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Jind News: जिला बार एसोसिएशन ने दिल्ली में हुई लाठीचार्ज का किया विरोध
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फोटो 22जेएनडी12-दिल्ली में युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में काम छोड़कर बैठे अधिवक्ता। स्र
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जींद। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में जिला बार एसोसिएशन ने वीरवार को कार्य स्थगित कर दिया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
बार एसोसिएशन के सदस्य विकास लोहान, अरविंद लाठर, अजय वशिष्ठ, शमशेर नेहरा, हरिमोहन भारद्वाज, काजल, दिनेश भाटी कि देश के युवाओं को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में उन पर लाठीचार्ज करना और बल प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तथा निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक तरीकों से समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता होती है तो प्रशासन को संयम और संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे पूरे देश में रोष है। इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और अधिवक्ता हमेशा संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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बार एसोसिएशन के सदस्य विकास लोहान, अरविंद लाठर, अजय वशिष्ठ, शमशेर नेहरा, हरिमोहन भारद्वाज, काजल, दिनेश भाटी कि देश के युवाओं को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में उन पर लाठीचार्ज करना और बल प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तथा निंदनीय है।
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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक तरीकों से समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता होती है तो प्रशासन को संयम और संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे पूरे देश में रोष है। इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और अधिवक्ता हमेशा संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।