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Yamuna Nagar News: दड़वा गांव में स्थानांतरित होगा 90 करोड़ रुपये का गोबर-धन संयंत्र
Sat, 01 Aug 2026 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:45 AM IST
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मुकारमपुर में इस जगह पर बनना था सीबीजी प्लांट। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र के मुकारमपुर गांव में प्रस्तावित करीब 90 करोड़ रुपये की गोबर-धन (सीबीजी) परियोजना अब दड़वा स्थानांतरित किए जाने की तैयारी है। सवा साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का शिलान्यास कियाथा। दड़वा में भूमि का चयन के बाद औपचारिकताएं पूरी होते ही संयंत्र का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2025 को कैल गांव में आयोजित रैली के दौरान इस परियोजना का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। योजना के तहत मुकारमपुर में करीब 10 एकड़ भूमि पर भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से गोबर-धन संयंत्र स्थापित किया जाना था। परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
एक साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। दड़वा में प्लांट को शिफ्ट करने के लिए नगर निगम की तरफ से यूएलबी को पत्र भी लिखा गया है। सरकार और प्रशासन इस परियोजना को जल्द पूरा कराने के प्रयास में हैं, क्योंकि इसकी आधारशिला स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी। मुकारमपुर गांव से मामली रोड पर इस संयंत्र का शुरुआत से ही स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने विरोध किया था।
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भारतीय किसान यूनियन और आसपास के गांवों के लोगों का कहना था कि संयंत्र बनने से क्षेत्र में दुर्गंध फैलेगी और पर्यावरण प्रदूषित होगा। उनका कहना है कि मानसून के दौरान क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनती है, जिससे संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट का खतरा बढ़ सकता है। मुंडाखेड़ा, मुकारमपुर, मामली, चाहड़ों और सलेमपुर के ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि गोबर और जैविक कचरे की दुर्गंध से लोगों का रहना मुश्किल हो जाएगा।
10 हजार मीट्रिक टन बायो-खाद का होगा उत्पादन
संयंत्र से हर साल लगभग 10 हजार मीट्रिक टन बायो-खाद का उत्पादन भी होगा, जिसका उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा सकेगा। साथ ही अनुमान है कि परियोजना शुरू होने पर 7,700 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम क्षेत्र के कैल, दड़वा और औरंगाबाद स्थित डेयरी कॉप्लेक्स में हजारों पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 110 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। वर्तमान में इसका अधिकांश हिस्सा नालियों या खुले स्थानों में चला जाता है। वहीं शहर से रोजाना 250 से 280 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है, जिसका निस्तारण कैल स्थित कचरा प्लांट में किया जाता है। इस व्यवस्था पर नगर निगम को हर वर्ष करीब 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
हजारों टन कचरे और गोबर का होगा उपयोग
गोबर-धन संयंत्र नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी और बीपीसीएल के सहयोग से स्थापित किया जाना है। संयंत्र की कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 2,600 मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। इसमें कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर और नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले ठोस जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तैयार किया जाएगा। परियोजना के तहत प्रतिवर्ष करीब 45 हजार मीट्रिक टन ठोस जैविक कचरे और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे न केवल कचरे की समस्या का समाधान होगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी संभव होगा। तैयार होने वाली सीबीजी गैस सीएनजी का बेहतर विकल्प मानी जाती है।
गोबर-धन संयंत्र शुरू होने से शहर के कचरे और गोबर का वैज्ञानिक निस्तारण होगा। इससे निगम के खर्च में कमी आएगी और बचाई गई राशि को शहर के विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र के मुकारमपुर गांव में प्रस्तावित करीब 90 करोड़ रुपये की गोबर-धन (सीबीजी) परियोजना अब दड़वा स्थानांतरित किए जाने की तैयारी है। सवा साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का शिलान्यास कियाथा। दड़वा में भूमि का चयन के बाद औपचारिकताएं पूरी होते ही संयंत्र का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2025 को कैल गांव में आयोजित रैली के दौरान इस परियोजना का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। योजना के तहत मुकारमपुर में करीब 10 एकड़ भूमि पर भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से गोबर-धन संयंत्र स्थापित किया जाना था। परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
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एक साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। दड़वा में प्लांट को शिफ्ट करने के लिए नगर निगम की तरफ से यूएलबी को पत्र भी लिखा गया है। सरकार और प्रशासन इस परियोजना को जल्द पूरा कराने के प्रयास में हैं, क्योंकि इसकी आधारशिला स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी। मुकारमपुर गांव से मामली रोड पर इस संयंत्र का शुरुआत से ही स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने विरोध किया था।
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भारतीय किसान यूनियन और आसपास के गांवों के लोगों का कहना था कि संयंत्र बनने से क्षेत्र में दुर्गंध फैलेगी और पर्यावरण प्रदूषित होगा। उनका कहना है कि मानसून के दौरान क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनती है, जिससे संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट का खतरा बढ़ सकता है। मुंडाखेड़ा, मुकारमपुर, मामली, चाहड़ों और सलेमपुर के ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि गोबर और जैविक कचरे की दुर्गंध से लोगों का रहना मुश्किल हो जाएगा।
10 हजार मीट्रिक टन बायो-खाद का होगा उत्पादन
संयंत्र से हर साल लगभग 10 हजार मीट्रिक टन बायो-खाद का उत्पादन भी होगा, जिसका उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा सकेगा। साथ ही अनुमान है कि परियोजना शुरू होने पर 7,700 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम क्षेत्र के कैल, दड़वा और औरंगाबाद स्थित डेयरी कॉप्लेक्स में हजारों पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 110 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। वर्तमान में इसका अधिकांश हिस्सा नालियों या खुले स्थानों में चला जाता है। वहीं शहर से रोजाना 250 से 280 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है, जिसका निस्तारण कैल स्थित कचरा प्लांट में किया जाता है। इस व्यवस्था पर नगर निगम को हर वर्ष करीब 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
हजारों टन कचरे और गोबर का होगा उपयोग
गोबर-धन संयंत्र नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी और बीपीसीएल के सहयोग से स्थापित किया जाना है। संयंत्र की कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 2,600 मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। इसमें कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर और नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले ठोस जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तैयार किया जाएगा। परियोजना के तहत प्रतिवर्ष करीब 45 हजार मीट्रिक टन ठोस जैविक कचरे और 36 हजार मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे न केवल कचरे की समस्या का समाधान होगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी संभव होगा। तैयार होने वाली सीबीजी गैस सीएनजी का बेहतर विकल्प मानी जाती है।
गोबर-धन संयंत्र शुरू होने से शहर के कचरे और गोबर का वैज्ञानिक निस्तारण होगा। इससे निगम के खर्च में कमी आएगी और बचाई गई राशि को शहर के विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।