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Sirsa News: आस्था पर भारी पड़ी प्रशासनिक सुस्ती...दिल्ली-पंजाब के जत्थे रवाना, डबवाली की संगत को पाक बॉर्डर पर रोका, आज बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 12 Jun 2026 10:38 PM IST
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डबवाली। पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन की हसरत दिल में संजोए डबवाली क्षेत्र के 37 सिख श्रद्धालुओं को अटारी-वाघा बॉर्डर से बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से आवश्यक अनुमति की समय पर व्यवस्था न होने के कारण इन श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की इजाजत नहीं मिली। गर्मी में घंटों इंतजार करने के बाद मायूस लौटी संगत ने अब इस मुद्दे पर रोष जताते हुए शनिवार सुबह 11 बजे गुरुद्वारा गुर-अस्थान कलगीधर सिंह सभा में बैठक बुलाई है।
ज्ञानी ज्ञान सिंह ने बताया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रदेश के कुल 94 श्रद्धालुओं के वीजा लगवाकर उन्हें पाकिस्तान भेजा गया था जिनमें डबवाली के 37 श्रद्धालु शामिल थे। यह जत्था 9 जून को रवाना हुआ था। 10 जून को जब श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों ने यह कहकर उन्हें रोक दिया कि हरियाणा कमेटी की ओर से जो जरूरी प्रशासनिक अनुमति आनी चाहिए थी वह अभी तक नहीं पहुंची है। हैरानी की बात यह रही कि इसी दौरान दिल्ली और पंजाब से आई संगत को सीमा पार जाने की अनुमति मिल गई लेकिन हरियाणा के श्रद्धालुओं को घंटों तपती गर्मी में खड़ा रहना पड़ा।
आश्वासन मिलता रहा, रात को सुनाया फरमान
सीमा पर रोके जाने के बाद यात्रियों ने तुरंत हरियाणा कमेटी के पदाधिकारियों से संपर्क साधा। वहां से बार-बार आश्वासन दिया गया कि अनुमति पत्र जल्द ही भेजा जा रहा है। इसके बावजूद देर शाम तक स्थिति साफ नहीं हुई और आखिरकार रात करीब साढ़े आठ बजे अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को वापस लौटने का फरमान सुना दिया।
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धार्मिक भावनाओं को पहुंची ठेस
ज्ञानी ज्ञान सिंह ने कमेटी के इस रवैये पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस बदइंतज़ामी के कारण श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। यह हरियाणा की सिख संगत के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसी लापरवाही के खिलाफ आवाज बुलंद करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए शनिवार को सब्जी मंडी स्थित गुरुद्वारा गुर-अस्थान कलगीधर सिंह सभा में संगत की बैठक बुलाई गई है। उन्होंने क्षेत्र की समस्त संगत से बैठक में पहुंचने की अपील की है।
ज्ञानी ज्ञान सिंह ने बताया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रदेश के कुल 94 श्रद्धालुओं के वीजा लगवाकर उन्हें पाकिस्तान भेजा गया था जिनमें डबवाली के 37 श्रद्धालु शामिल थे। यह जत्था 9 जून को रवाना हुआ था। 10 जून को जब श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों ने यह कहकर उन्हें रोक दिया कि हरियाणा कमेटी की ओर से जो जरूरी प्रशासनिक अनुमति आनी चाहिए थी वह अभी तक नहीं पहुंची है। हैरानी की बात यह रही कि इसी दौरान दिल्ली और पंजाब से आई संगत को सीमा पार जाने की अनुमति मिल गई लेकिन हरियाणा के श्रद्धालुओं को घंटों तपती गर्मी में खड़ा रहना पड़ा।
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आश्वासन मिलता रहा, रात को सुनाया फरमान
सीमा पर रोके जाने के बाद यात्रियों ने तुरंत हरियाणा कमेटी के पदाधिकारियों से संपर्क साधा। वहां से बार-बार आश्वासन दिया गया कि अनुमति पत्र जल्द ही भेजा जा रहा है। इसके बावजूद देर शाम तक स्थिति साफ नहीं हुई और आखिरकार रात करीब साढ़े आठ बजे अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को वापस लौटने का फरमान सुना दिया।
धार्मिक भावनाओं को पहुंची ठेस
ज्ञानी ज्ञान सिंह ने कमेटी के इस रवैये पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस बदइंतज़ामी के कारण श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। यह हरियाणा की सिख संगत के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसी लापरवाही के खिलाफ आवाज बुलंद करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए शनिवार को सब्जी मंडी स्थित गुरुद्वारा गुर-अस्थान कलगीधर सिंह सभा में संगत की बैठक बुलाई गई है। उन्होंने क्षेत्र की समस्त संगत से बैठक में पहुंचने की अपील की है।