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Panipat News: सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र है पट्टीकल्याणा
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पट्टी कल्याणा गांव का मुख्य द्वार। संवाद
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कुलदीप राठी
पट्टीकल्याणा (समालखा)। जीटी रोड पर बसा पट्टीकल्याणा गांव केवल एक सामान्य ग्रामीण अंचल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अनूठा केंद्र है। लगभग 10वीं ईस्वी का बसा यह प्राचीन गांव आज भी अपने भीतर सदियों पुरानी मान्यताओं और गौरव गाथाओं को समेटे हुए है। इस धरती का इतिहास अध्यात्म, राष्ट्र भक्ति और सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत है।
ग्रामीण सतपाल छौक्कर ने बताया कि गांव के नामकरण के पीछे एक बेहद दिलचस्प और प्राचीन कहानी है। चुलकाना से बाबा चूहड़ सिंह इस क्षेत्र में आए थे। उस समय चुलकाना के निवासियों ने इस क्षेत्र की जमीन का एक बड़ा टुकड़ा उन्हें दान स्वरूप भेंट किया था। जमीन के इस हिस्से या पट्टी के कारण ही इस स्थान के नाम के आगे पट्टी शब्द जुड़ा। इसके अतिरिक्त, गांव में एक प्राचीन जोड़ (तालाब) है। इसे वर्तमान में सिंहरावाला जोहड़ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां शृंगी ऋषि ने कठोर तपस्या की थी। उस समय जो भी श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर ऋषि के पास आते थे, वे उन्हें आशीर्वाद स्वरूप कल्याण हो कहते थे। ऋषि के इसी कल्याण हो के आशीर्वाद के चलते इस क्षेत्र का नाम कल्याणा पड़ गया। बाद में इन दोनों ऐतिहासिक कड़ियों के मिलन से यह गांव पट्टीकल्याणा के नाम से विख्यात हुआ।
नेहरू और विनोबा भावे की कर्मस्थली रहा गांधी आश्रम
पट्टीकल्याणा गांव की सबसे बड़ी शान यहां स्थित गांधी आश्रम है। इसकी स्थापना के पीछे भी एक गौरवमयी इतिहास है। भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे से प्रेरित होकर इस गांव ने अपनी करीब 15 एकड़ भूमि आंदोलन के तहत दान में दे दी थी। इस दान की भूमि पर गांधी आश्रम का निर्माण हुआ। यहां आज भी एक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। यह स्थान इतना महत्वपूर्ण रहा है कि स्वयं आचार्य विनोबा भावे यहां कई दिनों तक प्रवास कर चुके हैं। यही नहीं, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी विनोबा भावे से मुलाकात करने के लिए विशेष रूप से पट्टीकल्याणा गांव आए थे। पट्टीकल्याणा गांव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उत्तर भारत का बड़ा केंद्र है। इसका सेवा साधना केंद्र है। यहां संघ की राष्ट्र स्तरीय बैठक होती हैं।
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गांव एक नजर
-गांव की जनसंख्या लगभग 15 हजार
-वोट 7200
-स्कूल- तीन
-मंदिर पांच
-एक गुरुद्वारा
कोट्स फोटो
सतपाल छौक्कर ने बताया कि हमारे गांव का नाम बाबा चूहड़ सिंह और शृंगी ऋषि की पावन कृपा से पड़ा। चुलकाना वालों ने जमीन दान दी तो पट्टी कहलाया और ऋषि के कल्याण हो के आशीर्वाद से यह कल्याणा बना।
कोट्स फोटो
जिले सिंह ने बताया कि पट्टीकल्याणा लगभग 10वीं ईस्वी का बसा हुआ एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक गांव है, जिसने हर दौर में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।
कोट्स फोटो
सूबेदार कर्ण सिंह ने बताया कि यह वीरों की भूमि है। देश की आजादी की बात हो या 1962 और 1971 के युद्ध, हमारे गांव के वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में कभी पैर पीछे नहीं खींचे।
कोट्स फोटो
रामपाल ने बताया कि हमारे गांव ने देश को बड़े-बड़े नामी-गिरामी अधिकारी और सैनिक दिए हैं। यहां से कई ब्रिगेडियर, आईएएस अधिकारी और खेल जगत की नामचीन हस्तियां निकली हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है।
कोट्स फोटो
हरकेश चंद ने बताया कि भूदान आंदोलन के समय जब विनोबा भावे ने अलख जगाई, तब हमारे बुजुर्गों ने प्रेरित होकर करीब 15 एकड़ जमीन दान में दे दी थी। इसी उदारता के कारण आज यहां ऐतिहासिक गांधी आश्रम खड़ा है।
कोट्स फोटो
कवर सिंह ने बताया कि गांधी आश्रम हमारे पट्टीकल्याणा गांव की सबसे बड़ी शान है। यहां स्वयं विनोबा भावे जी रहे और पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनसे मिलने हमारे गांव आए थे। यह हमारे लिए गर्व की बात है।
