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Panchkula News: कालका में रैन बसेरे मौजूद, पर जागरूकता के अभाव में खाली
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Updated Sat, 10 Jan 2026 01:42 AM IST
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बोर्ड-बैनर न होने से जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रही सुविधा
फोटो नंबर: 09पीएएनकेएलेपी03,04
संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। कंपकंपाने वाली ठंड में जरूरतमंदों के लिए नगर परिषद द्वारा रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह सुविधा लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रही है। ठंड से बचाव के लिए नगर परिषद ने कालका में तीन स्थानों पर अस्थायी रैन बसेरे बनाए हैं, लेकिन इन रैन बसेरों के बाहर किसी भी प्रकार का बोर्ड या बैनर नहीं लगाया गया है। ऐसे में बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को यह जानकारी ही नहीं मिल पा रही कि रात्रि विश्राम की व्यवस्था आखिर कहां की गई है।
नगर परिषद द्वारा कालका सब्जी मंडी और राजकीय महाविद्यालय के समीप स्थित दो लोहे के बंद शेल्टरों को भी रैन बसेरा घोषित किया गया है। ये शेल्टर पहले नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के बैठने और सामान रखने के लिए उपयोग में लाए जाते थे। अब बिना किसी पहचान, सूचना या साइन बोर्ड के इन्हें रैन बसेरा बता दिया गया है। मौके पर ऐसा कोई संकेत नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यहां बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा नगर परिषद ने रामबाग रोड के पास, राजकीय महाविद्यालय की ओर जाने वाले मार्ग के किनारे तथा रेलवे रोड स्थित अंबेडकर भवन में भी रैन बसेरों की व्यवस्था की है। इन सभी स्थानों पर बिस्तर, तकिए और गर्म कंबल उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन साइन बोर्ड न होने के कारण ये व्यवस्थाएं जरूरतमंदों की नजरों से ओझल बनी हुई हैं।
सूचना बोर्ड लगाए जाने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक रैन बसेरों के बाहर स्पष्ट रूप से रैन बसेरा लिखे बोर्ड और दिशा-सूचक संकेत नहीं लगाए जाते, तब तक जरूरतमंद लोग इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने नगर परिषद से मांग की है कि तुरंत इन स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि ठंड से बचाव के लिए की गई यह व्यवस्था वास्तव में जरूरतमंदों के काम आ सके।
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कालका। कंपकंपाने वाली ठंड में जरूरतमंदों के लिए नगर परिषद द्वारा रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह सुविधा लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रही है। ठंड से बचाव के लिए नगर परिषद ने कालका में तीन स्थानों पर अस्थायी रैन बसेरे बनाए हैं, लेकिन इन रैन बसेरों के बाहर किसी भी प्रकार का बोर्ड या बैनर नहीं लगाया गया है। ऐसे में बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को यह जानकारी ही नहीं मिल पा रही कि रात्रि विश्राम की व्यवस्था आखिर कहां की गई है।
नगर परिषद द्वारा कालका सब्जी मंडी और राजकीय महाविद्यालय के समीप स्थित दो लोहे के बंद शेल्टरों को भी रैन बसेरा घोषित किया गया है। ये शेल्टर पहले नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के बैठने और सामान रखने के लिए उपयोग में लाए जाते थे। अब बिना किसी पहचान, सूचना या साइन बोर्ड के इन्हें रैन बसेरा बता दिया गया है। मौके पर ऐसा कोई संकेत नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यहां बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध है।
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इसके अलावा नगर परिषद ने रामबाग रोड के पास, राजकीय महाविद्यालय की ओर जाने वाले मार्ग के किनारे तथा रेलवे रोड स्थित अंबेडकर भवन में भी रैन बसेरों की व्यवस्था की है। इन सभी स्थानों पर बिस्तर, तकिए और गर्म कंबल उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन साइन बोर्ड न होने के कारण ये व्यवस्थाएं जरूरतमंदों की नजरों से ओझल बनी हुई हैं।
सूचना बोर्ड लगाए जाने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक रैन बसेरों के बाहर स्पष्ट रूप से रैन बसेरा लिखे बोर्ड और दिशा-सूचक संकेत नहीं लगाए जाते, तब तक जरूरतमंद लोग इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने नगर परिषद से मांग की है कि तुरंत इन स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि ठंड से बचाव के लिए की गई यह व्यवस्था वास्तव में जरूरतमंदों के काम आ सके।