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Sonipat News: 24 गांवों के 60 किसान तीन दिन लेंगे प्राकृतिक खेती करने का प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:56 AM IST
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प्राकृतिक खेती पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण। फोटो संवाद
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गोहाना। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र सोनीपत की ओर से हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार संस्थान जींद के सहयोग से प्राकृतिक खेती पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसमें 24 गांवों के 60 किसान भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण संयोजक डॉ. परमिंदर सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार ने सोनीपत जिले में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा है। इसके तहत किसानों को देसी गाय के लिए 30 हजार रुपये, ड्रम के लिए 3 हजार रुपये और प्रचार-प्रसार के लिए प्रति एकड़ 30 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
डॉ. परमिंदर सिंह ने किसानों को किसान बाजार, सड़क किनारे बिक्री केंद्र, सामुदायिक समर्थित कृषि, कृषि पर्यटन और ऑनलाइन माध्यम से सीधे उत्पाद बेचने के तरीकों की जानकारी दी। उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. राजेंद्र मेहरा ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में गोमूत्र आधारित दशपर्णी, अग्नि अस्त्र, नीम अस्त्र और ब्रह्मास्त्र के माध्यम से फसलों में रोग व कीट नियंत्रण के तरीके बताए गए। प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किए।
इसमें बताया गया कि पहले किसानों को प्रशिक्षण के लिए जींद जाना पड़ता था लेकिन अब गोहाना में ही कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इससे किसानों को सुविधा मिली है।
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प्रशिक्षण संयोजक डॉ. परमिंदर सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार ने सोनीपत जिले में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा है। इसके तहत किसानों को देसी गाय के लिए 30 हजार रुपये, ड्रम के लिए 3 हजार रुपये और प्रचार-प्रसार के लिए प्रति एकड़ 30 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
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डॉ. परमिंदर सिंह ने किसानों को किसान बाजार, सड़क किनारे बिक्री केंद्र, सामुदायिक समर्थित कृषि, कृषि पर्यटन और ऑनलाइन माध्यम से सीधे उत्पाद बेचने के तरीकों की जानकारी दी। उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. राजेंद्र मेहरा ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में गोमूत्र आधारित दशपर्णी, अग्नि अस्त्र, नीम अस्त्र और ब्रह्मास्त्र के माध्यम से फसलों में रोग व कीट नियंत्रण के तरीके बताए गए। प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किए।
इसमें बताया गया कि पहले किसानों को प्रशिक्षण के लिए जींद जाना पड़ता था लेकिन अब गोहाना में ही कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इससे किसानों को सुविधा मिली है।