{"_id":"69c6e804a2885092cf0c9068","slug":"claim-rejected-due-to-discrepancy-in-documents-now-interest-will-also-have-to-be-paid-karnal-news-c-18-knl1018-873586-2026-03-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: दस्तावेज में विसंगति पर खारिज किया क्लेम, अब ब्याज भी देना होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: दस्तावेज में विसंगति पर खारिज किया क्लेम, अब ब्याज भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 28 Mar 2026 01:56 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उपचार पर आया 32,809 रुपये खर्च को नाै प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए। मानसिक परेशानी के लिए हर्जाना भी दे। दस्तावेज में विसंगति का हवाला देकर कंपनी ने दावा खारिज कर दिया था।
आयोग के फैसले के अनुसार, सेक्टर-16 निवासी मिथलेश रानी ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस से तीन लाख रुपये की हेल्थ इनफिनिटी पॉलिसी ली थी। मई, 2022 में बीमार होने के कारण उन्हें शहर के अदिति क्लीनिक एवं कपूर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज पर कुल 32 हजार 809 रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने तथ्यों के गलत प्रस्तुतीकरण और दस्तावेज में विसंगतियों का हवाला देते हुए दावे को खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता मिथलेस ने पहले बीमा लोकपाल का दरवाजा खटखटाया था। लोकपाल ने 31 अगस्त, 2022 को आदेश दिया था कि कंपनी विसंगतियों को साझा करे और अस्पताल से स्पष्टीकरण मिलने पर दावे का निपटारा करे। इसके बावजूद कंपनी ने प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया और दावे को दोबारा खारिज कर दिया।
दावों के भुगतान के समय बताए जाते हैं पेचीदा नियम
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी लोकपाल के आदेश के पालन का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि आजकल बीमा कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो तत्परता दिखाती हैं लेकिन दावों के भुगतान के समय पेचीदा नियमों का सहारा लेकर ग्राहकों को परेशान करती हैं।
कंपनी को 45 दिन में करना होगा आदेश का पालन
आयोग ने फैसले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को इलाज की राशि 32 हजार 809 रुपये का भुगतान 17 अक्तूबर, 2023 से वसूली तक नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने के आदेश दिए। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने के आदेश दिए। इन आदेशों का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा।
Trending Videos
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा सेवाओं में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उपचार पर आया 32,809 रुपये खर्च को नाै प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए। मानसिक परेशानी के लिए हर्जाना भी दे। दस्तावेज में विसंगति का हवाला देकर कंपनी ने दावा खारिज कर दिया था।
आयोग के फैसले के अनुसार, सेक्टर-16 निवासी मिथलेश रानी ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस से तीन लाख रुपये की हेल्थ इनफिनिटी पॉलिसी ली थी। मई, 2022 में बीमार होने के कारण उन्हें शहर के अदिति क्लीनिक एवं कपूर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज पर कुल 32 हजार 809 रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने तथ्यों के गलत प्रस्तुतीकरण और दस्तावेज में विसंगतियों का हवाला देते हुए दावे को खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता मिथलेस ने पहले बीमा लोकपाल का दरवाजा खटखटाया था। लोकपाल ने 31 अगस्त, 2022 को आदेश दिया था कि कंपनी विसंगतियों को साझा करे और अस्पताल से स्पष्टीकरण मिलने पर दावे का निपटारा करे। इसके बावजूद कंपनी ने प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया और दावे को दोबारा खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दावों के भुगतान के समय बताए जाते हैं पेचीदा नियम
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी लोकपाल के आदेश के पालन का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि आजकल बीमा कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो तत्परता दिखाती हैं लेकिन दावों के भुगतान के समय पेचीदा नियमों का सहारा लेकर ग्राहकों को परेशान करती हैं।
कंपनी को 45 दिन में करना होगा आदेश का पालन
आयोग ने फैसले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को इलाज की राशि 32 हजार 809 रुपये का भुगतान 17 अक्तूबर, 2023 से वसूली तक नाै प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने के आदेश दिए। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने के आदेश दिए। इन आदेशों का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा।