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Karnal News: रिश्ता नहीं ढूंढ़ पाया मैरिज ब्यूरो, देने होंगे 1.10 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:04 AM IST
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करनाल।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शादी के लिए उपयुक्त रिश्ता नहीं ढूंढ पाने और उपभोक्ता को रुपये वापस न करने पर दिल्ली के एलीट मैरिज ब्यूरो के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मैरिज ब्यूरो को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 90 हजार रुपये की पूरी फीस वापस करे और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च के रूप में 20 हजार रुपये का हर्जाना भी दे।
करनाल निवासी मुद्दित कुमार ने अपनी बहन के लिए एक सुयोग्य वर खोजने हेतु दिल्ली स्थित एलीट मैरिज ब्यूरो से संपर्क किया था। ब्यूरो ने बेहतर रिश्ता दिलाने का आश्वासन देते हुए 24 नवंबर, 2023 को उनसे 90 हजार रुपये फीस के तौर पर वसूले थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पांच महीने बीत जाने के बाद भी ब्यूरो ने एक भी उपयुक्त रिश्ता नहीं दिखाया और जब फीस के रुपये वापस मांगे गए तो ब्यूरो ने रुपये लाैटाने के बजाय और रुपये देने की मांग की।
सुनवाई में हाजिर नहीं हुए ब्यूरो के प्रतिनिधि
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान एलीट मैरिज ब्यूरो के मालिकों चंदर पाल और विद्या गुप्ता को नोटिस जारी किया था। बार-बार बुलाने के बावजूद विपक्षी पक्ष अदालत में हाजिर नहीं हुए। इसके चलते अदालत ने 5 दिसंबर, 2024 को उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में पेश किए गए बिल रसीद और कानूनी नोटिस के साक्ष्यों को अदालत ने सही माना, क्योंकि ब्यूरो की ओर से इन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं था।
45 दिनों में करना होगा धनराशि का भुगतान
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने आदेश दिया कि ब्यूरो को कुल एक लाख 10 हजार रुपये की राशि आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसमें 90 हजार रुपये उपभोक्ता की ओर से दी गई फीस और 20 हजार रुपये का मुआवजा शामिल है।
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करनाल निवासी मुद्दित कुमार ने अपनी बहन के लिए एक सुयोग्य वर खोजने हेतु दिल्ली स्थित एलीट मैरिज ब्यूरो से संपर्क किया था। ब्यूरो ने बेहतर रिश्ता दिलाने का आश्वासन देते हुए 24 नवंबर, 2023 को उनसे 90 हजार रुपये फीस के तौर पर वसूले थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पांच महीने बीत जाने के बाद भी ब्यूरो ने एक भी उपयुक्त रिश्ता नहीं दिखाया और जब फीस के रुपये वापस मांगे गए तो ब्यूरो ने रुपये लाैटाने के बजाय और रुपये देने की मांग की।
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सुनवाई में हाजिर नहीं हुए ब्यूरो के प्रतिनिधि
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान एलीट मैरिज ब्यूरो के मालिकों चंदर पाल और विद्या गुप्ता को नोटिस जारी किया था। बार-बार बुलाने के बावजूद विपक्षी पक्ष अदालत में हाजिर नहीं हुए। इसके चलते अदालत ने 5 दिसंबर, 2024 को उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में पेश किए गए बिल रसीद और कानूनी नोटिस के साक्ष्यों को अदालत ने सही माना, क्योंकि ब्यूरो की ओर से इन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं था।
45 दिनों में करना होगा धनराशि का भुगतान
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने आदेश दिया कि ब्यूरो को कुल एक लाख 10 हजार रुपये की राशि आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसमें 90 हजार रुपये उपभोक्ता की ओर से दी गई फीस और 20 हजार रुपये का मुआवजा शामिल है।