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Yamuna Nagar News: 10 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की जांच करेगी एसआईटी
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 21 Apr 2026 01:50 AM IST
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नगर निगम की बिल्डिंग में संचालित आरोपियों का दफ्तर। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स निवेश के नाम पर सामने आए 10 करोड़ से अधिक ठगी के मांच मामलों में अब जांच ने तेज हो गई है। एसपी कमलदीप गोयल ने जल्द खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीएसपी रजत गुलिया के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है। विभिन्न थानों में दर्ज पांच मामलों को एक साथ जोड़कर एसआईटी ने जांच तेज कर दी है।
शहर थाना यमुनानगर, फर्कपुर थाना समेत अन्य थानों में दर्ज एफआईआर को अब एक ही जांच के दायरे में लाया गया है। इससे अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने में आसानी होगी और पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिलेगी।
शुरुआती जांच में कई मामलों में समान आरोपी और एक जैसे ठगी के तरीके सामने आए हैं, जिससे संगठित गिरोह की आशंका और मजबूत हुई है।
एसआईटी अब सभी मामलों के दस्तावेज, बैंक लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। साथ ही निवेशकों से जुड़े डेटा और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संयुक्त जांच से न केवल इस गिरोह का पर्दाफाश होगा, बल्कि इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी। करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में पहली प्राथमिकी 27 मार्च को सिटी थाना में दर्ज हुई थी।
इतने दिन बीतने के बाद भी न तो आरोपी पकड़े गए और न ही उनके दफ्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है। आरोपी अपने दफ्तर पर ताला लगाकर भाग चुके हैं। दफ्तर को अब तक सील नहीं किया गया है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस को तुरंत दफ्तर को कब्जे में लेकर जांच करनी चाहिए थी, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। दफ्तर की समय पर जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि वहीं से ठगी के अहम सुराग मिल सकते हैं। देरी से कार्रवाई होने पर सबूत नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
नगर निगम की बिल्डिंग किराये पर लेकर चल रहा था लोगों को ठगने का खेल
शहर में क्रिप्टो और फॉरेक्स निवेश के नाम पर हुए करोड़ों रुपये ठगी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलासा हुआ है कि ठगी का यह नेटवर्क नगर निगम की बिल्डिंग में स्थित सीहॉक नाम के दफ्तर से संचालित हो रहा था, जिसे आरोपियों ने किराये पर लिया था। आरोप है कि ठगों ने यहीं से लोगों को मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और निगम की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। 27 मार्च को पहला मामला दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। यदि सतर्कता बरती जाती और दफ्तर को समय पर खाली कराया जाता, तो इस बड़े फर्जीवाड़े को रोका जा सकता था।
ठगी की जांच को प्रभावी और तेज बनाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। अब तक दर्ज सभी मामलों को एक साथ जोड़कर जांच की जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की कड़ियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। - कमलदीप गोयल, एसपी यमुनानगर।
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यमुनानगर। क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स निवेश के नाम पर सामने आए 10 करोड़ से अधिक ठगी के मांच मामलों में अब जांच ने तेज हो गई है। एसपी कमलदीप गोयल ने जल्द खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीएसपी रजत गुलिया के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है। विभिन्न थानों में दर्ज पांच मामलों को एक साथ जोड़कर एसआईटी ने जांच तेज कर दी है।
शहर थाना यमुनानगर, फर्कपुर थाना समेत अन्य थानों में दर्ज एफआईआर को अब एक ही जांच के दायरे में लाया गया है। इससे अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने में आसानी होगी और पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिलेगी।
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शुरुआती जांच में कई मामलों में समान आरोपी और एक जैसे ठगी के तरीके सामने आए हैं, जिससे संगठित गिरोह की आशंका और मजबूत हुई है।
एसआईटी अब सभी मामलों के दस्तावेज, बैंक लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। साथ ही निवेशकों से जुड़े डेटा और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संयुक्त जांच से न केवल इस गिरोह का पर्दाफाश होगा, बल्कि इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी। करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में पहली प्राथमिकी 27 मार्च को सिटी थाना में दर्ज हुई थी।
इतने दिन बीतने के बाद भी न तो आरोपी पकड़े गए और न ही उनके दफ्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है। आरोपी अपने दफ्तर पर ताला लगाकर भाग चुके हैं। दफ्तर को अब तक सील नहीं किया गया है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस को तुरंत दफ्तर को कब्जे में लेकर जांच करनी चाहिए थी, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। दफ्तर की समय पर जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि वहीं से ठगी के अहम सुराग मिल सकते हैं। देरी से कार्रवाई होने पर सबूत नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
नगर निगम की बिल्डिंग किराये पर लेकर चल रहा था लोगों को ठगने का खेल
शहर में क्रिप्टो और फॉरेक्स निवेश के नाम पर हुए करोड़ों रुपये ठगी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलासा हुआ है कि ठगी का यह नेटवर्क नगर निगम की बिल्डिंग में स्थित सीहॉक नाम के दफ्तर से संचालित हो रहा था, जिसे आरोपियों ने किराये पर लिया था। आरोप है कि ठगों ने यहीं से लोगों को मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और निगम की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल रही। 27 मार्च को पहला मामला दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। यदि सतर्कता बरती जाती और दफ्तर को समय पर खाली कराया जाता, तो इस बड़े फर्जीवाड़े को रोका जा सकता था।
ठगी की जांच को प्रभावी और तेज बनाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। अब तक दर्ज सभी मामलों को एक साथ जोड़कर जांच की जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की कड़ियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। - कमलदीप गोयल, एसपी यमुनानगर।

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