{"_id":"69daa34870fa3ca9cb02959e","slug":"government-must-clarify-minimum-wage-and-ppp-income-limit-vijay-chhillar-narnol-news-c-196-1-nnl1010-138409-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यूनतम मजदूरी और पीपीपी आय सीमा पर सरकार दे स्पष्टीकरण : विजय छिलरों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यूनतम मजदूरी और पीपीपी आय सीमा पर सरकार दे स्पष्टीकरण : विजय छिलरों
विज्ञापन
विज्ञापन
नारनौल। जजपा के जिला प्रवक्ता विजय छिलरों ने हरियाणा सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए न्यूनतम मजदूरी और पीपीपी आय सीमा को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है। साथ ही मांग की कि सरकार पीपीपी आय सीमा और न्यूनतम मजदूरी पर तुरंत स्थिति स्पष्ट करे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पीपीपी में 18,000 रुपये मासिक आय की सीमा तय कर रखी है। ऐसे में यदि न्यूनतम मजदूरी को ही आय मान लिया गया तो प्रदेश के हजारों गरीब और मजदूर परिवार बीपीएल श्रेणी से बाहर हो सकते हैं जो उनके लिए चिंता का विषय है
छिलरों ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसानों के अनाज को बुलडोजर से उठाया जा रहा है जो व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसानों के अनाज को दागी बताकर उन्हें परेशान कर रही है।
साथ ही बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों के लिए किसानों को 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। उन्होंने अनाज खरीद और उठान प्रणाली में सुधार और नए खरीद कानूनों को वापस लेने की भी मांग की।
छिलरों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो जजपा मजदूर और किसान संगठनों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।
Trending Videos
उन्होंने कहा कि सरकार ने पीपीपी में 18,000 रुपये मासिक आय की सीमा तय कर रखी है। ऐसे में यदि न्यूनतम मजदूरी को ही आय मान लिया गया तो प्रदेश के हजारों गरीब और मजदूर परिवार बीपीएल श्रेणी से बाहर हो सकते हैं जो उनके लिए चिंता का विषय है
विज्ञापन
विज्ञापन
छिलरों ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसानों के अनाज को बुलडोजर से उठाया जा रहा है जो व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसानों के अनाज को दागी बताकर उन्हें परेशान कर रही है।
साथ ही बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों के लिए किसानों को 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। उन्होंने अनाज खरीद और उठान प्रणाली में सुधार और नए खरीद कानूनों को वापस लेने की भी मांग की।
छिलरों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो जजपा मजदूर और किसान संगठनों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।