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Sirsa News: विनोद कुमारी बढ़ रहीं स्वावलंबन की ओर, औरों को भी दिखा रहीं राह
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:12 PM IST
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महिला विनोद कुमार अपनी मनियारी की दुकान दिखाते हुए। स्वयं
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- घर पर ही परचून की दुकान कर चला रहीं आजीविका
- 5- 6 साल से कर रहीं काम, एक दुकान से बनाई दूसरी दुकान
- सिलाई का काम भी करती हैं, अन्य महिलाओं को सिखाती भी हैं
फोटो- 31, 32
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गृहिणी से आत्मनिर्भर महिला बनने तक का सफर आसान नहीं होता लेकिन विनोद कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिखाया है कि यदि इरादें मजबूत हों तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज विनोद कुमारी न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
करीब 5 से 6 साल पहले तक विनोद कुमारी एक सामान्य गृहिणी थीं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की। घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही व्यस्त रहती थीं। आगे बढ़ने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने कुछ करने का निर्णय लिया। इसी सोच ने उन्हें स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ाया।
विनोद कुमारी ने हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की। ग्रुप से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने मनियारी की दुकान शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये का लोन लिया। घर पर ही छोटी सी मनियारी की दुकान से शुरू किया गया काम धीरे-धीरे चल निकला। ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और दुकान की आय में भी वृद्धि होने लगी।
मनियारी का काम अच्छा चलने लगा तो विनोद कुमारी ने अपने व्यवसाय को और बढ़ाते हुए उसी के साथ परचून की दुकान भी शुरू कर दी। आज वह दोनों दुकानों को खुद संभालती हैं।
कई दिक्कतों का करना पड़ा सामना, अब सब सामान्य
विनोद कुमारी बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गांव के कुछ लोगों ने उनके काम करने पर आपत्ति भी जताई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे लोगों की सोच बदली और अब गांव में उनके काम की सराहना की जा रही है।
सिलाई भी करती हैं महिला
वर्तमान में विनोद कुमारी हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। उनके पति राजवीर फर्नीचर का काम करते हैं। विनोद दोनों दुकान संभालने के साथ ही सिलाई का काम भी करती हैं। उनके साथ बालाजी ग्रुप की 10 महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं।
वर्जन
अगर महिलाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे किसी से कम नहीं हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ना जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय साबित हुआ जिसने नई पहचान दी। छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी सफलता का रूप ले सकता है। जरूरत है तो बस हिम्मत, मेहनत और सही मार्गदर्शन की।
- विनोद कुमारी।
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- 5- 6 साल से कर रहीं काम, एक दुकान से बनाई दूसरी दुकान
- सिलाई का काम भी करती हैं, अन्य महिलाओं को सिखाती भी हैं
फोटो- 31, 32
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गृहिणी से आत्मनिर्भर महिला बनने तक का सफर आसान नहीं होता लेकिन विनोद कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिखाया है कि यदि इरादें मजबूत हों तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज विनोद कुमारी न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
करीब 5 से 6 साल पहले तक विनोद कुमारी एक सामान्य गृहिणी थीं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की। घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही व्यस्त रहती थीं। आगे बढ़ने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने कुछ करने का निर्णय लिया। इसी सोच ने उन्हें स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ाया।
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विनोद कुमारी ने हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की। ग्रुप से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने मनियारी की दुकान शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये का लोन लिया। घर पर ही छोटी सी मनियारी की दुकान से शुरू किया गया काम धीरे-धीरे चल निकला। ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और दुकान की आय में भी वृद्धि होने लगी।
मनियारी का काम अच्छा चलने लगा तो विनोद कुमारी ने अपने व्यवसाय को और बढ़ाते हुए उसी के साथ परचून की दुकान भी शुरू कर दी। आज वह दोनों दुकानों को खुद संभालती हैं।
कई दिक्कतों का करना पड़ा सामना, अब सब सामान्य
विनोद कुमारी बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गांव के कुछ लोगों ने उनके काम करने पर आपत्ति भी जताई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे लोगों की सोच बदली और अब गांव में उनके काम की सराहना की जा रही है।
सिलाई भी करती हैं महिला
वर्तमान में विनोद कुमारी हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। उनके पति राजवीर फर्नीचर का काम करते हैं। विनोद दोनों दुकान संभालने के साथ ही सिलाई का काम भी करती हैं। उनके साथ बालाजी ग्रुप की 10 महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं।
वर्जन
अगर महिलाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे किसी से कम नहीं हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ना जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय साबित हुआ जिसने नई पहचान दी। छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी सफलता का रूप ले सकता है। जरूरत है तो बस हिम्मत, मेहनत और सही मार्गदर्शन की।
- विनोद कुमारी।