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Yamuna Nagar News: बिना फायर एनओसी चल रहे 135 होटल
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:38 AM IST
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शहर में बने एक होटल में जाती सीढ़ियां। संवाद
- फोटो : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दिल्ली के होटल में आग लगने की घटना ने होटलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ऐसा ही कोई हादसा जिले में हो जाए तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। जिले में संचालित 150 से अधिक होटलों में से केवल 15 होटलों ने ही फायर एनओसी प्राप्त की हुई है। होटल यात्रियों की जान जोखिम में डालकर संचालित किए जा रहे हैं।
होटलों की पड़ताल में सामने आया कि शहर में पिछले पांच वर्षों के दौरान 100 से अधिक नए होटल खुले हैं। इनमें से अधिकांश होटल 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में संचालित हो रहे हैं। दो से तीन मंजिला इन भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी का ही प्रावधान है। किसी भी होटल में वैकल्पिक आपातकालीन निकास नहीं मिला। ऐसे में आग लगने या भगदड़ मचने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं होगा।
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन रोड और प्रमुख बाजारों के आसपास स्थित कई होटलों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इन होटलों के भूतल पर ढाबे, रेस्टोरेंट और हलवाई की दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि किसी कारणवश गैस रिसाव या सिलेंडर विस्फोट हो जाए तो आग कुछ ही मिनटों में होटल तक पहुंच सकती है।
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ऐसी स्थिति में एकमात्र सीढ़ी से लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव होगा। शहर के कई होटल हुडा के एससीओ भवनों में भी संचालित हो रहे हैं। इन भवनों का मूल नक्शा व्यावसायिक दुकानों के लिए स्वीकृत था, लेकिन अब उनमें होटल चल रहे हैं। भवनों की चौड़ाई सीमित होने के कारण फायर सेफ्टी के लिए जरूरी मानकों का पालन कर पाना भी चुनौती है।
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भवन का नक्शा ही स्वीकृत नहीं है या होटल अवैध रूप से संचालित हो रहा है तो उस पर पहली कार्रवाई नगर निगम की बनती है। विभाग के अनुसार फायर एनओसी के लिए आवेदन आने पर ही मौके का निरीक्षण किया जाता है। किसी हादसे की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी होटल संचालक की होगी। होटलों में केवल अग्निशामक यंत्र लगाना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन लाइटिंग, स्मोक डिटेक्टर और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी उतने ही जरूरी हैं। लेकिन अधिकांश छोटे होटलों में ये सुविधाएं नदारद हैं।
कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा इंतजाम नदारद
होटलों की तरह जिले के कोचिंग संस्थानों की स्थिति भी चिंताजनक है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 170 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। अब शहर के मुख्य एरिया के अलावा कॉलोनियों में भी कोचिंग इंस्टीट्यूट बड़ी संख्या में खुल गए हैं। किसी के पास फायर एनओसी नहीं है। पड़ताल के दौरान कई ऐसे संस्थान मिले जहां दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां हैं। कई संस्थानों में एक भी अग्निशामक यंत्र नहीं मिला। रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
जिस भवन में होटल चल रहा है उसका नक्शा पास है या नहीं इसकी जांच नगर निगम को करनी होती है। एनओसी आवेदन की मौके पर जाकर उसकी जांच की जाती है। किसी भी कोचिंग इंस्टीट्यूट के पास एनओसी नहीं है। एहतियात के तौर पर होटलों का सर्वे कराएंगे। - पंकज पराशर, जिला दमकल अधिकारी, यमुनानगर।
यमुनानगर। दिल्ली के होटल में आग लगने की घटना ने होटलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ऐसा ही कोई हादसा जिले में हो जाए तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। जिले में संचालित 150 से अधिक होटलों में से केवल 15 होटलों ने ही फायर एनओसी प्राप्त की हुई है। होटल यात्रियों की जान जोखिम में डालकर संचालित किए जा रहे हैं।
होटलों की पड़ताल में सामने आया कि शहर में पिछले पांच वर्षों के दौरान 100 से अधिक नए होटल खुले हैं। इनमें से अधिकांश होटल 15 से 18 फीट चौड़ी इमारतों में संचालित हो रहे हैं। दो से तीन मंजिला इन भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक सीढ़ी का ही प्रावधान है। किसी भी होटल में वैकल्पिक आपातकालीन निकास नहीं मिला। ऐसे में आग लगने या भगदड़ मचने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं होगा।
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बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन रोड और प्रमुख बाजारों के आसपास स्थित कई होटलों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इन होटलों के भूतल पर ढाबे, रेस्टोरेंट और हलवाई की दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि किसी कारणवश गैस रिसाव या सिलेंडर विस्फोट हो जाए तो आग कुछ ही मिनटों में होटल तक पहुंच सकती है।
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ऐसी स्थिति में एकमात्र सीढ़ी से लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव होगा। शहर के कई होटल हुडा के एससीओ भवनों में भी संचालित हो रहे हैं। इन भवनों का मूल नक्शा व्यावसायिक दुकानों के लिए स्वीकृत था, लेकिन अब उनमें होटल चल रहे हैं। भवनों की चौड़ाई सीमित होने के कारण फायर सेफ्टी के लिए जरूरी मानकों का पालन कर पाना भी चुनौती है।
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भवन का नक्शा ही स्वीकृत नहीं है या होटल अवैध रूप से संचालित हो रहा है तो उस पर पहली कार्रवाई नगर निगम की बनती है। विभाग के अनुसार फायर एनओसी के लिए आवेदन आने पर ही मौके का निरीक्षण किया जाता है। किसी हादसे की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी होटल संचालक की होगी। होटलों में केवल अग्निशामक यंत्र लगाना ही पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित निकास मार्ग, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन लाइटिंग, स्मोक डिटेक्टर और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी उतने ही जरूरी हैं। लेकिन अधिकांश छोटे होटलों में ये सुविधाएं नदारद हैं।
कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा इंतजाम नदारद
होटलों की तरह जिले के कोचिंग संस्थानों की स्थिति भी चिंताजनक है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 170 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। अब शहर के मुख्य एरिया के अलावा कॉलोनियों में भी कोचिंग इंस्टीट्यूट बड़ी संख्या में खुल गए हैं। किसी के पास फायर एनओसी नहीं है। पड़ताल के दौरान कई ऐसे संस्थान मिले जहां दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां हैं। कई संस्थानों में एक भी अग्निशामक यंत्र नहीं मिला। रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
जिस भवन में होटल चल रहा है उसका नक्शा पास है या नहीं इसकी जांच नगर निगम को करनी होती है। एनओसी आवेदन की मौके पर जाकर उसकी जांच की जाती है। किसी भी कोचिंग इंस्टीट्यूट के पास एनओसी नहीं है। एहतियात के तौर पर होटलों का सर्वे कराएंगे। - पंकज पराशर, जिला दमकल अधिकारी, यमुनानगर।

शहर में बने एक होटल में जाती सीढ़ियां। संवाद- फोटो : संवाद