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हिसार: प्लास्टिक कचरे को लेकर लोगों को किया जागरूक
जब सुविधाओं की दौड़ में डिस्पोजेबल संस्कृति तेजी से बढ़ रही हो और पर्यावरण प्लास्टिक कचरे के बोझ तले दब रहा हो, ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति ठान ले तो बदलाव की एक मजबूत शुरुआत हो सकती है। कृष्णानगर निवासी व गवर्नमेंट कॉलेज से अंग्रेजी विषय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर कंवलजीत धवन ने इसी सोच के साथ कैंप चौक स्थित शांति हाउस बिल्डिंग में ‘बर्तन बैंक’ की अनूठी पहल शुरू की। उनकी यह मुहिम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि सामूहिक सहयोग की ताकत भी दिखा रही है।
कंवलजीत ने बताया कि हैं मैंने समाज सेवा की भावना के तहत कोविड काल में अपने साथ रहने वाले 11 परिवारों के सहयोग से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया। सभी परिवार मिलकर जितना संभव हो सका, उतना भोजन तैयार कर वितरित करते रहे। इसी दौरान सामाजिक कार्य को स्थायी रूप देने का विचार आया। सुनीता रहेजा से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन से ‘बर्तन बैंक’ की शुरुआत का निर्णय लिया गया।
बर्तन बैंक के इस विचार को सभी परिवारों ने सकारात्मक रूप से लिया और आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रूप से एक-दूसरे का सहयोग किया। आज हमारे बर्तन बैंक के पास लगभग 50 बर्तनों का पूरा सेट उपलब्ध है, जिसमें परोसने के बर्तन भी शामिल हैं। बिल्डिंग के 10-12 सदस्य अपने-अपने परिचितों और सामाजिक दायरे में इसकी जानकारी देते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग इन बर्तनों का उपयोग कर सकें।
अब तक करीब 40 से 50 सामाजिक कार्यक्रमों में हमारे बर्तन बैंक से बर्तन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। खास बात यह है कि जब लोग बर्तन लौटाते हैं तो कई बार अपनी ओर से नया बर्तन या सर्विंग का सामान जोड़ देते हैं। इस तरह बर्तन बैंक निरंतर समृद्ध होता जा रहा है।
इस पहल को शुरु करने में अनुपम, मीना, दीपिका,रानी, कुसुम, समीक्षा,कंचन सहित अन्य कई साथियों का पूरा सहयोग रहा है। आसपास के लोगों ने भी आर्थिक सहायता देकर इस प्रयास को मजबूती दी है। हालांकि, पहल के सामने जागरूकता की चुनौती अब भी बनी हुई है। कई लोग बर्तन लेने से इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें लाने-ले जाने और सफाई की प्रक्रिया में असुविधा महसूस होती है। इस समस्या के समाधान के लिए मैं यह तक प्रस्ताव दे चुकी हैं कि जरूरत पड़ने पर सफाई के लिए सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लोग डिस्पोजेबल का उपयोग बंद करें।
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