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Palwal News: झज्जर व नारनौल में भी रेड क्रॉस सचिव के कार्यकाल की हो सकती है जांच
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- विभाग में सुर्खियों में रहे हैं नूंह रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह रेडक्रॉस सचिव महेश गुप्ता पर शिकंजा कसता जा रहा है। नूंह में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद अब नारनौल और झज्जर कई जिलों में उनके कार्यकाल की भी जांच शुरू होने की उम्मीद है। चंडीगढ़ से आई जांच टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है, जिसके बाद पूरे मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि रेडक्रॉस सचिव महेश गुप्ता ने नूंह में अपने ही बेटे को अकाउंटेंट के पद पर नियुक्त करवा रखा था। आरोप है कि पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने लंबे समय तक विभाग में जमकर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बेटे को कथित तौर पर डबल वेतन दिया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 23 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने संबंधित दस्तावेज और रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय को सौंप दी है। माना जा रहा है कि यह मामला आगामी उच्च स्तरीय बैठकों, यहां तक कि गवर्नर स्तर की समीक्षा बैठक में भी उठ सकता है।
महेश गुप्ता का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है। सूत्र बताते हैं कि वे लंबे समय से अनियमितताओं और विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इतना ही नहीं, एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उनका नाम सामने आने पर नाराज हो गए थे।
अब चंडीगढ़ की विशेष जांच टीम उन सभी जिलों के रिकॉर्ड खंगाल की तैयारी में है, जहां महेश गुप्ता तैनात रह चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग के भीतर भी महेश गुप्ता की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब मेवात में जांच के दौरान जो दस्तावेज सामने आए हैं, उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अ
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह रेडक्रॉस सचिव महेश गुप्ता पर शिकंजा कसता जा रहा है। नूंह में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद अब नारनौल और झज्जर कई जिलों में उनके कार्यकाल की भी जांच शुरू होने की उम्मीद है। चंडीगढ़ से आई जांच टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है, जिसके बाद पूरे मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि रेडक्रॉस सचिव महेश गुप्ता ने नूंह में अपने ही बेटे को अकाउंटेंट के पद पर नियुक्त करवा रखा था। आरोप है कि पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने लंबे समय तक विभाग में जमकर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बेटे को कथित तौर पर डबल वेतन दिया जा रहा था।
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सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 23 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने संबंधित दस्तावेज और रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय को सौंप दी है। माना जा रहा है कि यह मामला आगामी उच्च स्तरीय बैठकों, यहां तक कि गवर्नर स्तर की समीक्षा बैठक में भी उठ सकता है।
महेश गुप्ता का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है। सूत्र बताते हैं कि वे लंबे समय से अनियमितताओं और विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इतना ही नहीं, एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उनका नाम सामने आने पर नाराज हो गए थे।
अब चंडीगढ़ की विशेष जांच टीम उन सभी जिलों के रिकॉर्ड खंगाल की तैयारी में है, जहां महेश गुप्ता तैनात रह चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग के भीतर भी महेश गुप्ता की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब मेवात में जांच के दौरान जो दस्तावेज सामने आए हैं, उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अ