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Karnal News: बीमा कंपनी ने अनुमानों के आधार पर रोका वरिष्ठ नागरिक का क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 11 Mar 2026 02:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी स्टार हेल्थ की ओर से वरिष्ठ नागरिक कालू राम गुप्ता के इलाज का दावा खारिज किए जाने को अनुचित और मनमाना करार दिया। अदालत ने यह भी माना कि कंपनी ने केवल अनुमानों के आधार पर दावे को रोका है, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए कि वो वरिष्ठ नागरिक के इलाज पर आए खर्च की 2.46 लाख रुपये की राशि का नाै प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अलावा कंपनी को 36 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं।
सेक्टर-9 निवासी 76 वर्षीय कालू राम गुप्ता ने स्टार हेल्थ से सीनियर सिटीजन रेड कार्पेट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। फरवरी, 2023 में उन्हें अस्थमा की गंभीर समस्या हुई, जिसके कारण उन्हें करनाल के एनपी रावल अस्पताल में 11 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान उन्हें चार दिनों तक आईसीयू में भी रखा गया। उनके इलाज पर कुल दो लाख 46 हजार 864 रुपये खर्च आया। इसके भुगतान के लिए उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम फॉर्म और बिल सौंपे। कंपनी ने 4 अप्रैल, 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि जिस अस्पताल में इलाज हुआ है, वह पॉलिसी में परिभाषित अस्पताल के मानदंडों को पूरा नहीं करता है।
इंश्योरेंस कंपनी का तर्क था कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, एक अस्पताल के पास कम से कम 15 बेड, चौबीस घंटे योग्य नर्सिंग स्टाफ और अपना ऑपरेशन थिएटर होना अनिवार्य है। कंपनी के अनुसार, एनपी रावल अस्पताल इन शर्तों को पूरा नहीं कर रहा था। इसके जवाब में शिकायतकर्ता ने अस्पताल की ओर से जारी किया गया प्रमाणपत्र पेश किया। इसमें स्पष्ट था कि एनपी रावल अस्पताल एक 80 बेड वाला मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है। अस्पताल में आधुनिक उपकरण और सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। शिकायतकर्ता ने दलील दी कि अस्पताल में 25 से अधिक नर्सिंग स्टाफ और अपनी लैब भी उपलब्ध है।
मानसिक पीड़ा के लिए 11 हजार रुपये देने होंगे
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि अस्पताल पॉलिसी के सभी मानदंडों को पूरा करता है। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी की ओर से क्लेम खारिज किए जाने को अनुचित और मनमाना करार दिया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिए कि वह वरिष्ठ नागरिक कालू राम गुप्ता के इलाज पर खर्च हुए 2.46 लाख रुपये का भुगतान नाै प्रतिशत ब्याज के साथ करे। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमेबाजी पर आए खर्च के लिए 11 हजार रुपये का भुगतान करने के भी आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर इसका पालन किया जाना चाहिए।
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सेक्टर-9 निवासी 76 वर्षीय कालू राम गुप्ता ने स्टार हेल्थ से सीनियर सिटीजन रेड कार्पेट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। फरवरी, 2023 में उन्हें अस्थमा की गंभीर समस्या हुई, जिसके कारण उन्हें करनाल के एनपी रावल अस्पताल में 11 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान उन्हें चार दिनों तक आईसीयू में भी रखा गया। उनके इलाज पर कुल दो लाख 46 हजार 864 रुपये खर्च आया। इसके भुगतान के लिए उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम फॉर्म और बिल सौंपे। कंपनी ने 4 अप्रैल, 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि जिस अस्पताल में इलाज हुआ है, वह पॉलिसी में परिभाषित अस्पताल के मानदंडों को पूरा नहीं करता है।
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इंश्योरेंस कंपनी का तर्क था कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, एक अस्पताल के पास कम से कम 15 बेड, चौबीस घंटे योग्य नर्सिंग स्टाफ और अपना ऑपरेशन थिएटर होना अनिवार्य है। कंपनी के अनुसार, एनपी रावल अस्पताल इन शर्तों को पूरा नहीं कर रहा था। इसके जवाब में शिकायतकर्ता ने अस्पताल की ओर से जारी किया गया प्रमाणपत्र पेश किया। इसमें स्पष्ट था कि एनपी रावल अस्पताल एक 80 बेड वाला मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है। अस्पताल में आधुनिक उपकरण और सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। शिकायतकर्ता ने दलील दी कि अस्पताल में 25 से अधिक नर्सिंग स्टाफ और अपनी लैब भी उपलब्ध है।
मानसिक पीड़ा के लिए 11 हजार रुपये देने होंगे
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि अस्पताल पॉलिसी के सभी मानदंडों को पूरा करता है। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी की ओर से क्लेम खारिज किए जाने को अनुचित और मनमाना करार दिया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिए कि वह वरिष्ठ नागरिक कालू राम गुप्ता के इलाज पर खर्च हुए 2.46 लाख रुपये का भुगतान नाै प्रतिशत ब्याज के साथ करे। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमेबाजी पर आए खर्च के लिए 11 हजार रुपये का भुगतान करने के भी आदेश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर इसका पालन किया जाना चाहिए।