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Rewari News: 25 फीसदी पानी बचा, होली पर दुरुपयोग हुआ तो गहराएगा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:46 PM IST
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जेएलएन नहर में कम हुआ पानी। संवाद
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रेवाड़ी। जनस्वास्थ्य विभाग के निर्धारित शेड्यूल के अनुसार एक मार्च को नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। अब तीन दिन विलंब से पानी आने की संभावना है। वर्तमान में 25 फीसदी पानी बचा है और एक दिन छोड़तक जलापूर्ति की जा रही है। ऐसे में होली में अगर पानी का दुरुपयोग किया गया तो संकट गहरा सकता है।
पेयजल की किल्लत को देखते हुए शहरवासियों को पानी की कमी के बीच होली मनानी पड़ सकती है। जनस्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि होली के दिन अतिरिक्त पानी की सप्लाई नहीं की जाएगी। लोगों को नियमित मिल रहे पानी से ही काम चलाना होगा।
यदि पानी की बचत नहीं की गई तो त्योहार पर जल संकट और गहरा सकता है। नहर में पानी इस बार निर्धारित शेड्यूल से तीन दिन देरी से छोड़ा जाएगा।
पहले एक मार्च को सोनीपत के खूबडू हेड से नहर में पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब तीन मार्च को पानी छोड़े जाने की सूचना है। इस देरी के चलते शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल शहर में पिछले करीब 20 दिनों से एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। स्थिति यह है कि बाहरी कॉलोनियों में तो कई बार पानी की मोटर चलने के बावजूद अंतिम घरों तक पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पाता। सप्लाई के समय में भी राशनिंग की जा रही है, जिससे लोगों को जरूरत भर पानी जुटाने में परेशानी हो रही है।
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शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल 14 दिन का होता है जबकि 24 दिन क्लोजिंग समय रहता है। इस बार चार फरवरी को नहर में पानी आना बंद हो गया था और एक मार्च को दोबारा पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब शेड्यूल में बदलाव के कारण तीन दिन की देरी हो गई है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
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वाटर टैंकों में फिलहाल मात्र 25 प्रतिशत पानी ही शेष
शहर में पहले से ही गर्मी की आहट के साथ जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है। यदि समय पर नहर का पानी नहीं पहुंचा तो सप्लाई को दो दिन छोड़कर भी करना पड़ सकता है। ऐसे में त्योहार की खुशी पर पानी की कमी का असर पड़ना तय माना जा रहा है। विभाग के अनुसार शहर के वाटर टैंकों में फिलहाल मात्र 25 प्रतिशत पानी ही शेष है। ऐसे में अतिरिक्त सप्लाई देना संभव नहीं है। यदि लोग पानी का अनावश्यक उपयोग करेंगे, खासकर होली के दौरान रंग खेलने में अधिक पानी बहाया गया, तो अगले कुछ दिनों तक पानी का संकट खड़ा हो सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होने तक नियमित शेड्यूल से ही पानी दिया जाएगा।
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पानी की बचत करने की अपील
जनस्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सूखी होली मनाने को प्राथमिकता दें और पानी की बचत करें। पाइप से रंग खेलने या सड़कों पर पानी बहाने से बचें। घरों में स्टोरेज टैंकों का उपयोग सावधानी से करें और पानी का दुरुपयोग न करें।
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बढ़ती आबादी के सामने व्यवस्था अपर्याप्त
कंपनी बाग निवासी सुजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक बने हैं। इन्हीं टैंकों में नहरी पानी का भंडारण कर पूरे शहर में आपूर्ति की जाती है। बढ़ती आबादी के सामने यह व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है। राजीव यादव ने बताया कि एक और बड़ा वाटर टैंक बन जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता होने से नहर बंद रहने के दिनों में भी नियमित आपूर्ति संभव हो सकेगी। फिलहाल ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से जमीन खरीदने के प्रयास जारी हैं।
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वर्जन:
लोगों को पानी व्यर्थ नहीं बर्बाद करना चाहिए। पहले एक मार्च को नहर में पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब तीन मार्च को पानी छोड़े जाने की संभावना है। -हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी
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पेयजल की किल्लत को देखते हुए शहरवासियों को पानी की कमी के बीच होली मनानी पड़ सकती है। जनस्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि होली के दिन अतिरिक्त पानी की सप्लाई नहीं की जाएगी। लोगों को नियमित मिल रहे पानी से ही काम चलाना होगा।
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यदि पानी की बचत नहीं की गई तो त्योहार पर जल संकट और गहरा सकता है। नहर में पानी इस बार निर्धारित शेड्यूल से तीन दिन देरी से छोड़ा जाएगा।
पहले एक मार्च को सोनीपत के खूबडू हेड से नहर में पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब तीन मार्च को पानी छोड़े जाने की सूचना है। इस देरी के चलते शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल शहर में पिछले करीब 20 दिनों से एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। स्थिति यह है कि बाहरी कॉलोनियों में तो कई बार पानी की मोटर चलने के बावजूद अंतिम घरों तक पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पाता। सप्लाई के समय में भी राशनिंग की जा रही है, जिससे लोगों को जरूरत भर पानी जुटाने में परेशानी हो रही है।
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शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल 14 दिन का होता है जबकि 24 दिन क्लोजिंग समय रहता है। इस बार चार फरवरी को नहर में पानी आना बंद हो गया था और एक मार्च को दोबारा पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब शेड्यूल में बदलाव के कारण तीन दिन की देरी हो गई है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
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वाटर टैंकों में फिलहाल मात्र 25 प्रतिशत पानी ही शेष
शहर में पहले से ही गर्मी की आहट के साथ जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है। यदि समय पर नहर का पानी नहीं पहुंचा तो सप्लाई को दो दिन छोड़कर भी करना पड़ सकता है। ऐसे में त्योहार की खुशी पर पानी की कमी का असर पड़ना तय माना जा रहा है। विभाग के अनुसार शहर के वाटर टैंकों में फिलहाल मात्र 25 प्रतिशत पानी ही शेष है। ऐसे में अतिरिक्त सप्लाई देना संभव नहीं है। यदि लोग पानी का अनावश्यक उपयोग करेंगे, खासकर होली के दौरान रंग खेलने में अधिक पानी बहाया गया, तो अगले कुछ दिनों तक पानी का संकट खड़ा हो सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होने तक नियमित शेड्यूल से ही पानी दिया जाएगा।
पानी की बचत करने की अपील
जनस्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सूखी होली मनाने को प्राथमिकता दें और पानी की बचत करें। पाइप से रंग खेलने या सड़कों पर पानी बहाने से बचें। घरों में स्टोरेज टैंकों का उपयोग सावधानी से करें और पानी का दुरुपयोग न करें।
बढ़ती आबादी के सामने व्यवस्था अपर्याप्त
कंपनी बाग निवासी सुजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान में कालाका में पांच और लिसाना में तीन वाटर टैंक बने हैं। इन्हीं टैंकों में नहरी पानी का भंडारण कर पूरे शहर में आपूर्ति की जाती है। बढ़ती आबादी के सामने यह व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही है। राजीव यादव ने बताया कि एक और बड़ा वाटर टैंक बन जाए तो पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता होने से नहर बंद रहने के दिनों में भी नियमित आपूर्ति संभव हो सकेगी। फिलहाल ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से जमीन खरीदने के प्रयास जारी हैं।
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वर्जन:
लोगों को पानी व्यर्थ नहीं बर्बाद करना चाहिए। पहले एक मार्च को नहर में पानी छोड़ा जाना था लेकिन अब तीन मार्च को पानी छोड़े जाने की संभावना है। -हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी