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Rohtak News: पलटन का नेतृत्व कर रहे अजय का पैर लैंड माइन पर पड़ने से हुआ धमाका, बचे जवान
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अजय मलिक को मिला पदक
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अजमेर गोयत
महम(रोहतक)। पश्चिम बंगाल के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में लैंड माइन धमाके में मौखरा के बेटे सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक को अपना टखने तक का पांव गंवाना पड़ सकता है। धमाके में अपने साथी जवानों को बचाने वाले इस जवान का पांव बचाना डॉक्टरों ने नामुमकिन बताया है।
शरारती स्वभाव के अजय को शुरू से ही आगे रहने का शौक रहा है। इसी शौक ने देश का गौरव कहलाने लायक बनाया। यह कहना है अजय के पिता डाक विभाग के सेवानिवृत्त सुपरवाइजर आजाद मलिक का। हादसे के बाद हुई बातचीत में उन्होंने अपने बहादुर बेटे की यादें साझा की।
उन्होंने कहा कि अजय बचपन से अग्रणी रहने के लिए शरारत करता था। इस कारण उसने हर साल स्कूल बदलना पड़ता था। पहली कक्षा से दसवीं तक उसने हर साल अलग स्कूल में पढ़ाई की। इस प्रकार दस स्कूल बदलने पड़े। शुरू में रोहतक के एक निजी स्कूल से पढ़ाई की। बाद में पिता का तबादला होने पर हिसार गए। दसवीं व बारहवीं नित्यानंद स्कूल से की।
स्नातक जाट कॉलेज से करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। दिल्ली से एलएलबी की पढ़ाई के साथ कंबाइन टैस्ट क्रेक कर मई 2010 में सीआरपीएफ में बतौर कमांडेंट गुरुग्राम में कार्यभार संभाला। अजय का जन्म 12 दिसंबर 1988 को पीजीआई में हुआ था। मां फूलवती का कहना है कि बेटे की बहादुरी पर नाज है। संवाद
गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टुकड़ी का किया नेतृत्व
पिछले साल एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रवेश समेत तीन माओवादियों को ढेर किया गया। इस बहादुरी पर राष्ट्रपति द्रौपदी र्मुमू से पुलिस पदक सम्मान मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनको रक्षार्थ मेडल प्रदान किया। जम्मू में आतंकियों साथ हुई मुठभेड़ में अजय सबसे आगे थे। हाथ में चोट लगने के बावजूद इन्होंने लड़ाई जारी रखी। सेना की गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। उस समय अजय ने सबसे आगे कूद कर जवानों की जान बचाई। इसके लिए उन्हें लाइफ सेविंग पदक से नवाजा गया।
करमू खेड़ी शामली यूपी की रहने वाली पूजा से हुई शादी
अजय मलिक की शादी 2015 में यूपी के शामली के पास स्थित गांव करमू खेड़ी की रहने वाली पूजा से हुई। पूजा भी सीआरपीएफ में बतौर कमांडेंट अपनी सेवाएं दे रही हैं। वह अजय मिलक से एक बैच जूनियर हैं। अजय मलिक की तीन संतान हैं। इसमें सबसे बड़ी बेटी अदा पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। इससे छोटी आराध्या तीसरी कक्षा व छोटा बेटा अरमान केजी कक्षा में पढ़ता है। यह परिवार अब शहर की रामगोपाल कालोनी में रहता है।
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शरारती स्वभाव के अजय को शुरू से ही आगे रहने का शौक रहा है। इसी शौक ने देश का गौरव कहलाने लायक बनाया। यह कहना है अजय के पिता डाक विभाग के सेवानिवृत्त सुपरवाइजर आजाद मलिक का। हादसे के बाद हुई बातचीत में उन्होंने अपने बहादुर बेटे की यादें साझा की।
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उन्होंने कहा कि अजय बचपन से अग्रणी रहने के लिए शरारत करता था। इस कारण उसने हर साल स्कूल बदलना पड़ता था। पहली कक्षा से दसवीं तक उसने हर साल अलग स्कूल में पढ़ाई की। इस प्रकार दस स्कूल बदलने पड़े। शुरू में रोहतक के एक निजी स्कूल से पढ़ाई की। बाद में पिता का तबादला होने पर हिसार गए। दसवीं व बारहवीं नित्यानंद स्कूल से की।
स्नातक जाट कॉलेज से करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। दिल्ली से एलएलबी की पढ़ाई के साथ कंबाइन टैस्ट क्रेक कर मई 2010 में सीआरपीएफ में बतौर कमांडेंट गुरुग्राम में कार्यभार संभाला। अजय का जन्म 12 दिसंबर 1988 को पीजीआई में हुआ था। मां फूलवती का कहना है कि बेटे की बहादुरी पर नाज है। संवाद
गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टुकड़ी का किया नेतृत्व
पिछले साल एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रवेश समेत तीन माओवादियों को ढेर किया गया। इस बहादुरी पर राष्ट्रपति द्रौपदी र्मुमू से पुलिस पदक सम्मान मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनको रक्षार्थ मेडल प्रदान किया। जम्मू में आतंकियों साथ हुई मुठभेड़ में अजय सबसे आगे थे। हाथ में चोट लगने के बावजूद इन्होंने लड़ाई जारी रखी। सेना की गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। उस समय अजय ने सबसे आगे कूद कर जवानों की जान बचाई। इसके लिए उन्हें लाइफ सेविंग पदक से नवाजा गया।
करमू खेड़ी शामली यूपी की रहने वाली पूजा से हुई शादी
अजय मलिक की शादी 2015 में यूपी के शामली के पास स्थित गांव करमू खेड़ी की रहने वाली पूजा से हुई। पूजा भी सीआरपीएफ में बतौर कमांडेंट अपनी सेवाएं दे रही हैं। वह अजय मिलक से एक बैच जूनियर हैं। अजय मलिक की तीन संतान हैं। इसमें सबसे बड़ी बेटी अदा पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। इससे छोटी आराध्या तीसरी कक्षा व छोटा बेटा अरमान केजी कक्षा में पढ़ता है। यह परिवार अब शहर की रामगोपाल कालोनी में रहता है।

अजय मलिक को मिला पदक