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Hisar News: खतरे का साया...औद्योगिक तरक्की की चमक के पीछे असुरक्षा का अंधेरा छाया
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हिसार। हिसार के औद्योगिक एरिया, सेक्टर 27-28 के पास अब बड़े पैमाने पर उद्योग विकसित हो चुके हैं। बड़ी इकाइयों को कच्चा माल और अन्य आपूर्ति के लिए ये छोटी इकाइयां काम कर रही हैं जिनमें करीब 5 हजार से अधिक लोग रोजगार पा रहे हैं। अब मिर्जापुर रोड, रायपुर रोड और आर्य नगर में भी उद्योग स्थापित हो रहे हैं और ये क्षेत्र भी औद्योगिक एरिया के रूप में विकसित हो रहे हैं लेकिन इन नए क्षेत्रों में सुरक्षा सुविधाओं की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।
प्रदेश में हिसार चौथा सबसे बड़ा औद्योगिक जिला है। जिंदल इंडस्ट्री के बाद जिले में औद्योगिक विस्तार लगातार हो रहा है। करीब 45 साल पहले हिसार में पहला औद्योगिक एरिया विकसित किया गया था लेकिन लंबे समय तक नए सेक्टर नहीं बनाए गए। मजबूरी में उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों के पास की कालोनियों में अपने उद्योग स्थापित करना शुरू कर दिया। इन क्षेत्रों में अब 100 से अधिक इकाइयां संचालित हैं।
सामान्यतः औद्योगिक क्षेत्रों में अलग फायर स्टेशन, अस्पताल और बिजली स्टेशन जैसी सुरक्षा सुविधाएं होती हैं। हिसार में बिजली और अस्पताल की व्यवस्था है लेकिन फायर स्टेशन अब तक नहीं बन पाया।
फायर स्टेशन की फाइल बार-बार जमीन उपलब्ध नहीं के हवाले से ठंडे बस्ते में रख दी जाती है। आग लगने पर पड़ाव चौक और आजाद नगर फायर स्टेशन से गाड़ियां भेजी जाती हैं जिन्हें मौके तक पहुंचने में 15 से 30 मिनट लगते हैं। तब तक आगजनी से उद्योगों को भारी नुकसान हो चुका होता है।
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प्रदेश में हिसार चौथा सबसे बड़ा औद्योगिक जिला है। जिंदल इंडस्ट्री के बाद जिले में औद्योगिक विस्तार लगातार हो रहा है। करीब 45 साल पहले हिसार में पहला औद्योगिक एरिया विकसित किया गया था लेकिन लंबे समय तक नए सेक्टर नहीं बनाए गए। मजबूरी में उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों के पास की कालोनियों में अपने उद्योग स्थापित करना शुरू कर दिया। इन क्षेत्रों में अब 100 से अधिक इकाइयां संचालित हैं।
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सामान्यतः औद्योगिक क्षेत्रों में अलग फायर स्टेशन, अस्पताल और बिजली स्टेशन जैसी सुरक्षा सुविधाएं होती हैं। हिसार में बिजली और अस्पताल की व्यवस्था है लेकिन फायर स्टेशन अब तक नहीं बन पाया।
फायर स्टेशन की फाइल बार-बार जमीन उपलब्ध नहीं के हवाले से ठंडे बस्ते में रख दी जाती है। आग लगने पर पड़ाव चौक और आजाद नगर फायर स्टेशन से गाड़ियां भेजी जाती हैं जिन्हें मौके तक पहुंचने में 15 से 30 मिनट लगते हैं। तब तक आगजनी से उद्योगों को भारी नुकसान हो चुका होता है।