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Yamuna Nagar News: सोम नदी से गाद निकालने की निविदा पर एनजीटी की रोक
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। सोमनदी नदी में डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) कार्य के लिए जारी निविदा (टेंडर) अब विवादों में घिर गई है। यमुनानगर सिंचाई विभाग की ओर से आरडी 35600 से आरडी 41200 तक डी-सिल्टिंग के लिए ऑनलाइन बिडिंग के जरिये निविदा जारी की गई थी, जिसे 15 फरवरी को खोला जाना था। इससे पहले ही 11 फरवरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने निविदा और इससे जुड़ी सभी विभागीय प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी। इस आदेश के बाद फिलहाल नदी की सफाई का काम ठप हो गया है।
निविदा की शर्तें काफी सख्त रखी गई थीं। बोल्डर के लिए 1.73 करोड़ रुपये और सिल्ट के लिए 31 लाख रुपये की राशि जमा करना अनिवार्य था, जबकि आवेदन शुल्क 20 हजार रुपये तय किया गया था। ठेकेदार को 120 दिनों के भीतर खनन विभाग की ओर से निर्धारित रॉयल्टी जमा कर कार्य पूरा करना था। टेंडर प्रक्रिया में बड़ी वित्तीय शर्तों के चलते पहले ही कई ठेकेदारों में असंतोष था।
ठेकेदारों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में टेंडर जारी किया गया। एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला और गंभीर हो गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर डी-सिल्टिंग न होने से सोमनदी में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। वहीं स्थानीय लोग और ठेकेदार अब एनजीटी की अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। सिंचाई विभाग के एसई आरएस मित्तल ने बताया कि एनजीटी की ओर से टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है और विभाग इस संबंध में कानूनी सलाह ले रहा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और आगामी निर्णय पर टिकी है।
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छछरौली। सोमनदी नदी में डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) कार्य के लिए जारी निविदा (टेंडर) अब विवादों में घिर गई है। यमुनानगर सिंचाई विभाग की ओर से आरडी 35600 से आरडी 41200 तक डी-सिल्टिंग के लिए ऑनलाइन बिडिंग के जरिये निविदा जारी की गई थी, जिसे 15 फरवरी को खोला जाना था। इससे पहले ही 11 फरवरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने निविदा और इससे जुड़ी सभी विभागीय प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी। इस आदेश के बाद फिलहाल नदी की सफाई का काम ठप हो गया है।
निविदा की शर्तें काफी सख्त रखी गई थीं। बोल्डर के लिए 1.73 करोड़ रुपये और सिल्ट के लिए 31 लाख रुपये की राशि जमा करना अनिवार्य था, जबकि आवेदन शुल्क 20 हजार रुपये तय किया गया था। ठेकेदार को 120 दिनों के भीतर खनन विभाग की ओर से निर्धारित रॉयल्टी जमा कर कार्य पूरा करना था। टेंडर प्रक्रिया में बड़ी वित्तीय शर्तों के चलते पहले ही कई ठेकेदारों में असंतोष था।
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ठेकेदारों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में टेंडर जारी किया गया। एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला और गंभीर हो गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर डी-सिल्टिंग न होने से सोमनदी में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। वहीं स्थानीय लोग और ठेकेदार अब एनजीटी की अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। सिंचाई विभाग के एसई आरएस मित्तल ने बताया कि एनजीटी की ओर से टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है और विभाग इस संबंध में कानूनी सलाह ले रहा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और आगामी निर्णय पर टिकी है।