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Rewari News: जिस एरिया में अधिक टीबी संदिग्ध मरीज मिलेंगे, वहां भेजी जाएगी मोबाइल एक्स-रे वैन

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 11:08 PM IST
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Mobile X-ray vans will be sent to areas where more TB suspected patients are found.
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रेवाड़ी। जिले को क्षय रोग (टीबी) से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब डोर-टू-डोर विशेष कैंपेन शुरू किया है। शहर से लेकर गांवों तक टीबी के संभावित मरीजों की तलाश करने के लिए आशा वर्कर घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।
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इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन मरीजों की पहचान करना है जो बीमारी के लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं या किसी कारणवश अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आशा वर्करों को डेटा जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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डेटा उपलब्ध होने पर जिस भी एरिया में ज्यादा संदिग्ध लक्षण वाले मरीज मिलेंगे, उन इलाकों में मोबाइल वैन को भेजा जाएगा जिसका शेड्यूल सर्वे होने पर बनेगा। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि विभाग केवल सर्वे तक ही सीमित नहीं रहेगा।
स्क्रीनिंग के दौरान जिन क्षेत्रों या शहर के मोहल्लों में टीबी के संदिग्ध मरीजों की संख्या अधिक पाई जाएगी वहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष मोबाइल एक्स-रे वैन भेजी जाएगी।
यह वैन एक चलती-फिरती लैब की तरह काम करेगी जिसमें मरीजों का मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे किया जाएगा। इससे मरीजों को अस्पताल के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी और रिपोर्ट के आधार पर तुरंत उपचार प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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जागरूकता और समय पर इलाज है बचाव

जिला क्षय रोग समन्वयक सीमा अंसारी का कहना है कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है लेकिन समय पर इसकी पहचान होना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है, रात में पसीना आता है या भूख कम लगती है तो उसे तुरंत अपनी जांच करानी चाहिए। सरकार द्वारा टीबी के मरीजों को न केवल मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं बल्कि पोषण के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
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2770 मरीजों का पहले से चल रहा इलाज

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रेवाड़ी में वर्तमान में टीबी के कुल 2770 एक्टिव मरीज हैं जिनका विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से नियमित इलाज चल रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि इन मरीजों के पूर्ण उपचार के साथ-साथ अन्य मरीजों को भी जल्द से जल्द ढूंढा जाए ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। कैंपेन के दौरान आशा वर्कर हर घर में जाकर लोगों से से खांसी, बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षणों के बारे में पूछताछ कर रही हैं।
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