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भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया : डॉ. कविता
Fri, 31 Jul 2026 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:03 AM IST
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स्कूल में पौधरोपण करते अखिल भारतीय साहित्य परिषद के पदाधिकारी। स्रोत : संस्था
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रेवाड़ी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में गुरु पूर्णिमा पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु की महिमा, भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अध्यक्ष श्रुति शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार तेजभान कुकरेजा सहित अन्य गणमान्य लोग और विद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. कविता ने गुरु की महत्ता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को गुरु के प्रति सम्मान और जीवन में शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
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कार्यक्रम में साहित्य परिषद के सदस्यों और विद्यालय के शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने गुरु-शिष्य परंपरा को समाज की मजबूत नींव बताते हुए इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अध्यक्ष श्रुति शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार तेजभान कुकरेजा सहित अन्य गणमान्य लोग और विद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. कविता ने गुरु की महत्ता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
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उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को गुरु के प्रति सम्मान और जीवन में शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
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कार्यक्रम में साहित्य परिषद के सदस्यों और विद्यालय के शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने गुरु-शिष्य परंपरा को समाज की मजबूत नींव बताते हुए इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।