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Sirsa News: रोड़ी में ग्रामसभा का मजाक, 4000 ग्रामीणों की जगह पहुंचे सिर्फ 10
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी। जिले के गांव रोड़ी में शनिवार को ग्रामसभा की बैठक प्रशासनिक तैयारियों और नियोजन की कमी के कारण औपचारिकता बनकर रह गई। नियमानुसार ग्रामसभा में गांव की कुल जनसंख्या के कम से कम 40 प्रतिशत लोगों की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन पंचायत स्तर पर इस मानक को पूरा करने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए।
गांव रोड़ी में लगभग 9000 मतदाता पंजीकृत हैं। इस आधार पर बैठक में करीब 4000 ग्रामीणों की भागीदारी अपेक्षित थी, लेकिन पंचायत भवन में केवल 25 पंचायती कुर्सियां ही उपलब्ध कराई गईं। बैठक के दिन सचिव, सरपंच, सीपीएलओ और चार सफाईकर्मियों सहित कुल 10 लोग ही उपस्थित रहे। निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति न होने के कारण ग्रामसभा को रद्द करना पड़ा।
इस घटना ने ग्रामसभा जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तैयारी और गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। ग्रामसभा का उद्देश्य गांव के विकास कार्यों, योजनाओं की समीक्षा, नए प्रस्तावों पर चर्चा और आमजन से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेना होता है। इसके लिए व्यापक सहभागिता और पूर्व नियोजित व्यवस्थाएं अनिवार्य मानी जाती हैं। सरकार की हिदायतों के अनुसार 17, 18 और 24 जनवरी को ग्रामसभाएं आयोजित की जानी थीं, जिनमें कम से कम 40 प्रतिशत लोगों की उपस्थिति अनिवार्य थी। हालांकि, अधिकांश ग्रामसभाओं में आवश्यक उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी और अधिकांश बैठकों को रद्द करना पड़ा।
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गांव रोड़ी में लगभग 9000 मतदाता पंजीकृत हैं। इस आधार पर बैठक में करीब 4000 ग्रामीणों की भागीदारी अपेक्षित थी, लेकिन पंचायत भवन में केवल 25 पंचायती कुर्सियां ही उपलब्ध कराई गईं। बैठक के दिन सचिव, सरपंच, सीपीएलओ और चार सफाईकर्मियों सहित कुल 10 लोग ही उपस्थित रहे। निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति न होने के कारण ग्रामसभा को रद्द करना पड़ा।
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इस घटना ने ग्रामसभा जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तैयारी और गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। ग्रामसभा का उद्देश्य गांव के विकास कार्यों, योजनाओं की समीक्षा, नए प्रस्तावों पर चर्चा और आमजन से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेना होता है। इसके लिए व्यापक सहभागिता और पूर्व नियोजित व्यवस्थाएं अनिवार्य मानी जाती हैं। सरकार की हिदायतों के अनुसार 17, 18 और 24 जनवरी को ग्रामसभाएं आयोजित की जानी थीं, जिनमें कम से कम 40 प्रतिशत लोगों की उपस्थिति अनिवार्य थी। हालांकि, अधिकांश ग्रामसभाओं में आवश्यक उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी और अधिकांश बैठकों को रद्द करना पड़ा।