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Rewari News: श्रावण के पहले दिन शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, जलाभिषेक कर मांगी सुख-समृद्धि
Fri, 31 Jul 2026 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:05 AM IST
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सोलहराही मंदिर में भोलेनाथ की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
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रेवाड़ी। श्रावण मास के पहले दिन शहर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देवाधिदेव का जलाभिषेक किया। दर्शन पूजन का सिलसिला सुबह से देर शाम तक चलता रहा। सुबह से ही मंदिरों में हर-हर महादेव का जयघोष गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के घंटेश्वर महादेव मंदिर, अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर, बारा पत्थर भूतेश्वर महादेव मंदिर और सोलहराही भूतेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने दूध, जल और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया।
ज्योतिषाचार्य दलीप शास्त्री ने श्रावण माह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शिवपुराण में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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उन्होंने बताया कि जल से अभिषेक करने पर वर्षा की कृपा होती है, जबकि कुश के जल से अभिषेक करने पर रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है। दही से अभिषेक करने पर सुख-सुविधाओं की प्राप्ति, गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की कृपा और तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
उन्होंने बताया कि दूध से अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ति, गंगाजल से अभिषेक करने से कष्टों का निवारण और घी से अभिषेक करने से वंश वृद्धि की मान्यता है। शहद से अभिषेक करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
श्रावण के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का पूजन किया और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना की।
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शहर के घंटेश्वर महादेव मंदिर, अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर, बारा पत्थर भूतेश्वर महादेव मंदिर और सोलहराही भूतेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने दूध, जल और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया।
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ज्योतिषाचार्य दलीप शास्त्री ने श्रावण माह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शिवपुराण में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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उन्होंने बताया कि जल से अभिषेक करने पर वर्षा की कृपा होती है, जबकि कुश के जल से अभिषेक करने पर रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है। दही से अभिषेक करने पर सुख-सुविधाओं की प्राप्ति, गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की कृपा और तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
उन्होंने बताया कि दूध से अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ति, गंगाजल से अभिषेक करने से कष्टों का निवारण और घी से अभिषेक करने से वंश वृद्धि की मान्यता है। शहद से अभिषेक करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
श्रावण के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का पूजन किया और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना की।