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Karnal News: धान घोटाले में मिल पार्टनर से नए हिस्सेदार का नाम आया सामने
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- पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दे रही दबिश, 3.50 करोड़ के घोटाले में अब तक आरोपी अरुण से 1.41 करोड़ की रिकवरी
- 41 लाख का चावल बरामद, 48 लाख रुपये की एफडी जब्त
- 52 लाख रुपये पिछले रिमांड में हुए थे बरामद
- 2084 कट्टे चावल दूसरे रिमांड में सग्गा के गोदाम में मिला
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। तरावड़ी के चर्चित धान घोटाले में बालाजी राइस मिल के पार्टनर अरुण ने दूसरे पुलिस रिमांड में कई अहम खुलासे किए हैं। अब घोटाले से जुड़े नए हिस्सेदार दादूपुर निवासी अनिल का नाम भी सामने आया है जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
दूसरे रिमांड की अवधि में पुलिस ने अरुण की निशानदेही पर सग्गा गांव के एक गोदाम से 2084 कट्टों में भरा 41 लाख रुपये कीमत का 1042 क्विंटल चावल बरामद किया। साथ ही 48 लाख रुपये की एफडी बरामद कर उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) विभाग के पक्ष में सरेंडर करवाया है जबकि पहले रिमांड में अरुण से 52 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। ऐसे में अब तक बालाजी राइस मिल में हुए 10 हजार क्विंटल यानी 3.50 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस अरुण से करीब 1.41 करोड़ रुपये की रिकवरी कर चुकी है। वीरवार को दूसरे रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
धान कहां बेचा.. और निपटान पर जांच शुरू
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धान को कहां बेचा गया, उससे तैयार चावल का निपटान किस प्रकार किया गया और उससे प्राप्त धनराशि किन-किन लोगों तक पहुंची। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों तथा आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, स्टॉक रिकॉर्ड और गोदामों से जुड़े दस्तावेज भी खंगाल रही हैं।
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36 हजार क्विंटल धान गायब मिलने से खुला था राज
मामला उस समय उजागर हुआ था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय की ओर से बालाजी और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में दोनों मिलों से सरकार द्वारा आवंटित करीब 36 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया था जिसकी कीमत लगभग 12.60 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके बाद तरावड़ी थाने में मिल संचालकों और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल कम पाया गया था धान
जांच में बालाजी राइस मिल में लगभग 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये थी। निरीक्षण में मिल परिसर में उत्पादन से संबंधित मशीनरी के स्थान पर कबाड़ जैसी स्क्रैप मशीनें मिलने से अधिकारियों का संदेह और गहरा गया था। जांच में तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, सहायक निरीक्षक रामफल, मिल मालिक मोहित, सुरेंद्र और पार्टनर अरुण की भूमिका सामने आई। अरुण और रामफल गिरफ्तार हो चुके हैं। अब मुख्य आरोपी के तौर पर अनिल वासी दादूपुर का नाम सामने आया है। अनिल समेत बाकियों की पुलिस तलाश कर रही है।
- 41 लाख का चावल बरामद, 48 लाख रुपये की एफडी जब्त
- 52 लाख रुपये पिछले रिमांड में हुए थे बरामद
- 2084 कट्टे चावल दूसरे रिमांड में सग्गा के गोदाम में मिला
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। तरावड़ी के चर्चित धान घोटाले में बालाजी राइस मिल के पार्टनर अरुण ने दूसरे पुलिस रिमांड में कई अहम खुलासे किए हैं। अब घोटाले से जुड़े नए हिस्सेदार दादूपुर निवासी अनिल का नाम भी सामने आया है जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
दूसरे रिमांड की अवधि में पुलिस ने अरुण की निशानदेही पर सग्गा गांव के एक गोदाम से 2084 कट्टों में भरा 41 लाख रुपये कीमत का 1042 क्विंटल चावल बरामद किया। साथ ही 48 लाख रुपये की एफडी बरामद कर उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) विभाग के पक्ष में सरेंडर करवाया है जबकि पहले रिमांड में अरुण से 52 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। ऐसे में अब तक बालाजी राइस मिल में हुए 10 हजार क्विंटल यानी 3.50 करोड़ रुपये के धान घोटाले में पुलिस अरुण से करीब 1.41 करोड़ रुपये की रिकवरी कर चुकी है। वीरवार को दूसरे रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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धान कहां बेचा.. और निपटान पर जांच शुरू
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धान को कहां बेचा गया, उससे तैयार चावल का निपटान किस प्रकार किया गया और उससे प्राप्त धनराशि किन-किन लोगों तक पहुंची। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों तथा आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, स्टॉक रिकॉर्ड और गोदामों से जुड़े दस्तावेज भी खंगाल रही हैं।
36 हजार क्विंटल धान गायब मिलने से खुला था राज
मामला उस समय उजागर हुआ था जब जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय की ओर से बालाजी और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में दोनों मिलों से सरकार द्वारा आवंटित करीब 36 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया था जिसकी कीमत लगभग 12.60 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके बाद तरावड़ी थाने में मिल संचालकों और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
बालाजी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल कम पाया गया था धान
जांच में बालाजी राइस मिल में लगभग 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपये थी। निरीक्षण में मिल परिसर में उत्पादन से संबंधित मशीनरी के स्थान पर कबाड़ जैसी स्क्रैप मशीनें मिलने से अधिकारियों का संदेह और गहरा गया था। जांच में तत्कालीन डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, सहायक निरीक्षक रामफल, मिल मालिक मोहित, सुरेंद्र और पार्टनर अरुण की भूमिका सामने आई। अरुण और रामफल गिरफ्तार हो चुके हैं। अब मुख्य आरोपी के तौर पर अनिल वासी दादूपुर का नाम सामने आया है। अनिल समेत बाकियों की पुलिस तलाश कर रही है।