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Rohtak News: मौसम ने बिगाड़ी सेहत, पीजीआई में बढ़े आठ प्रतिशत मरीज
Wed, 22 Jul 2026 07:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 22 Jul 2026 07:44 AM IST
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08 प्रो. डॉ. दीपक जैन, मेडिसिन विभाग, पीजीआई
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रोहतक। बरसात के मौसम में तापमान में बदलाव के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस वजह से पीजीआई की ओपीडी में सर्दी, जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या आठ फीसदी तक बढ़ गई है। पीजीआई के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर दीपक जैन ने बताया कि मानसून में हर साल करीब 20 फीसदी मरीज बढ़ते हैं।
सामान्य दिनों में पीजीआई की ओपीडी में लगभग 1000 मरीज आते हैं। वायरल समस्याएं इस मौसम में अधिक परेशान करती हैं। प्रोफेसर दीपक जैन के अनुसार लापरवाही बरतने पर छोटी स्वास्थ्य समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
मौसम में नमी और तापमान में बदलाव से वातावरण में बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनपते हैं। इससे गले में खराश, तेज दर्द, सूखी खांसी और बहती नाक जैसी समस्याएं आती हैं।
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शुरुआत में हल्का बुखार और शरीर में ऐंठन महसूस हो सकती है। बदलता मौसम अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए संवेदनशील होता है। हवा में मौजूद नमी व परागकणों के कारण एलर्जी की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं।
मरीजों को सांस लेने में तकलीफ व सीने में जकड़न का सामना करना पड़ सकता है। पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां जैसे डायरिया और उल्टी भी इस मौसम में बढ़ने लगती हैं।
संक्रमण के कारण और बचाव
दूषित जल और खान-पान में लापरवाही डायरिया (दस्त) व उल्टी का प्रमुख कारण है। बासी भोजन का सेवन करने से संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। पीने के लिए हमेशा उबले या पूरी तरह स्वच्छ पानी का ही उपयोग करें। बासी और बाहर के खुले भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। धूप या पसीने में रहने के बाद ठंडा पानी न पिएं और सीधे एसी, कूलर में न बैठें।
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी बीमारी
भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का प्रयोग करना आवश्यक है। लक्षण दिखने पर खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक न लें। तत्काल चिकित्सक की सलाह लेना महत्वपूर्ण है। छोटी सी लापरवाही बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है। स्वच्छता और सावधानी बरतकर बीमारियों से बचा जा सकता है।
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सामान्य दिनों में पीजीआई की ओपीडी में लगभग 1000 मरीज आते हैं। वायरल समस्याएं इस मौसम में अधिक परेशान करती हैं। प्रोफेसर दीपक जैन के अनुसार लापरवाही बरतने पर छोटी स्वास्थ्य समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
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मौसम में नमी और तापमान में बदलाव से वातावरण में बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनपते हैं। इससे गले में खराश, तेज दर्द, सूखी खांसी और बहती नाक जैसी समस्याएं आती हैं।
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शुरुआत में हल्का बुखार और शरीर में ऐंठन महसूस हो सकती है। बदलता मौसम अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए संवेदनशील होता है। हवा में मौजूद नमी व परागकणों के कारण एलर्जी की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं।
मरीजों को सांस लेने में तकलीफ व सीने में जकड़न का सामना करना पड़ सकता है। पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां जैसे डायरिया और उल्टी भी इस मौसम में बढ़ने लगती हैं।
संक्रमण के कारण और बचाव
दूषित जल और खान-पान में लापरवाही डायरिया (दस्त) व उल्टी का प्रमुख कारण है। बासी भोजन का सेवन करने से संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। पीने के लिए हमेशा उबले या पूरी तरह स्वच्छ पानी का ही उपयोग करें। बासी और बाहर के खुले भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। धूप या पसीने में रहने के बाद ठंडा पानी न पिएं और सीधे एसी, कूलर में न बैठें।
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी बीमारी
भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का प्रयोग करना आवश्यक है। लक्षण दिखने पर खुद से कोई भी दवा या एंटीबायोटिक न लें। तत्काल चिकित्सक की सलाह लेना महत्वपूर्ण है। छोटी सी लापरवाही बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है। स्वच्छता और सावधानी बरतकर बीमारियों से बचा जा सकता है।