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Panchkula News: मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में ऑक्सीजन पाइप चोरी, वेंटिलेटर पर अटक गईं दो मासूमों की सांसें
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मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में ऑक्सीजन पाइप चोरी, वेंटिलेटर पर अटक गईं दो मासूमों की सांसें
पंचकूला एमसीएच में सुरक्षा की सबसे बड़ी चूक; ऑक्सीजन लाइन कटते ही ठप हुई सप्लाई
पीकू वार्ड में मचा हड़कंप, डॉक्टर-नर्सों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, दो आरोपी दबोचे
पंचकूला। सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (एमसीएच) में शुक्रवार को हड़कंप मच गया। दो चोर अस्पताल के मुख्य गेट से बेखौफ भीतर दाखिल हुए, लिफ्ट से सीधे सातवीं मंजिल तक पहुंचे और केंद्रीय ऑक्सीजन पाइपलाइन की कॉपर पाइप काटकर भाग निकले। पाइप कटते ही पूरे अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई ठप हो गई। इसका सबसे खतरनाक असर चौथी मंजिल स्थित पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में हुआ जहां वेंटिलेटर पर भर्ती दो नवजातों की सांसें अचानक लड़खड़ाने लगीं। कुछ मिनट के लिए पूरा वार्ड जिंदगी और मौत की दौड़ में बदल गया। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों ने दौड़कर सिलिंडर लगाए और दोनों बच्चों को वैकल्पिक ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिया। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना बीते शुक्रवार शाम करीब पांच बजे की है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार दो संदिग्ध युवक मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आए। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो कर्मचारियों ने पूछताछ की कोशिश की लेकिन दोनों तेजी से लिफ्ट में सवार होकर सातवीं मंजिल पहुंच गए। यह मंजिल वीआईपी कमरों के लिए बनाई गई है और फिलहाल खाली है। आरोपियों ने वहां एक कमरे की फॉल्स सीलिंग तोड़ी और उसके भीतर से गुजर रही लगभग 25 फुट लंबी कॉपर ऑक्सीजन पाइप काटकर फरार हो गए।
पाइप कटते ही अस्पताल की केंद्रीय ऑक्सीजन प्रणाली ध्वस्त हो गई। कुछ ही सेकंड में गैस का दबाव गिरा और चौथी मंजिल स्थित पीकू वार्ड में वेंटिलेटर पर भर्ती दो नवजातों की स्थिति बिगड़ने लगी। मॉनिटर पर अलार्म बजने लगे। वार्ड में मौजूद डॉक्टरों और नर्सों ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया। एसएनओ, पीएमओ, अतिरिक्त पीएमओ, तकनीकी टीम और नर्सिंग स्टाफ कुछ ही मिनटों में सक्रिय हो गया। ऑक्सीजन सिलेंडर तत्काल वार्ड में पहुंचाए गए और दोनों बच्चों को वैकल्पिक सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया। इस पूरी कवायद के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
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एक घंटे में बहाल हो सकी सप्लाई
तकनीकी टीम को ऑक्सीजन रिसाव का स्रोत तलाशने और केंद्रीय सप्लाई बहाल करने में करीब एक घंटा लगा। इस दौरान पूरे अस्पताल में एहतियातन 40 ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाए गए ताकि किसी अन्य वार्ड में संकट पैदा न हो। राहत की बात यह रही कि उस समय गायनी ऑपरेशन थिएटर में कोई सर्जरी नहीं चल रही थी। अस्पताल में सामान्य दिनों में कई प्रसूताएं भर्ती रहती हैं और किसी भी आपात स्थिति में ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता जीवनरक्षक होती है।
चोरी पाइप की कीमत महज चार हजार रुपये
विडंबना यह है कि चोरी गई पाइप की कीमत महज करीब चार हजार रुपये बताई जा रही है जबकि इस घटना से अस्पताल को लगभग साढ़े तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ। इससे कहीं बड़ा नुकसान वह खतरा था जिसमें दो नवजातों की जान दांव पर लग गई। हैरानी की बात यह है कि जिस अस्पताल में एनआईसीयू, पीकू और गायनी जैसे अत्यंत संवेदनशील वार्ड संचालित होते हैं, वहां ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण जीवनरक्षक प्रणाली तक कोई भी व्यक्ति इतनी आसानी से कैसे पहुंच गया?
