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Kaithal News: 17 साल बाद गांव मटौर के डेरा बाबा समरनाथ के कपाट खुले

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 24 Feb 2026 03:42 AM IST
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After 17 years, the doors of Dera Baba Samarnath of village Mataur opened.
23केएलटी6,7: कलायत के गांव मटौर में महंत की चादर परंपरा के दौरान मौजूद ग्रामीण व साधु-संत
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कलायत। कलायत के गांव मटौर मेंं डेरा बाबा समरनाथ के कपाट वर्षों के बाद खुल गए हैं। इसकी गद्दी पर शिवनाथ को चादर की परंपरा के साथ बैठाया गया। महंत शिव नाथ ने बताया कि समाधि बाबा समरनाथ (आसन) के द्वार पिछले 16-17 सालों से बंद थे। इसके जीर्णोद्धार के लिए ग्रामीणों ने साधु-संतों ने मिलकर समाधि स्थल पर मंदिर निर्माण करवाने का संकल्प लिया। भूमि पूजन करके चादर विधि से महंत नियुक्त किया है।
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महंत शिवनाथ का आरोप है कि सुदकैन गांव के महंत रूपनाथ ने केवल इस आश्रम की 70 एकड़ जमीन के कारण इस गांव के डेरे को विकसित करने में रुचि नहीं ली। कहीं न कहीं रूप नाथ को बात का डर था यदि गांव मटौर में कोई साधु रहेगा तो वो हिसाब-किताब की स्थिति साफ करनी होगी। इसलिए किसी नाथ को डेरे में नहीं आने दिया। उन्होंने कहा कि रूपनाथ गांव व भेख भगवान ने महंत नहीं चुना है। शिव नाथ ने बताया कि यह स्थल उझाना पीर के अंदर डेरा आता है। इसके पीर राजनाथ है। उनके आदेश अनुसार ही मंगलवार को महंत शिव नाथ की चादर परंपरा के दौरान ग्रामीण ने उन्हें जिम्मेदारी दी है। उन्होंने कहा कि रूपनाथ ने बिना किसी जानकारी के डेरे के जमीन की वसीयतनामा अपने शिष्य सोनू नाथ के नाम दर्ज करवाया। इसका साधु समाज व ग्राम वासी विरोध कर रहे हैं। इस दौरान पीर राज नाथ उझाना, महंत योगी पूर्णनाथ मानसा, सरपंच रमेश मौण, ओमप्रकाश, बजिन्द्र, सतपाल शर्मा, सत्यवान, सुभाष, कुलदीप मौण, महावीर, धीरा, दिनेश मौण, बलवान सीमल पट्टी, सुरेश, जोगा व बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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ग्रामीण, पीर और भेखभगवान का निर्णय मान्य: सरपंच

सरपंच रमेश मौण ने बताया कि गांव के डेरे में भूमि पूजन व जीर्णोद्धार के लिए शिवनाथ को महंत नियुक्त किया गया है। जबकि पिछले दिनों गांव के डेरे समरनाथ खरड़ा बागा में आठमान के भंडारे में नाथ पंरपरा के अनुसार आठ पीर भेख अनुसार 12-18 के महंत व आसपास के गांवों एवं मटौर की उपस्थिति में पूर्ण नाथ के शिष्य सोनू नाथ को महंत बनाया गया। वैसे ग्रामीण, पीर और भेखभगवान यानी की साधु समाज द्वारा की गई लिखत जो फैसला करेंगे हम उनके साथ हैं।

डेरे की सेवा के लिए दी गई है चादर : पीर राजनाथ

पीर राजनाथ उझाना ने कहा कि शिव नाथ को चादर ग्रामीणों ने दी हैं। ग्रामीणों के तीन बार के बुलावे पर भी पूर्णनाथ नहीं आए तो ग्रामीणों ने ये कदम उठाया है। यदि फिर भी पूर्णनाथ डेरे में महंत बनकर रहना चाहते है तो रहे। ये चादर सिर्फ डेरे की सेवा के लिए हैं। पूर्णनाथ डेरे को त्याग रहे हैं। सोनू नाथ के नाम वसीयत नामा गलत है। नाथ में ये परंपरा नहीं है। उदाहरणार्थ के तौर पर मैं उझाना गद्दी का नौवां पीर हूं। मटौर में जितने भी महंत रहे किसी ने किसी नाम वसीयत नहीं कराई। उन्होंने कहा कि समाधि एवं धूणा गांव के पुराने आसन में है। इसमेंं पूजा-अर्चना निरंतर होनी चाहिए। ऐसा न होने पर महंत शिव नाथ को डेरे की जिम्मेदारी दी गई है।

निष्कासित हो चुके हैं शिवनाथ : रूप नाथ

सुदकैन के महंत रूप नाथ ने बताया कि वर्ष 2001 में शिव नाथ पांच गांवों की पंचायत मेेंं गांव से बाहर भेजेे गए थे। उनका आरोप है कि शिव नाथ द्वारा मेरी हत्या के लिए सुपारी दी गई थी। इस साजिश का भारी विरोध हुआ और शिव नाथ को गद्दी से निष्कासित किया गया। उन्होंने कहा कि इसके उपरांत शिवनाथ को कलकत्ता के डेरे में बैठाया गया। डेरे के महंत पूर्णनाथ जीवित हैं और उनके पास ही डेरे की जिम्मेदारी है। परंपरा अनुसार पूर्णनाथ को दोबारा से चादर देने का कार्य भी पिछले कुछ माह पहले पूरा किया जा चुका है। इस तरह शिवनाथ का डेरे की गद्दी पर हक नहीं बनता।

23केएलटी6,7: कलायत के गांव मटौर में महंत की चादर परंपरा के दौरान मौजूद ग्रामीण व साधु-संत
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