसके लिए गोशालाओं में दानपात्र भी लगाए गए हैं।
चारा अनुदान और अन्य मदद
गोसेवा आयोग ने पिछले साल अगस्त-सितंबर में प्रदेश की 603 गोशालाओं को 88.50 करोड़ रुपये का चारा अनुदान प्रदान किया था। इसके अलावा, 616 गोशालाओं को तिमाही आधार पर 70 करोड़ रुपये की राशि दी जा रही है। सीएम द्वारा 25 जनवरी को पंचकूला जिले की गोशालाओं को चेक वितरित किए गए थे, और अन्य गोशालाओं को सरल पोर्टल के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। इसके साथ ही, 51 गोशालाओं में लोहे के शेड बनाने के लिए 510 लाख रुपये की राशि दी गई है। 820 ई-रिक्शा मुहैया कराने के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
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सोनीपत में चेक वितरण समारोह कल
प्रदेशभर के गोशाला संचालकों को तीन मार्च को सुबह 10 बजे सोनीपत जिले के भटगांव स्थित धर्मार्थ गोशाला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हाथों चेक बांटे जाएंगे। महानिदेशक डॉ. प्रेम सिंह के निर्देश पर पशुपालन विभाग के गोशाला विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह दूहन ने इस बारे में पत्र भेजा। समारोह के लिए सोनीपत के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा को नोडल अधिकारी और सोनीपत के उपनिदेशक डॉ. संजय अंतिल को उपनोडल अधिकारी बनाया गया है। - डॉ. रविंद्र कुमार सहरावत, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, हिसार।
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जल्द और ऑनलाइन मिले पूरा भुगतान
राज्य सरकार ने पिछले साल गो संरक्षण के बजट को 450 करोड़ से बढ़ाकर 584 करोड़ रुपये किया था। इसके बावजूद तीन मार्च को सीएम की ओर से तीन माह के लिए 70 करोड़ रुपये ही दिए जा रहे हैं। शेष राशि वापस होने का खतरा है। इससे बचने के लिए गोशाला संचालकों को दूरस्थ जिले में बुलाने के बजाय सीधे गोशाला संचालकों के बैंक खातों में भेजना चाहिए। - शमशेर आर्य, प्रधान, गोशाला संघ, हिसार।
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गोसेवा के पुण्यकार्य से मिल रही संतुष्टि
मैं गोसेवा को सबसे पुण्य का काम मानता हूं। इसीलिए गोवंश को हरा चारा देने के लिए गोशाला में आया हूं। इससे मुझे संतुष्टि मिलती है। - सुनील बिश्नोई
मैं हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला से जुड़ा हूं। इसके संचालन के लिए हर माह 10 लाख रुपये चाहिए, जबकि हम मात्र तीन लाख रुपये ही जुटा पाते हैं। शेष पूर्ति दानदाता और सरकार करती है। - दर्पण जैन
हमारा पूरा परिवार गोसेवा के लिए प्रयासरत रहता है। हम हर माह तीन, चार बार गोशाला में आकर अनाज समेत कई प्रकार का चारा, दाना गोवंश के लिए दान देते हैं। - सुनीता, बड़वाली ढाणी।
मैं गोशाला में गायों की देखभाल करता हूं। मेरे साथ 15 अन्य लोग भी इस कार्य में जुटे हैं। हमें प्रबंधन की ओर से मानदेय अवश्य मिलता है। गोसेवा से अधिक संतोष मिलता है। - राजकुमार शांति नगर।
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दानदाताओं का योगदान
शहर के देवी भवन और शांतिभवन में स्थित गोशालाएं घनी आबादी के बीच स्थित हैं, जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है। इसके अलावा सिरसा-दिल्ली और जयपुर-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे 65 से अधिक गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें लाडवा, डाया, मंगाली, किरमारा और हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला में बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं।