सूरजपुर से आरोपियों को दबोचा
अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों आरोपी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दे रहे हैं। शनिवार को डीसीपी क्राइम और थाना पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सूरजपुर क्षेत्र से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे पूछताछ जारी है कि क्या उन्होंने पहले भी अस्पतालों को निशाना बनाया है और क्या उनके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है।
ऑक्सीजन पाइप, संवेदनशील वार्डों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। एमसीएच सहित अन्य सरकारी अस्पतालों की ऑक्सीजन पाइपलाइन, संवेदनशील वार्डों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। एमसीएच में अब रात के समय केवल एक प्रवेश द्वार खुला रहेगा। सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या यह व्यवस्था पहले नहीं होनी चाहिए थी?
पांच सवाल जिनका जवाब जरूरी
संदिग्धों को देखकर रोका गया तो वे सातवीं मंजिल तक कैसे पहुंच गए?
क्रिटिकल अस्पताल में ऑक्सीजन पाइपलाइन खुले हिस्से में क्यों थी?
ऑटोमैटिक बैकअप सिस्टम तुरंत सक्रिय क्यों नहीं हुआ?
सातवीं मंजिल पर सुरक्षा कर्मी या एक्सेस कंट्रोल क्यों नहीं था?
पहले भी चोरी की घटनाओं के बाद सुरक्षा मजबूत क्यों नहीं की गई?
कुछ मिनट और... बड़ा हादसा तय था
दो नवजात वेंटिलेटर पर थे।
केंद्रीय ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई।
डॉक्टरों ने तुरंत सिलिंडर लगाए।
तकनीकी टीम ने एक घंटे बाद सप्लाई बहाल की।
अस्पताल में 40 अतिरिक्त सिलेंडर मंगवाने पड़े।
एमसीएच पंचकूला
100 बेड का मातृ एवं शिशु अस्पताल
प्रतिदिन 800-1000 मरीजों की ओपीडी
पीकू, एनआईसीयू, गायनी और सर्जिकल जैसे क्रिटिकल वार्ड
जिले का सबसे बड़ा मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर
अधिकारियों के बयान
संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। -डॉ. राजिंदर सैनी, अतिरिक्त पीएमओ, एमसीएच
ऑक्सीजन बाधित होते ही पूरी मेडिकल, नर्सिंग और तकनीकी टीम ने इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया। समय रहते सिलेंडर उपलब्ध करा दिए गए, जिससे दोनों नवजात सुरक्षित हैं। -डॉ. आर.एस. चौहान, पीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग
मामले में एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा कराई जा रही है। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला
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पंचकूला एमसीएच में सुरक्षा की सबसे बड़ी चूक
पीकू वार्ड में मचा हड़कंप, डॉक्टर-नर्सों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, दो आरोपी दबोचे
पंचकूला। सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (एमसीएच) में शुक्रवार को हड़कंप मच गया। दो चोर अस्पताल के मुख्य गेट से बेखौफ भीतर दाखिल हुए, लिफ्ट से सीधे सातवीं मंजिल तक पहुंचे और केंद्रीय ऑक्सीजन पाइपलाइन की कॉपर पाइप काटकर भाग निकले। पाइप कटते ही पूरे अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई ठप हो गई। इसका सबसे खतरनाक असर चौथी मंजिल स्थित पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में हुआ जहां वेंटिलेटर पर भर्ती दो नवजातों की सांसें अचानक लड़खड़ाने लगीं। कुछ मिनट के लिए पूरा वार्ड जिंदगी और मौत की दौड़ में बदल गया। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों ने दौड़कर सिलिंडर लगाए और दोनों बच्चों को वैकल्पिक ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिया। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना बीते शुक्रवार शाम करीब पांच बजे की है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार दो संदिग्ध युवक मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आए। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो कर्मचारियों ने पूछताछ की कोशिश की लेकिन दोनों तेजी से लिफ्ट में सवार होकर सातवीं मंजिल पहुंच गए। यह मंजिल वीआईपी कमरों के लिए बनाई गई है और फिलहाल खाली है। आरोपियों ने वहां एक कमरे की फॉल्स सीलिंग तोड़ी और उसके भीतर से गुजर रही लगभग 25 फुट लंबी कॉपर ऑक्सीजन पाइप काटकर फरार हो गए।