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पट्टीकल्याणा (समालखा)। जीटी रोड पर बसा पट्टीकल्याणा गांव केवल एक सामान्य ग्रामीण अंचल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अनूठा केंद्र है। लगभग 10वीं ईस्वी का बसा यह प्राचीन गांव आज भी अपने भीतर सदियों पुरानी मान्यताओं और गौरव गाथाओं को समेटे हुए है। इस धरती का इतिहास अध्यात्म, राष्ट्र भक्ति और सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत है।
ग्रामीण सतपाल छौक्कर ने बताया कि गांव के नामकरण के पीछे एक बेहद दिलचस्प और प्राचीन कहानी है। चुलकाना से बाबा चूहड़ सिंह इस क्षेत्र में आए थे। उस समय चुलकाना के निवासियों ने इस क्षेत्र की जमीन का एक बड़ा टुकड़ा उन्हें दान स्वरूप भेंट किया था। जमीन के इस हिस्से या पट्टी के कारण ही इस स्थान के नाम के आगे पट्टी शब्द जुड़ा। इसके अतिरिक्त, गांव में एक प्राचीन जोड़ (तालाब) है। इसे वर्तमान में सिंहरावाला जोहड़ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां शृंगी ऋषि ने कठोर तपस्या की थी। उस समय जो भी श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर ऋषि के पास आते थे, वे उन्हें आशीर्वाद स्वरूप कल्याण हो कहते थे। ऋषि के इसी कल्याण हो के आशीर्वाद के चलते इस क्षेत्र का नाम कल्याणा पड़ गया। बाद में इन दोनों ऐतिहासिक कड़ियों के मिलन से यह गांव पट्टीकल्याणा के नाम से विख्यात हुआ।
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नेहरू और विनोबा भावे की कर्मस्थली रहा गांधी आश्रम
पट्टीकल्याणा गांव की सबसे बड़ी शान यहां स्थित गांधी आश्रम है। इसकी स्थापना के पीछे भी एक गौरवमयी इतिहास है। भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे से प्रेरित होकर इस गांव ने अपनी करीब 15 एकड़ भूमि आंदोलन के तहत दान में दे दी थी। इस दान की भूमि पर गांधी आश्रम का निर्माण हुआ। यहां आज भी एक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। यह स्थान इतना महत्वपूर्ण रहा है कि स्वयं आचार्य विनोबा भावे यहां कई दिनों तक प्रवास कर चुके हैं। यही नहीं, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी विनोबा भावे से मुलाकात करने के लिए विशेष रूप से पट्टीकल्याणा गांव आए थे। पट्टीकल्याणा गांव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उत्तर भारत का बड़ा केंद्र है। इसका सेवा साधना केंद्र है। यहां संघ की राष्ट्र स्तरीय बैठक होती हैं।
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गांव एक नजर
-गांव की जनसंख्या लगभग 15 हजार
-वोट 7200
-स्कूल- तीन
-मंदिर पांच
-एक गुरुद्वारा
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सतपाल छौक्कर ने बताया कि हमारे गांव का नाम बाबा चूहड़ सिंह और शृंगी ऋषि की पावन कृपा से पड़ा। चुलकाना वालों ने जमीन दान दी तो पट्टी कहलाया और ऋषि के कल्याण हो के आशीर्वाद से यह कल्याणा बना।
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जिले सिंह ने बताया कि पट्टीकल्याणा लगभग 10वीं ईस्वी का बसा हुआ एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक गांव है, जिसने हर दौर में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।
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सूबेदार कर्ण सिंह ने बताया कि यह वीरों की भूमि है। देश की आजादी की बात हो या 1962 और 1971 के युद्ध, हमारे गांव के वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने में कभी पैर पीछे नहीं खींचे।
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रामपाल ने बताया कि हमारे गांव ने देश को बड़े-बड़े नामी-गिरामी अधिकारी और सैनिक दिए हैं। यहां से कई ब्रिगेडियर, आईएएस अधिकारी और खेल जगत की नामचीन हस्तियां निकली हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है।
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हरकेश चंद ने बताया कि भूदान आंदोलन के समय जब विनोबा भावे ने अलख जगाई, तब हमारे बुजुर्गों ने प्रेरित होकर करीब 15 एकड़ जमीन दान में दे दी थी। इसी उदारता के कारण आज यहां ऐतिहासिक गांधी आश्रम खड़ा है।
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कवर सिंह ने बताया कि गांधी आश्रम हमारे पट्टीकल्याणा गांव की सबसे बड़ी शान है। यहां स्वयं विनोबा भावे जी रहे और पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनसे मिलने हमारे गांव आए थे। यह हमारे लिए गर्व की बात है।

पट्टी कल्याणा गांव का मुख्य द्वार। संवाद

पट्टी कल्याणा गांव का मुख्य द्वार। संवाद

पट्टी कल्याणा गांव का मुख्य द्वार। संवाद

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