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Rewari News: मसानी बैराज से जल निकासी के लिए 28.66 करोड़ के टेंडर जारी, पाइपलाइनें बिछेंगी
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राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।
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रेवाड़ी।
मसानी बैराज से जल निकासी व पुनर्भरण के लिए पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लेकर 28.66 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। मसानी बैराज के पानी से लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव खलियावास में दो साल से पानी भरा हुआ जो लोगो के जी का जंजाल बना हुआ है।
पहले टेंडर के तहत करीब 8.41 करोड़ रुपये की लागत से साहबी नदी से इंदौरी नदी क्रॉसिंग तक आरसीसी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह पाइपलाइन लुहारी डिस्ट्री क्षेत्र में डाली जाएगी जिसके माध्यम से मसानी बैराज से उठाए गए पानी को 1800 एमएम डायमीटर की ग्रेविटी आरसीसी एनपी-3 पाइपलाइन के जरिए आगे पहुंचाया जाएगा।
इस परियोजना में अन्य सिविल कार्य भी शामिल हैं। सिवाड़ी गांव से औरंगपुर लिंक ड्रेन तक आरसीसी पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना के जरिए मसानी बैराज में एकत्रित और ट्रीटेड पानी को झज्जर जिले के आउटफॉल ड्रेन नंबर-8 में डाला जाएगा। इस पर 8.43 करोड़ खर्च होंगे। लगभग 40 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछेगी।
इसके अलावा लगभग 8.27 करोड़ रुपये की लागत से 1200 एमएम डायमीटर की प्रेसराइज्ड राइजिंग मेन पाइपलाइन मसानी बैराज से साहबी नदी तक बिछाई जाएगी। यह पाइपलाइन गांव मोजाबाद के पास तक पानी पहुंचाने का काम करेगी जिससे जल निकासी की व्यवस्था और अधिक सुचारु हो सकेगी।
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900 एमएम डायमीटर की पाइपलाइन 3.55 करोड़ से बिछेगी
इसी क्रम में एक अन्य टेंडर के तहत एस्केप चैनल से साहबी नदी तक 900 एमएम डायमीटर की पाइपलाइन बिछाने की योजना है जिसकी अनुमानित लागत करीब 3.55 करोड़ रुपये है। इससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से नदी में पहुंचाया जाएगा। सभी टेंडरों की अंतिम तिथि 22 अप्रैल निर्धारित की गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र में जलभराव की समस्या में कमी आएगी।
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दूषित पानी का प्रकरण केंद्र सरकार तक पहुंचा
मसानी बैराज के दूषित पानी का प्रकरण केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। पिछले विधानसभा की एक कमेटी ने मसानी बैराज का दौरा किया था जिसमें पानी की गंभीर स्थिति को देखकर अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। पूरे प्रोजेक्ट पर 288 करोड़ खर्च होंगे।
सीवर और औद्योगिक प्रदूषण पर बढ़ी सख्ती
साहबी बैराज व नदी में लगातार छोड़े जा रहे सीवर और औद्योगिक प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भी प्रतिवादी बना लिया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के शामिल होने से अब इस मामले की निगरानी केंद्रीय स्तर पर भी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
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कार्य पूरा होने पर ये फायदे होंगे
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिन इलाकों में हर साल पानी भर जाता है, वहां से पानी जल्दी निकलेगा। खेतों में पानी खड़ा रहने से फसल खराब होती है। पाइपलाइन सिस्टम बनने से अतिरिक्त पानी हटेगा और किसान नुकसान से बचेंगे। मसानी बैराज का ट्रीटेड पानी बेकार नहीं जाएगा। बाढ़ जैसे हालात बनने की संभावना कम होगी।
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बॉक्स
गांव में पिछले 2 साल से पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं हो पाई है। गंदे पानी के जमाव से काफी समस्या हो रही है। किसान काफी परेशान हैं। जल्द से जल्द निकासी का कार्य शुरू करवाया जाएगा।
राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।
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मसानी बैराज के पानी की वजह से गांव की स्थिति बदहाल हो चुकी है। इसके समाधान को लेकर अभी तक तो आश्वासन ही मिले हैं। मच्छर और बदबू से हम परेशान हैं। लोग बीमार हो रहे हैं।
धीरज यादव, पंचायत समिति सदस्य, खलियावास
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वर्जन
ये समस्या कई सालों से चली आ रही है। इसे लेकर हमारी तरफ से मसानी बैराज के प्रदूषित पानी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर हस्ताक्षर अभियान चला जा रहा है। बैराज को वेटलैंड घोषित करने और समाधान की मांग है। सभी ने अभियान को तेज करने का समर्थन दिया है। अगला अभियान 12 अप्रैल को खरखड़ा और डूंगरवास में होगा।
कमल सिंह यादव, संयोजक, राष्ट्रीय प्रकृति पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन संस्था