समाजसेवी वेदप्रकाश गांव धान्सू में राधा-कृष्ण गोशाला के प्रधान हैं। इस अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से लगे हैं। वे गोसेवा समेत अन्य धार्मिक कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं और अन्य लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके तहत गोकथा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जा रहे हैं। गोशाला संघ के प्रधान शमशेर आर्य और अन्य गोशाला संचालकों का कहना है कि वे हमेशा सरकार और दानदाताओं से सहयोग की उम्मीद करते हैं। इसके लिए गोशालाओं में दानपात्र भी लगाए गए हैं।
चारा अनुदान और अन्य मदद
गोसेवा आयोग ने पिछले साल अगस्त-सितंबर में प्रदेश की 603 गोशालाओं को 88.50 करोड़ रुपये का चारा अनुदान प्रदान किया था। इसके अलावा, 616 गोशालाओं को तिमाही आधार पर 70 करोड़ रुपये की राशि दी जा रही है। सीएम द्वारा 25 जनवरी को पंचकूला जिले की गोशालाओं को चेक वितरित किए गए थे, और अन्य गोशालाओं को सरल पोर्टल के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। इसके साथ ही, 51 गोशालाओं में लोहे के शेड बनाने के लिए 510 लाख रुपये की राशि दी गई है। 820 ई-रिक्शा मुहैया कराने के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
सोनीपत में चेक वितरण समारोह कल
प्रदेशभर के गोशाला संचालकों को तीन मार्च को सुबह 10 बजे सोनीपत जिले के भटगांव स्थित धर्मार्थ गोशाला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हाथों चेक बांटे जाएंगे। महानिदेशक डॉ. प्रेम सिंह के निर्देश पर पशुपालन विभाग के गोशाला विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह दूहन ने इस बारे में पत्र भेजा। समारोह के लिए सोनीपत के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा को नोडल अधिकारी और सोनीपत के उपनिदेशक डॉ. संजय अंतिल को उपनोडल अधिकारी बनाया गया है। - डॉ. रविंद्र कुमार सहरावत, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, हिसार।
जल्द और ऑनलाइन मिले पूरा भुगतान
राज्य सरकार ने पिछले साल गो संरक्षण के बजट को 450 करोड़ से बढ़ाकर 584 करोड़ रुपये किया था। इसके बावजूद तीन मार्च को सीएम की ओर से तीन माह के लिए 70 करोड़ रुपये ही दिए जा रहे हैं। शेष राशि वापस होने का खतरा है। इससे बचने के लिए गोशाला संचालकों को दूरस्थ जिले में बुलाने के बजाय सीधे गोशाला संचालकों के बैंक खातों में भेजना चाहिए। - शमशेर आर्य, प्रधान, गोशाला संघ, हिसार।
गोसेवा के पुण्यकार्य से मिल रही संतुष्टि
मैं गोसेवा को सबसे पुण्य का काम मानता हूं। इसीलिए गोवंश को हरा चारा देने के लिए गोशाला में आया हूं। इससे मुझे संतुष्टि मिलती है। - सुनील बिश्नोई
मैं हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला से जुड़ा हूं। इसके संचालन के लिए हर माह 10 लाख रुपये चाहिए, जबकि हम मात्र तीन लाख रुपये ही जुटा पाते हैं। शेष पूर्ति दानदाता और सरकार करती है। - दर्पण जैन
हमारा पूरा परिवार गोसेवा के लिए प्रयासरत रहता है। हम हर माह तीन, चार बार गोशाला में आकर अनाज समेत कई प्रकार का चारा, दाना गोवंश के लिए दान देते हैं। - सुनीता, बड़वाली ढाणी।
मैं गोशाला में गायों की देखभाल करता हूं। मेरे साथ 15 अन्य लोग भी इस कार्य में जुटे हैं। हमें प्रबंधन की ओर से मानदेय अवश्य मिलता है। गोसेवा से अधिक संतोष मिलता है। - राजकुमार शांति नगर।