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श्रीलंका में बढ़ रही हिंदी की पहुंच, 12 विवि में हो रही पढ़ाई : सुभाषिनी
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कुरुक्षेत्र। केयू के अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान में सुभाषिनी रत्नायका को सम्मानित करते हुए कुलसचिव
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कुरुक्षेत्र। श्रीलंका में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहां 17 में से 12 विश्वविद्यालयों और करीब 150 विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। पर्यटन, अनुवाद, मीडिया और व्यापार जैसे क्षेत्रों में हिंदी जानने वालों की मांग बढ़ी है। यह जानकारी श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय की शिक्षाविद् सुभाषिनी रत्नायका ने दी। उन्होंने गुरुवार को केयू के हिंदी विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान में यह बात कही।
व्याख्यान का विषय श्रीलंका में हिंदी का विकास और चुनौतियां था। सुभाषिनी रत्नायका ने बताया कि हिंदी भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक व शैक्षणिक संबंधों को मजबूत कर रही है। दोनों देशों के बढ़ते संपर्क से श्रीलंका के युवाओं में हिंदी सीखने की रुचि बढ़ी है। आधुनिक तकनीक, अंकीय शिक्षण सामग्री और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से हिंदी शिक्षा का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
रोजगार और भविष्य की संभावनाएं
केयू के कुलसचिव वीरेंद्र पाल ने हिंदी में विकास की अपार संभावनाएं बताईं। हिंदी विभागाध्यक्ष महासिंह पूनिया ने कहा कि हिंदी विश्व के बाजार और व्यवहार की भाषा बन रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा की वरिष्ठ प्रबंधक सरिता ने बैंकिंग और निगमित क्षेत्र में हिंदी से जुड़े रोजगार के अवसर बताए। राजेश वधवा ने विद्यार्थियों को मीडिया, जनसंचार और अंकीय क्षेत्र में हिंदी की बढ़ती उपयोगिता से अवगत कराया। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल भी पूछे।
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भारत-श्रीलंका प्रधानमंत्रियों की वार्ता का हिंदी अनुवाद कर चुकी हैं रत्नायका
सुभाषिनी रत्नायका ने पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक से जुड़ी आधिकारिक सामग्री का हिंदी अनुवाद किया था। इसे भारत-श्रीलंका संबंधों में हिंदी की बढ़ती भूमिका और उनकी अनुवाद विशेषज्ञता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
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व्याख्यान का विषय श्रीलंका में हिंदी का विकास और चुनौतियां था। सुभाषिनी रत्नायका ने बताया कि हिंदी भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक व शैक्षणिक संबंधों को मजबूत कर रही है। दोनों देशों के बढ़ते संपर्क से श्रीलंका के युवाओं में हिंदी सीखने की रुचि बढ़ी है। आधुनिक तकनीक, अंकीय शिक्षण सामग्री और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से हिंदी शिक्षा का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
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रोजगार और भविष्य की संभावनाएं
केयू के कुलसचिव वीरेंद्र पाल ने हिंदी में विकास की अपार संभावनाएं बताईं। हिंदी विभागाध्यक्ष महासिंह पूनिया ने कहा कि हिंदी विश्व के बाजार और व्यवहार की भाषा बन रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा की वरिष्ठ प्रबंधक सरिता ने बैंकिंग और निगमित क्षेत्र में हिंदी से जुड़े रोजगार के अवसर बताए। राजेश वधवा ने विद्यार्थियों को मीडिया, जनसंचार और अंकीय क्षेत्र में हिंदी की बढ़ती उपयोगिता से अवगत कराया। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल भी पूछे।
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भारत-श्रीलंका प्रधानमंत्रियों की वार्ता का हिंदी अनुवाद कर चुकी हैं रत्नायका
सुभाषिनी रत्नायका ने पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक से जुड़ी आधिकारिक सामग्री का हिंदी अनुवाद किया था। इसे भारत-श्रीलंका संबंधों में हिंदी की बढ़ती भूमिका और उनकी अनुवाद विशेषज्ञता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।