मसानी बैराज से जुड़े प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर जारी किए जा चुके हैं। पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू होगा।
दीपक कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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मसानी बैराज से जल निकासी व पुनर्भरण के लिए पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लेकर 28.66 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। मसानी बैराज के पानी से लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव खलियावास में दो साल से पानी भरा हुआ जो लोगो के जी का जंजाल बना हुआ है।
पहले टेंडर के तहत करीब 8.41 करोड़ रुपये की लागत से साहबी नदी से इंदौरी नदी क्रॉसिंग तक आरसीसी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह पाइपलाइन लुहारी डिस्ट्री क्षेत्र में डाली जाएगी जिसके माध्यम से मसानी बैराज से उठाए गए पानी को 1800 एमएम डायमीटर की ग्रेविटी आरसीसी एनपी-3 पाइपलाइन के जरिए आगे पहुंचाया जाएगा।
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इस परियोजना में अन्य सिविल कार्य भी शामिल हैं। सिवाड़ी गांव से औरंगपुर लिंक ड्रेन तक आरसीसी पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना के जरिए मसानी बैराज में एकत्रित और ट्रीटेड पानी को झज्जर जिले के आउटफॉल ड्रेन नंबर-8 में डाला जाएगा। इस पर 8.43 करोड़ खर्च होंगे। लगभग 40 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछेगी।
इसके अलावा लगभग 8.27 करोड़ रुपये की लागत से 1200 एमएम डायमीटर की प्रेसराइज्ड राइजिंग मेन पाइपलाइन मसानी बैराज से साहबी नदी तक बिछाई जाएगी। यह पाइपलाइन गांव मोजाबाद के पास तक पानी पहुंचाने का काम करेगी जिससे जल निकासी की व्यवस्था और अधिक सुचारु हो सकेगी।
900 एमएम डायमीटर की पाइपलाइन 3.55 करोड़ से बिछेगी
इसी क्रम में एक अन्य टेंडर के तहत एस्केप चैनल से साहबी नदी तक 900 एमएम डायमीटर की पाइपलाइन बिछाने की योजना है जिसकी अनुमानित लागत करीब 3.55 करोड़ रुपये है। इससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से नदी में पहुंचाया जाएगा। सभी टेंडरों की अंतिम तिथि 22 अप्रैल निर्धारित की गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र में जलभराव की समस्या में कमी आएगी।
दूषित पानी का प्रकरण केंद्र सरकार तक पहुंचा
मसानी बैराज के दूषित पानी का प्रकरण केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। पिछले विधानसभा की एक कमेटी ने मसानी बैराज का दौरा किया था जिसमें पानी की गंभीर स्थिति को देखकर अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। पूरे प्रोजेक्ट पर 288 करोड़ खर्च होंगे।
सीवर और औद्योगिक प्रदूषण पर बढ़ी सख्ती
साहबी बैराज व नदी में लगातार छोड़े जा रहे सीवर और औद्योगिक प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भी प्रतिवादी बना लिया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के शामिल होने से अब इस मामले की निगरानी केंद्रीय स्तर पर भी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
कार्य पूरा होने पर ये फायदे होंगे
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिन इलाकों में हर साल पानी भर जाता है, वहां से पानी जल्दी निकलेगा। खेतों में पानी खड़ा रहने से फसल खराब होती है। पाइपलाइन सिस्टम बनने से अतिरिक्त पानी हटेगा और किसान नुकसान से बचेंगे। मसानी बैराज का ट्रीटेड पानी बेकार नहीं जाएगा। बाढ़ जैसे हालात बनने की संभावना कम होगी।
बॉक्स
गांव में पिछले 2 साल से पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं हो पाई है। गंदे पानी के जमाव से काफी समस्या हो रही है। किसान काफी परेशान हैं। जल्द से जल्द निकासी का कार्य शुरू करवाया जाएगा।
राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।
मसानी बैराज के पानी की वजह से गांव की स्थिति बदहाल हो चुकी है। इसके समाधान को लेकर अभी तक तो आश्वासन ही मिले हैं। मच्छर और बदबू से हम परेशान हैं। लोग बीमार हो रहे हैं।
धीरज यादव, पंचायत समिति सदस्य, खलियावास
वर्जन
ये समस्या कई सालों से चली आ रही है। इसे लेकर हमारी तरफ से मसानी बैराज के प्रदूषित पानी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर हस्ताक्षर अभियान चला जा रहा है। बैराज को वेटलैंड घोषित करने और समाधान की मांग है। सभी ने अभियान को तेज करने का समर्थन दिया है। अगला अभियान 12 अप्रैल को खरखड़ा और डूंगरवास में होगा।
कमल सिंह यादव, संयोजक, राष्ट्रीय प्रकृति पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन संस्था
मसानी बैराज से जुड़े प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर जारी किए जा चुके हैं। पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू होगा।
दीपक कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग

राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।

राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।

राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।

राजकुमार, सरपंच, गांव खलियावास।