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Rewari News: बिना वजह ट्रेनों की चेन खींचने के मामले बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:38 PM IST
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रेवाड़ी रेलवे स्टेशन। संवाद
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रेवाड़ी। मेडिकल, आग लगने या अन्य आपातकालीन स्थिति में चेनपुलिंग कर ट्रेन रोकी जा सकती है लेकिन अपनी सुविधा के अनुसार चेन खींचकर ट्रेन रोकने की घटनाएं बढ़ रही हैं। चेनपुलिंग करने के मामले में पकड़े गए आरोपी अपना अपराध स्वीकार कर लेते हैं और अदालत की ओर से लगाए गए जुर्माने की राशि भर कर छूट जाते हैं।
हाल ही में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से दर्ज मामलों में कई आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जुर्माना लगाकर छोड़ा गया।
अधिकांश मामलों में आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की और अदालत ने रेलवे एक्ट 1989 की धारा 141 के तहत कार्रवाई करते हुए 500-1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में साधारण कारावास का भी प्रावधान है। दरअसल, कई यात्री निजी कारणों से या स्टेशन से थोड़ी दूरी पर उतरने के लिए चेन खींच देते हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
इमरजेंसी चेन केवल आपात स्थिति में ही उपयोग के लिए होती है। बिना कारण चेन खींचने से ट्रेन की समय-सारणी प्रभावित होती है, अन्य ट्रेनों की आवाजाही बाधित होती है और कभी-कभी तकनीकी जांच के कारण लंबा विलंब भी हो जाता है।
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केस नंबर 1:
24 सितंबर 2025 को अलीपुर निवासी निखिल ने बिना किसी उचित कारण के चेन खींचकर ट्रेन रोक दी। अदालत में निखिल अपना अपराध स्वीकार कर लिया और मुकदमे की सुनवाई की मांग नहीं की। सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 500 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। निखिल ने मौके पर ही जुर्माना जमा कर दिया।
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केस नंबर 2:
24 फरवरी 2026 को रेवाड़ी क्षेत्र में बरौली निवासी सचिन ने बिना किसी उचित कारण के चेन खींचकर ट्रेन नंबर 12915 रोक दी। आरोपी पर रेलवे एक्ट 1989 की धारा 141 के तहत आरोप तय किए गए। सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 500 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। सचिन ने जुर्माना भर दिया। उसे रिहा कर दिया गया।
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केस नंबर 3
16 दिसंबर 2025 को बिना किसी उचित कारण के ताजिपुर निवासी इंदर सिंह ने चेन खींच कर ट्रेन संख्या 14030 रोक दी। मामले में अदालत में आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया और ट्रायल की मांग नहीं की। अदालत ने 500 रुपये का जुर्माना लगाया जिसे आरोपी ने जमाकर दिया। अदालत ने रिहा कर दिया।
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हाल ही में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से दर्ज मामलों में कई आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जुर्माना लगाकर छोड़ा गया।
अधिकांश मामलों में आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की और अदालत ने रेलवे एक्ट 1989 की धारा 141 के तहत कार्रवाई करते हुए 500-1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया।
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जुर्माना अदा न करने की स्थिति में साधारण कारावास का भी प्रावधान है। दरअसल, कई यात्री निजी कारणों से या स्टेशन से थोड़ी दूरी पर उतरने के लिए चेन खींच देते हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
इमरजेंसी चेन केवल आपात स्थिति में ही उपयोग के लिए होती है। बिना कारण चेन खींचने से ट्रेन की समय-सारणी प्रभावित होती है, अन्य ट्रेनों की आवाजाही बाधित होती है और कभी-कभी तकनीकी जांच के कारण लंबा विलंब भी हो जाता है।
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केस नंबर 1:
24 सितंबर 2025 को अलीपुर निवासी निखिल ने बिना किसी उचित कारण के चेन खींचकर ट्रेन रोक दी। अदालत में निखिल अपना अपराध स्वीकार कर लिया और मुकदमे की सुनवाई की मांग नहीं की। सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 500 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। निखिल ने मौके पर ही जुर्माना जमा कर दिया।
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केस नंबर 2:
24 फरवरी 2026 को रेवाड़ी क्षेत्र में बरौली निवासी सचिन ने बिना किसी उचित कारण के चेन खींचकर ट्रेन नंबर 12915 रोक दी। आरोपी पर रेलवे एक्ट 1989 की धारा 141 के तहत आरोप तय किए गए। सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को 500 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। सचिन ने जुर्माना भर दिया। उसे रिहा कर दिया गया।
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केस नंबर 3
16 दिसंबर 2025 को बिना किसी उचित कारण के ताजिपुर निवासी इंदर सिंह ने चेन खींच कर ट्रेन संख्या 14030 रोक दी। मामले में अदालत में आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया और ट्रायल की मांग नहीं की। अदालत ने 500 रुपये का जुर्माना लगाया जिसे आरोपी ने जमाकर दिया। अदालत ने रिहा कर दिया।