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Yamuna Nagar News: गैस और दूध महंगा, बढ़े मिठाइयों के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:36 AM IST
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रामपुरा श्री हनुमान मंदिर के सामने दुकान पर रखी मिठाईयां। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलिंडर के दामों में वृद्धि तथा दूध की बढ़ती कीमतों का असर अब मिठाई कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जिले के मिष्ठान भंडारों और हलवाइयों ने अधिकांश दूध आधारित मिठाइयों के दाम 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि दूध, गैस, चीनी और अन्य खाद्य सामग्री के साथ-साथ कारीगरों की मजदूरी में भी लगातार वृद्धि हुई है। पहले जो दूध 60 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं मिठाई तैयार करने वाले कारीगरों और हलवाइयों की मजदूरी में भी 500 से 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
सोनू स्वीट्स हाउस के संचालक सोनू और कृष्णा स्वीट्स हाउस के संचालक ने बताया कि मिठाई बनाने में सबसे अधिक दूध का उपयोग होता है। दूध की कीमत बढ़ने से रसगुल्ला, गुलाब जामुन, रसमलाई, पेड़ा, कलाकंद, बर्फी, मिल्क केक, रबड़ी और अन्य दूध आधारित मिठाइयों की लागत बढ़ गई है। पहले 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गुलाब जामुन अब 220 रुपये किलो हो गया है।
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इसी प्रकार दही के दाम 80 रुपये से बढ़कर 90 रुपये और पनीर के दाम 320 रुपये से बढ़कर 340 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों को गुणवत्ता युक्त उत्पाद उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उन्हें खुद वहन करना पड़ रहा है, जबकि कुछ हिस्सा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में ग्राहकों तक पहुंचा है।
दूध से बनने वाली मिठाइयों की मांग वर्षभर बनी रहती है। त्योहारों, विवाह समारोहों और अन्य मांगलिक आयोजनों में इनकी खपत और बढ़ जाती है। यही कारण है कि लागत बढ़ने के बावजूद मिठाइयों की मांग पर अधिक असर नहीं पड़ा है।
यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र में करीब 250 मिठाई की दुकानें संचालित हैं। शहर में बढ़ी हुई लागत के कारण मिठाइयों के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पुराने दामों पर मिठाइयां उपलब्ध हैं। इसका मुख्य कारण गांवों में दूध का स्थानीय स्तर पर अधिक उत्पादन होना माना जा रहा है।
हालांकि परिवहन लागत और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे ग्रामीण बाजारों तक भी पहुंचने लगा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में और वृद्धि हुई तो आने वाले समय में मिठाइयों के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
यमुनानगर। घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलिंडर के दामों में वृद्धि तथा दूध की बढ़ती कीमतों का असर अब मिठाई कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जिले के मिष्ठान भंडारों और हलवाइयों ने अधिकांश दूध आधारित मिठाइयों के दाम 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि दूध, गैस, चीनी और अन्य खाद्य सामग्री के साथ-साथ कारीगरों की मजदूरी में भी लगातार वृद्धि हुई है। पहले जो दूध 60 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं मिठाई तैयार करने वाले कारीगरों और हलवाइयों की मजदूरी में भी 500 से 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
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सोनू स्वीट्स हाउस के संचालक सोनू और कृष्णा स्वीट्स हाउस के संचालक ने बताया कि मिठाई बनाने में सबसे अधिक दूध का उपयोग होता है। दूध की कीमत बढ़ने से रसगुल्ला, गुलाब जामुन, रसमलाई, पेड़ा, कलाकंद, बर्फी, मिल्क केक, रबड़ी और अन्य दूध आधारित मिठाइयों की लागत बढ़ गई है। पहले 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गुलाब जामुन अब 220 रुपये किलो हो गया है।
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दूध से बनने वाली मिठाइयों की मांग वर्षभर बनी रहती है। त्योहारों, विवाह समारोहों और अन्य मांगलिक आयोजनों में इनकी खपत और बढ़ जाती है। यही कारण है कि लागत बढ़ने के बावजूद मिठाइयों की मांग पर अधिक असर नहीं पड़ा है।
यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र में करीब 250 मिठाई की दुकानें संचालित हैं। शहर में बढ़ी हुई लागत के कारण मिठाइयों के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पुराने दामों पर मिठाइयां उपलब्ध हैं। इसका मुख्य कारण गांवों में दूध का स्थानीय स्तर पर अधिक उत्पादन होना माना जा रहा है।
हालांकि परिवहन लागत और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे ग्रामीण बाजारों तक भी पहुंचने लगा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में और वृद्धि हुई तो आने वाले समय में मिठाइयों के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है।