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Kaithal News: अखिल भारतीय ज्योतिष-वास्तु महासम्मेलन में 500 से अधिक ज्योतिष विद्वान हुए शामिल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 12:42 AM IST
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More than 500 astrology scholars participated in the All India Astrology-Vastu Mahasammelan.
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय और पराशर ज्योतिष केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आरकेएसडी कॉलेज में एक ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु महासम्मेलन’ आयोजित किया गया। मुख्य रूप से कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। इस महासम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक प्रख्यात ज्योतिषी, वास्तुशास्त्री और शोधार्थी उपस्थित रहे। सम्मेलन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. संजय गोयल ने की।
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मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्रेयांश द्विवेदी रहे। कार्यक्रम में महामण्डलेश्वर डॉ. श्री राजेश्वर दास का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और इस आयोजन के उद्देश्यों को बताया। पराशर ज्योतिष दर्पण के संस्थापक पं. भूषणदेव शास्त्री ने सभी अतिथियों का परिचय कराया। महासम्मेलन में एच.एस. रावत ने कहा कि ज्योतिष के माध्यम से हम आने वाली घटनाओं को जान सकते हैं। उन्होंने तर्कों के साथ स्पष्ट किया कि ज्योतिष केवल भाग्य बताने का साधन नहीं, बल्कि आने वाली घटनाओं और आपदाओं के प्रति सचेत करने वाला एक सूक्ष्म विज्ञान है। विश्व प्रसिद्ध हस्तरेखा विशेषज्ञ कैप्टन लेखराज शर्मा ने हाथ की रेखाओं से कुण्डली बनाने का लाइव प्रदर्शन किया और कहा कि ज्योतिष पूरी तरह से विज्ञान है। महासम्मेलन को तीन प्रमुख सत्रों में विभाजित किया गया, जिसमें गृह-नक्षत्रों की वैज्ञानिक गणना, ग्रहों के गोचरीय प्रभाव और वास्तु दोषों के तर्कसंगत निवारण जैसे गंभीर विषयों पर गहन चिंतन हुआ।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविंद वल्लभ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह कैथल का पहला ज्योतिष सम्मेलन है। आम जनमानस को देश के शीर्ष विद्वानों से सीधा संवाद करने का अवसर इस महासम्मेलन के माध्यम से मिला है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति और शास्त्र परपंरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार इस प्रकार के आयोजन करता रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, डॉ. शर्मिला, ज्योतिष विभाग के डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. गोविन्द वल्लभ सहित अन्य प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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