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पाइप कटते ही अस्पताल की केंद्रीय ऑक्सीजन प्रणाली ध्वस्त हो गई। कुछ ही सेकंड में गैस का दबाव गिरा और चौथी मंजिल स्थित पीकू वार्ड में वेंटिलेटर पर भर्ती दो नवजातों की स्थिति बिगड़ने लगी। मॉनिटर पर अलार्म बजने लगे। वार्ड में मौजूद डॉक्टरों और नर्सों ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया। एसएनओ, पीएमओ, अतिरिक्त पीएमओ, तकनीकी टीम और नर्सिंग स्टाफ कुछ ही मिनटों में सक्रिय हो गया। ऑक्सीजन सिलेंडर तत्काल वार्ड में पहुंचाए गए और दोनों बच्चों को वैकल्पिक सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया। इस पूरी कवायद के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
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एक घंटे में बहाल हो सकी सप्लाई
तकनीकी टीम को ऑक्सीजन रिसाव का स्रोत तलाशने और केंद्रीय सप्लाई बहाल करने में करीब एक घंटा लगा। इस दौरान पूरे अस्पताल में एहतियातन 40 ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाए गए ताकि किसी अन्य वार्ड में संकट पैदा न हो। राहत की बात यह रही कि उस समय गायनी ऑपरेशन थिएटर में कोई सर्जरी नहीं चल रही थी। अस्पताल में सामान्य दिनों में कई प्रसूताएं भर्ती रहती हैं और किसी भी आपात स्थिति में ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता जीवनरक्षक होती है।
चोरी पाइप की कीमत महज चार हजार रुपये
विडंबना यह है कि चोरी गई पाइप की कीमत महज करीब चार हजार रुपये बताई जा रही है जबकि इस घटना से अस्पताल को लगभग साढ़े तीन लाख रुपये का नुकसान हुआ। इससे कहीं बड़ा नुकसान वह खतरा था जिसमें दो नवजातों की जान दांव पर लग गई। हैरानी की बात यह है कि जिस अस्पताल में एनआईसीयू, पीकू और गायनी जैसे अत्यंत संवेदनशील वार्ड संचालित होते हैं, वहां ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण जीवनरक्षक प्रणाली तक कोई भी व्यक्ति इतनी आसानी से कैसे पहुंच गया?
सूरजपुर से आरोपियों को दबोचा
अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों आरोपी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दे रहे हैं। शनिवार को डीसीपी क्राइम और थाना पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सूरजपुर क्षेत्र से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे पूछताछ जारी है कि क्या उन्होंने पहले भी अस्पतालों को निशाना बनाया है और क्या उनके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है।
ऑक्सीजन पाइप, संवेदनशील वार्डों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। एमसीएच सहित अन्य सरकारी अस्पतालों की ऑक्सीजन पाइपलाइन, संवेदनशील वार्डों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। एमसीएच में अब रात के समय केवल एक प्रवेश द्वार खुला रहेगा। सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या यह व्यवस्था पहले नहीं होनी चाहिए थी?
पांच सवाल जिनका जवाब जरूरी
संदिग्धों को देखकर रोका गया तो वे सातवीं मंजिल तक कैसे पहुंच गए?
क्रिटिकल अस्पताल में ऑक्सीजन पाइपलाइन खुले हिस्से में क्यों थी?
ऑटोमैटिक बैकअप सिस्टम तुरंत सक्रिय क्यों नहीं हुआ?
सातवीं मंजिल पर सुरक्षा कर्मी या एक्सेस कंट्रोल क्यों नहीं था?
पहले भी चोरी की घटनाओं के बाद सुरक्षा मजबूत क्यों नहीं की गई?
कुछ मिनट और... बड़ा हादसा तय था
दो नवजात वेंटिलेटर पर थे।
केंद्रीय ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई।
डॉक्टरों ने तुरंत सिलिंडर लगाए।
तकनीकी टीम ने एक घंटे बाद सप्लाई बहाल की।
अस्पताल में 40 अतिरिक्त सिलेंडर मंगवाने पड़े।
एमसीएच पंचकूला
100 बेड का मातृ एवं शिशु अस्पताल
प्रतिदिन 800-1000 मरीजों की ओपीडी
पीकू, एनआईसीयू, गायनी और सर्जिकल जैसे क्रिटिकल वार्ड
जिले का सबसे बड़ा मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर
अधिकारियों के बयान
संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जा रही है। -डॉ. राजिंदर सैनी, अतिरिक्त पीएमओ, एमसीएच
ऑक्सीजन बाधित होते ही पूरी मेडिकल, नर्सिंग और तकनीकी टीम ने इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया। समय रहते सिलेंडर उपलब्ध करा दिए गए, जिससे दोनों नवजात सुरक्षित हैं। -डॉ. आर.एस. चौहान, पीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग
मामले में एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा कराई जा रही है। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला