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Panipat News: पानीपत के निर्यातकों पर दोहरी मार... ऑर्डर कम, समुद्री माल भाड़ा दोगुना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:56 AM IST
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Double whammy for Panipat exporters... fewer orders, doubled ocean freight charges.
जगमहेंद्र सरोहा पानीपत। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब टेक्सटाइल सिटी पानीपत के निर्यात कारोबार पर गहराने लगा है। वैश्विक मंदी के बीच जहां नए ऑर्डर पहले से ही कम हैं, वहीं जो सीमित ऑर्डर मिल रहे हैं, उनकी समय पर डिलीवरी भी चुनौती बन गई है।
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इसके साथ ही शिपिंग कंपनियों द्वारा समुद्री माल भाड़े में की गई भारी बढ़ोतरी ने निर्यातकों की लागत बढ़ा दी है, जिससे मुनाफे का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।
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पानीपत से हर वर्ष लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है, जिसमें अकेले अमेरिका का हिस्सा करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद वहां निर्यात 25 से 30 प्रतिशत तक घट गया है।
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अब पश्चिम एशिया के देशों में तनाव और समुद्री रूट प्रभावित होने के कारण व्यापारिक गतिविधियां और अधिक प्रभावित हुई हैं। निर्यातक नरेश गोयल ने बताया कि शिपिंग कंपनियों ने विभिन्न रूटों पर माल भाड़ा बढ़ा दिया है। लैटिन अमेरिका के लिए प्रति कंटेनर समुद्री किराया जहां पहले करीब 4,000 डॉलर था, अब बढ़कर 5,000 डॉलर से अधिक हो गया है। यानी लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे निर्यात लागत पर सीधा असर पड़ रहा है।
जहाजों का रोटेशन बिगड़ा, डिलीवरी में देरी
हैंडलूम निर्यातक गुलशन मल्होत्रा के अनुसार, मौजूदा तनाव के कारण जहाजों (वेसल्स) का नियमित रोटेशन प्रभावित हुआ है। पर्याप्त संख्या में जहाज उपलब्ध न होने से शिपिंग का पूरा सर्कल टूट गया है। पहले जहां माल 40 दिनों में गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब वही समय बढ़कर 55 से 60 दिन तक पहुंच गया है। कई मामलों में इससे भी अधिक देरी हो रही है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।

हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि जहाजों की देरी से पोर्ट पर कंटेनरों की पेंडेंसी बढ़ गई है। पानीपत से माल मुंबई पोर्ट भेजने के बाद यदि निर्धारित एक सप्ताह के भीतर जहाज उपलब्ध नहीं होता, तो भारी डिटेंशन चार्ज लगाया जाता है। यह चार्ज 25 से 30 हजार रुपये प्रति कंटेनर तक है, जिससे निर्यातकों की लागत अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। इसका असर नए ऑर्डरों पर भी पड़ रहा है, जिनमें लगातार कमी देखी जा रही है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार लंबे समय से अस्थिर है। नए ऑर्डर कम आ रहे हैं और जो मिल रहे हैं, उनकी समय पर डिलीवरी बड़ी चुनौती बन गई है। बढ़ते किराये और जुर्माने के कारण भारतीय निर्यातक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। -विनोद धमीजा, जिला प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स
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