{"_id":"6a78c4d46153ad2491080262","slug":"poetry-collection-maa-ek-paheli-launched-rewari-news-c-198-1-rew1001-243357-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: मां एक पहेली काव्य संग्रह का किया लोकार्पण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: मां एक पहेली काव्य संग्रह का किया लोकार्पण
Sun, 09 Aug 2026 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:50 PM IST
विज्ञापन
मां एक पहेली काव्य-कृति का लोकार्पण का दृश्य। स्रोत : संस्था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। राष्ट्रीय कवि संगम की ओर से रविवार को जिला मुख्यालय में पुस्तक लोकार्पण एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकार दर्शना शर्मा की मां एक पहेली काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया।
मुख्य अतिथि साहित्यकार व मनुमुक्त मानव स्मृति न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. रामनिवास ने कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की सबसे बड़ी संवेदना है। मां के ममत्व, त्याग और समर्पण को शब्दों में बांधना कठिन है। ऐसी कृतियां मातृशक्ति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
साहित्यकार प्रो. रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ उसकी संवेदनाओं का संवाहक भी है। मुख्य वक्ता सीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सीहा के प्राचार्य सत्यवीर नाहड़िया ने मां को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों की आधारशिला बताया।
विज्ञापन
स्वागत अध्यक्ष सुषमा गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष डॉ. मुकुट अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि संस्था साहित्य के माध्यम से संस्कार और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
काव्य-गोष्ठी में अरुण गुप्ता, डॉ. सुधा यादव, डॉ. कविता गुप्ता, रेखा कौशिक, यतिन चारण, दलबीर फूल, गोपाल वशिष्ठ, शिखा सिंघल, तेजभान कुकरेजा सहित अनेक कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने मां के ममत्व, वात्सल्य, त्याग और संघर्ष को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि साहित्यकार व मनुमुक्त मानव स्मृति न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. रामनिवास ने कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की सबसे बड़ी संवेदना है। मां के ममत्व, त्याग और समर्पण को शब्दों में बांधना कठिन है। ऐसी कृतियां मातृशक्ति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
विज्ञापन
साहित्यकार प्रो. रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ उसकी संवेदनाओं का संवाहक भी है। मुख्य वक्ता सीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सीहा के प्राचार्य सत्यवीर नाहड़िया ने मां को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों की आधारशिला बताया।
विज्ञापन
स्वागत अध्यक्ष सुषमा गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष डॉ. मुकुट अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि संस्था साहित्य के माध्यम से संस्कार और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
काव्य-गोष्ठी में अरुण गुप्ता, डॉ. सुधा यादव, डॉ. कविता गुप्ता, रेखा कौशिक, यतिन चारण, दलबीर फूल, गोपाल वशिष्ठ, शिखा सिंघल, तेजभान कुकरेजा सहित अनेक कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने मां के ममत्व, वात्सल्य, त्याग और संघर्ष को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।