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Panipat News: राजा हरिश्चंद्र का सांग देख दर्शकों की आंखें हुईं नम
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 21 Mar 2026 03:47 AM IST
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पानीपत। आर्य पीजी कॉलेज के ओपी शिंगला सभागार में आयोजित 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणा की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिली। इस दौरान राजा हरिश्चंद्र के सांग के मंचन को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गई। इस अवसर पर लोक कलाकार पद्मश्री डॉ. महावीर गुड्डू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
महोत्सव के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण एसडी कॉलेज की टीम द्वारा प्रस्तुत कालजयी सांग राजा हरिश्चंद्र रहा। कलाकारों ने सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के त्याग, संघर्ष और सत्य के प्रति अडिग आस्था को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। काशी के श्मशान घाट के मार्मिक दृश्य, ढोलक और सारंगी की मधुर लय के साथ इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और सभागार तालियों से गूंज उठा।
डॉ. महावीर गुड्डू ने कहा कि सांग हरियाणा की आत्मा है और इसे सहेजना हर युवा का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोक-कलाओं को नई ऊर्जा देते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि रत्नावली महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लुप्त होती लोक-कलाओं को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने युवा कलाकारों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति की सराहना की। विशिष्ट अतिथि प्रो. कमला कौशिक ने सांग विधा को साहित्य, संगीत और नाट्य का अद्भुत संगम बताते हुए इसकी बढ़ती शैक्षणिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। सांस्कृतिक प्रभारी डॉ. रामनिवास ने बताया कि चार दिवसीय इस महोत्सव में प्रदेशभर की टीमें अपनी प्रस्तुतियां देंगी, जो न केवल मनोरंजन करेंगी बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों का संदेश भी फैलाएंगी। इस माैके पर दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. कमला कौशिक विशिष्ट अतिथि के रूप में माैजूद रहीं। संवाद
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महोत्सव के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण एसडी कॉलेज की टीम द्वारा प्रस्तुत कालजयी सांग राजा हरिश्चंद्र रहा। कलाकारों ने सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के त्याग, संघर्ष और सत्य के प्रति अडिग आस्था को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। काशी के श्मशान घाट के मार्मिक दृश्य, ढोलक और सारंगी की मधुर लय के साथ इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और सभागार तालियों से गूंज उठा।
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डॉ. महावीर गुड्डू ने कहा कि सांग हरियाणा की आत्मा है और इसे सहेजना हर युवा का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोक-कलाओं को नई ऊर्जा देते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि रत्नावली महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लुप्त होती लोक-कलाओं को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने युवा कलाकारों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति की सराहना की। विशिष्ट अतिथि प्रो. कमला कौशिक ने सांग विधा को साहित्य, संगीत और नाट्य का अद्भुत संगम बताते हुए इसकी बढ़ती शैक्षणिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। सांस्कृतिक प्रभारी डॉ. रामनिवास ने बताया कि चार दिवसीय इस महोत्सव में प्रदेशभर की टीमें अपनी प्रस्तुतियां देंगी, जो न केवल मनोरंजन करेंगी बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों का संदेश भी फैलाएंगी। इस माैके पर दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. कमला कौशिक विशिष्ट अतिथि के रूप में माैजूद रहीं। संवाद