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Kaithal News: पूंडरी से चंडीगढ़ के लिए बस सेवा शुरू, किराया 170 रुपये
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी/कैथल। पूंडरी बस स्टैंड से चंडीगढ़ के लिए सीधी बस सेवा का संचालन शुरू हो गया है। किराया 170 रुपये रहेगा। दूसरी ओर सोमवार को डिपो की दो और बसें जर्जर घोषित कर दी गईं। इन बसों ने सड़कों पर चलने की निर्धारित 10 वर्ष की समय सीमा पूरी कर ली थी। इसके साथ ही डिपो में रोडवेज बसों की कुल संख्या घटकर 169 रह गई है।
पूंडरी से चंडीगढ़ जाने वाली बस एनएच-152डी से चंडीगढ़ पहुंचेगी। सोमवार को बस सेवा का ट्रायल बेस पर शुरुआत हुई। पहले दिन पूंडरी से चंडीगढ़ के लिए केवल चार से पांच यात्री ही रवाना हुए, लेकिन उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों को इस बस की जानकारी मिलेगी, यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
इससे पहले पूंडरी हलके के लोगों को चंडीगढ़ जाने के लिए पहले कैथल या फिर ढांड होते हुए पिहोवा जाना पड़ता था। वहां से चंडीगढ़ के लिए बस मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे कई बार यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता था। अब सीधी बस सेवा शुरू होने से लोगों को इस परेशानी से राहत मिलेगी।
उधर, रोडवेज का बेड़ा घट रहा है। पिछले सप्ताह चार बसें जर्जर घोषित की जा चुकी हैं। इस प्रकार महज 15 दिनों के भीतर छह बसें बेड़े से बाहर हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, जनवरी के अंतिम सप्ताह में दो और बसों के जर्जर होने की संभावना है। फिलहाल डिपो को नई बसें मिलने की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है।
रोडवेज वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि सोमवार को डिपो की दो बसें जर्जर घोषित की गई हैं। वर्तमान में कैथल डिपो में 169 रोडवेज बसें उपलब्ध हैं, जिनमें से छह बसें चालक-परिचालक प्रशिक्षण के लिए और एक बस चेकिंग ड्यूटी पर लगी हुई है। ऐसे में रूटों के लिए केवल 163 बसें ही शेष बचती हैं। रोजाना करीब 12 बसें वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी रहती हैं। इस स्थिति में डिपो से प्रतिदिन मात्र 151 रोडवेज बसों का ही संचालन हो पा रहा है।
यदि किलोमीटर स्कीम की बात की जाए तो वर्तमान में डिपो से 23 किलोमीटर स्कीम की बसें चलाई जा रही हैं। निर्धारित मानक के अनुसार 250 बसों के बेड़े की आवश्यकता के मुकाबले डिपो में अभी भी 86 बसों की कमी है। डिपो की लगभग 100 बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। पानीपत, भिवानी, पलवल और झज्जर डिपो से मिली पुरानी बसें भी बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों और कर्मचारियों ने डिपो में शीघ्र नई बसें खरीदने की मांग की है।
हलके के काफी लोग लंबे समय से इस बस सेवा की मांग कर रहे थे। विशेषकर नौकरीपेशा लोगों को चंडीगढ़ जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उनकी समस्या को देखते हुए यह बस सेवा शुरू करवाई गई है। -सतपाल जांबा, पूंडरी विधायक
पुरानी बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। इनमें क्लच प्लेट और गियर बॉक्स जैसी तकनीकी खराबियां सबसे अधिक सामने आ रही हैं। ऐसी स्थितियों में तुरंत नई बसें खरीदने की जरूरत है। डिपो में बसों की संख्या 250 तक की जाए। -संदीप, प्रधान-रोडवेज कर्मचारी यूनियन
पुरानी बसें एनसीआर क्षेत्र में नहीं जा पा रहीं
यात्री राजेंद्र, मनीष, सूरज और मनोज ने बताया कि कैथल डिपो में अधिकतर बसें पुरानी होने के कारण चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर सहित एनसीआर क्षेत्र के रूटों पर बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस बदलनी पड़ती है। जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र और असंध रूट पर भी यात्रियों की संख्या के अनुसार बसें उपलब्ध नहीं हो पातीं। दोपहर बाद के समय यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। बसों की कमी के कारण स्कूल व कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं तक छूट जाती हैं।
