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Yamuna Nagar News: पुनर्वास केंद्र में थमीं हथिनी चंचल की सांसें

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 24 Mar 2026 01:25 AM IST
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Elephant Chanchal Breathes Her Last at Rehabilitation Centre
ह​थिनी चंचल। फाइल फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
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छछरौली (यमुनानगर)। हरियाणा के पहले चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बनसंतौर में मंगलवार को हथिनी चंचल की सांसें थम गईं और 85 साल का उसका लंबा सफर यहीं आकर खत्म हो गया। वर्षों से केंद्र का हिस्सा रही इस हथिनी के जाने से वहां का माहौल गमगीन हो गया और देखभाल करने वालों की आंखें नम हो उठीं।
महावत के अनुसार, चंचल पिछले कई दिनों से उम्रजनित कमजोरी से जूझ रही थी। उसने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया था, फिर भी उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। दवाइयों और इलाज के बावजूद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। मंगलवार को वह खड़ी-खड़ी ही अचानक जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम ने उसे संभालने की हर संभव कोशिश की, लेकिन आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। चंचल सिर्फ एक हथिनी नहीं, बल्कि इस केंद्र की एक जीवंत याद बन चुकी थी।
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वर्ष 2008 में जब उसे घरौंडा क्षेत्र से रेस्क्यू कर यहां लाया गया था, तब से उसने अपना पूरा जीवन इसी केंद्र में बिताया। उसके साथ लाई गई हथिनी लक्ष्मी और बाद में पहुंची अन्य हथिनियों के बीच वह परिवार का हिस्सा बन गई थी। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से 50 एकड़ में बने इस केंद्र में चंचल ने 17 वर्षों तक सुरक्षित जीवन जिया।
यहां उन हाथियों को नया जीवन मिलता है, जो कभी क्रूरता, अवैध कैद या उपेक्षा का शिकार रहे हों। चंचल भी उन्हीं में से एक थी, जिसने कठिन अतीत के बाद यहां सुकून पाया। विशेषज्ञों के अनुसार, उसकी मौत पूरी तरह प्राकृतिक है और बुढ़ापे के कारण हुई।
पोस्टमार्टम के बाद चंचल को पूरे सम्मान के साथ दफन किया गया। अंतिम विदाई के समय मौजूद लोगों की आंखों में उसके साथ बिताए पलों की यादें साफ झलक रही थीं। आज चंचल भले ही इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन बनसंतोर केंद्र में उसकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
जंगल में विचरण कर रहे हाथियों की औसत उम्र लगभग 60-65 वर्ष होती है। हाथी केंद्र बन संतौर में हथिनी चंचल की बुढ़ापे के कारण प्राकृतिक मृत्यु हुई है। उसकी उम्र 84 वर्ष थी। पोस्टमार्टम के बाद उसे दफन कर दिया गया है। - विवेक सक्सेना, पीसीसीएफ, वन्य प्राणी विभाग।
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