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Yamuna Nagar News: आईलेट्स पास युवक को विदेश का झांसा देकर बनाया था शूटर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:28 AM IST
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वरयाम सिंह अस्पताल के अंद फायरिंग करता बदमाश। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिटी मॉल और निजी अस्पताल में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग का मामला अब गैंगस्टरों के बदलते तौर-तरीकों की बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर उन्हें रंगदारी गिरोह का हिस्सा बनाया जा रहा है। विदेश जाने का सपना देखने वाला आईलेट्स पास युवक इसी डिजिटल जाल में फंसकर शूटर बन गया। उधर सुरक्षा की दृष्टि से वरयाम सिंह अस्पताल के बाहर पुलिस लगा दी गई है।
पुलिस की जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी गुरलाल ने 12वीं के बाद आईलेट्स परीक्षा पास कर विदेश जाने की तैयारी शुरू की थी, लेकिन सपना पूरा नहीं हो पाया। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान विदेश में बैठे गैंगस्टर नोनी राणा से हुई। शुरुआत में बातचीत विदेश भेजने और नौकरी दिलाने के वादों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे उसे अपराध में धकेल दिया गया।
पुलिस के अनुसार यह पूरा गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भर्ती और संपर्क का जरिया बना रहा है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गुरलाल को ऐसे युवकों को साथ जोड़ने का टास्क दिया गया था जो जल्दी पैसों के लालच में आ जाएं।
उसने करनाल के तरावड़ी निवासी नितिन और सागर को ऑनलाइन संपर्क के जरिए अपने साथ मिला लिया। तीनों को हथियार उपलब्ध कराए गए और वारदात के बदले 50 हजार रुपये देने का वादा किया गया। इसके बाद तीनों बाइक पर यमुनानगर पहुंचे और निजी अस्पताल व सिटी मॉल पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की। पुलिस ने वारदात के अगले ही दिन मुठभेड़ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। उनके कब्जे से दो पिस्टल और चार मोबाइल फोन बरामद हुए। अब जांच का फोकस डिजिटल साक्ष्यों पर है।
खंगाला जा रहा डिजिटल नेटवर्क : राकेश
सीआईए-2 के प्रभारी राकेश कुमार के अनुसार जांच एजेंसियां साइबर और क्राइम यूनिट की मदद से पूरे डिजिटल नेटवर्क को खंगाल रही हैं। पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ फायरिंग तक सीमित नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चल रहे संगठित रंगदारी रैकेट का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।
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यमुनानगर। सिटी मॉल और निजी अस्पताल में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग का मामला अब गैंगस्टरों के बदलते तौर-तरीकों की बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर उन्हें रंगदारी गिरोह का हिस्सा बनाया जा रहा है। विदेश जाने का सपना देखने वाला आईलेट्स पास युवक इसी डिजिटल जाल में फंसकर शूटर बन गया। उधर सुरक्षा की दृष्टि से वरयाम सिंह अस्पताल के बाहर पुलिस लगा दी गई है।
पुलिस की जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी गुरलाल ने 12वीं के बाद आईलेट्स परीक्षा पास कर विदेश जाने की तैयारी शुरू की थी, लेकिन सपना पूरा नहीं हो पाया। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान विदेश में बैठे गैंगस्टर नोनी राणा से हुई। शुरुआत में बातचीत विदेश भेजने और नौकरी दिलाने के वादों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे उसे अपराध में धकेल दिया गया।
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पुलिस के अनुसार यह पूरा गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भर्ती और संपर्क का जरिया बना रहा है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गुरलाल को ऐसे युवकों को साथ जोड़ने का टास्क दिया गया था जो जल्दी पैसों के लालच में आ जाएं।
उसने करनाल के तरावड़ी निवासी नितिन और सागर को ऑनलाइन संपर्क के जरिए अपने साथ मिला लिया। तीनों को हथियार उपलब्ध कराए गए और वारदात के बदले 50 हजार रुपये देने का वादा किया गया। इसके बाद तीनों बाइक पर यमुनानगर पहुंचे और निजी अस्पताल व सिटी मॉल पर फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की। पुलिस ने वारदात के अगले ही दिन मुठभेड़ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। उनके कब्जे से दो पिस्टल और चार मोबाइल फोन बरामद हुए। अब जांच का फोकस डिजिटल साक्ष्यों पर है।
खंगाला जा रहा डिजिटल नेटवर्क : राकेश
सीआईए-2 के प्रभारी राकेश कुमार के अनुसार जांच एजेंसियां साइबर और क्राइम यूनिट की मदद से पूरे डिजिटल नेटवर्क को खंगाल रही हैं। पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ फायरिंग तक सीमित नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चल रहे संगठित रंगदारी रैकेट का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।