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पूंडरी/कैथल। पूंडरी बस स्टैंड से चंडीगढ़ के लिए सीधी बस सेवा का संचालन शुरू हो गया है। किराया 170 रुपये रहेगा। दूसरी ओर सोमवार को डिपो की दो और बसें जर्जर घोषित कर दी गईं। इन बसों ने सड़कों पर चलने की निर्धारित 10 वर्ष की समय सीमा पूरी कर ली थी। इसके साथ ही डिपो में रोडवेज बसों की कुल संख्या घटकर 169 रह गई है।
पूंडरी से चंडीगढ़ जाने वाली बस एनएच-152डी से चंडीगढ़ पहुंचेगी। सोमवार को बस सेवा का ट्रायल बेस पर शुरुआत हुई। पहले दिन पूंडरी से चंडीगढ़ के लिए केवल चार से पांच यात्री ही रवाना हुए, लेकिन उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों को इस बस की जानकारी मिलेगी, यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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इससे पहले पूंडरी हलके के लोगों को चंडीगढ़ जाने के लिए पहले कैथल या फिर ढांड होते हुए पिहोवा जाना पड़ता था। वहां से चंडीगढ़ के लिए बस मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे कई बार यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता था। अब सीधी बस सेवा शुरू होने से लोगों को इस परेशानी से राहत मिलेगी।
उधर, रोडवेज का बेड़ा घट रहा है। पिछले सप्ताह चार बसें जर्जर घोषित की जा चुकी हैं। इस प्रकार महज 15 दिनों के भीतर छह बसें बेड़े से बाहर हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, जनवरी के अंतिम सप्ताह में दो और बसों के जर्जर होने की संभावना है। फिलहाल डिपो को नई बसें मिलने की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है।
रोडवेज वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि सोमवार को डिपो की दो बसें जर्जर घोषित की गई हैं। वर्तमान में कैथल डिपो में 169 रोडवेज बसें उपलब्ध हैं, जिनमें से छह बसें चालक-परिचालक प्रशिक्षण के लिए और एक बस चेकिंग ड्यूटी पर लगी हुई है। ऐसे में रूटों के लिए केवल 163 बसें ही शेष बचती हैं। रोजाना करीब 12 बसें वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी रहती हैं। इस स्थिति में डिपो से प्रतिदिन मात्र 151 रोडवेज बसों का ही संचालन हो पा रहा है।
यदि किलोमीटर स्कीम की बात की जाए तो वर्तमान में डिपो से 23 किलोमीटर स्कीम की बसें चलाई जा रही हैं। निर्धारित मानक के अनुसार 250 बसों के बेड़े की आवश्यकता के मुकाबले डिपो में अभी भी 86 बसों की कमी है। डिपो की लगभग 100 बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। पानीपत, भिवानी, पलवल और झज्जर डिपो से मिली पुरानी बसें भी बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों और कर्मचारियों ने डिपो में शीघ्र नई बसें खरीदने की मांग की है।
हलके के काफी लोग लंबे समय से इस बस सेवा की मांग कर रहे थे। विशेषकर नौकरीपेशा लोगों को चंडीगढ़ जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उनकी समस्या को देखते हुए यह बस सेवा शुरू करवाई गई है। -सतपाल जांबा, पूंडरी विधायक
पुरानी बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। इनमें क्लच प्लेट और गियर बॉक्स जैसी तकनीकी खराबियां सबसे अधिक सामने आ रही हैं। ऐसी स्थितियों में तुरंत नई बसें खरीदने की जरूरत है। डिपो में बसों की संख्या 250 तक की जाए। -संदीप, प्रधान-रोडवेज कर्मचारी यूनियन
पुरानी बसें एनसीआर क्षेत्र में नहीं जा पा रहीं
यात्री राजेंद्र, मनीष, सूरज और मनोज ने बताया कि कैथल डिपो में अधिकतर बसें पुरानी होने के कारण चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर सहित एनसीआर क्षेत्र के रूटों पर बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस बदलनी पड़ती है। जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र और असंध रूट पर भी यात्रियों की संख्या के अनुसार बसें उपलब्ध नहीं हो पातीं। दोपहर बाद के समय यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। बसों की कमी के कारण स्कूल व कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं तक छूट जाती हैं।