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Rewari News: धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
Fri, 31 Jul 2026 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:02 AM IST
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रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने एशियन डेवलपर्स से जुड़े धोखाधड़ी मामले में आरोपी दिल्ली के शाहदरा निवासी नितिन कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मामला कसौला थाना क्षेत्र में दर्ज वर्ष 2018 की एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता देवेंद्र कुमार ने आरोप लगाया था कि एशियन डेवलपर्स लिमिटेड की ओर से फ्लैट देने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन निर्धारित समय में न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही राशि वापस की गई।
शिकायत में कंपनी पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। आरोपी नितिन कुमार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।
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बचाव पक्ष ने कहा कि अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और निवेशकों के साथ समझौता भी हो चुका है। वहीं, पुलिस की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया।
पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज है और उससे कथित धोखाधड़ी की राशि बरामद की जानी है। इसके अलावा दस्तावेज से मिलान के लिए आरोपी के हस्ताक्षर के नमूने भी आवश्यक हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहा था।
29 जुलाई को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जांच में आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो सकती है। अदालत ने सह आरोपी से समानता के आधार पर राहत देने से भी इनकार करते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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मामला कसौला थाना क्षेत्र में दर्ज वर्ष 2018 की एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता देवेंद्र कुमार ने आरोप लगाया था कि एशियन डेवलपर्स लिमिटेड की ओर से फ्लैट देने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन निर्धारित समय में न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही राशि वापस की गई।
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शिकायत में कंपनी पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। आरोपी नितिन कुमार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।
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बचाव पक्ष ने कहा कि अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और निवेशकों के साथ समझौता भी हो चुका है। वहीं, पुलिस की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया।
पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी का नाम एफआईआर में दर्ज है और उससे कथित धोखाधड़ी की राशि बरामद की जानी है। इसके अलावा दस्तावेज से मिलान के लिए आरोपी के हस्ताक्षर के नमूने भी आवश्यक हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहा था।
29 जुलाई को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जांच में आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो सकती है। अदालत ने सह आरोपी से समानता के आधार पर राहत देने से भी इनकार करते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।