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Yamuna Nagar News: निजी संस्थानों को खेल नर्सरियों की मंजूरी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 11 Apr 2026 03:45 AM IST
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जगाधरी। जिले में खेल नर्सरियों को लेकर पिछले वर्ष की स्थिति बनी हुई है। इस वर्ष के लिए जिलेभर से निजी व राजकीय कुल 135 संस्थानों ने आवेदन किया था। इसमें से खेल विभाग की ओर से कुल 35 नर्सरियों को अनुमति दी गई है। इसमें राजकीय विद्यालयों व पंचायती संस्थानों को ही जगह मिली है। खेल नर्सरियों के लिए 30 राजकीय और पांच निजी संस्थानों को अनुमति मिली है। वहीं, अन्य निजी संस्थानों को फिर से कतार में खड़ा कर दिया है।
खेल नर्सरियों के लिए इस बार राजकीय, निजी संस्थानों और पंचायतों के जिलेभर से कुल 135 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभाग ने मानकों पर खरे उतरने वाले 35 संस्थानों को नर्सरी चलाने की मंजूरी दी है। दूसरी ओर निजी शिक्षण संस्थानों को इस बार भी मंजूरी नहीं मिल पाई है, उन्हें प्रतीक्षा में रखा गया है। ऐसे में निजी स्कूलों के प्रबंधकों, कोच और खिलाड़ियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछली बार भी निजी संस्थान पूरा वर्ष मंजूरी का इंतजार करते रह गए थे। परंतु उन्हें मंजूरी नहीं मिली थी, बल्कि मंजूरी मिलने के बाद पांच खेल नर्सरियां बंद हो गई थी। बावजूद इसके विभाग की ओर से निजी संस्थानों को अनुमति नहीं दी। इस बार भी वही स्थिति नजर आ रही है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि निजी संस्थानों के पास बेहतर सुविधाएं, उपकरण व प्रशिक्षित कोच होते हैं। यदि इन संस्थानों को भी योजना में शामिल किया जाए, तो जिले में खेल प्रतिभाओं को और अधिक बेहतरीन अवसर व खिलाड़ियों को सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल मंजूर 35 खेल नर्सरियां शुरू हो गई हैं। अधिकारियों की ओर से इनका निरीक्षण भी किया गया है। परंतु पिछले वर्ष की तरह स्थिति बनी और नर्सरियां बंद हो गई तो खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ेगा। यदि समय पर कतार में खड़े संस्थानों को मंजूरी मिल जाती है तो खिलाड़ियों को और अधिक सुविधाएं मिलेंगी। प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निखार आए और प्रतिभाएं आयाम प्राप्त करेंगी। फिलहाल निजी संस्थानों को विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
जिला खेल अधिकारी शिल्पा गुप्ता ने कहा कि इस बार 135 संस्थानों ने अनुमति के लिए आवेदन किया था, इसमें से 35 खेल नर्सरियां मंजूर हुई हैं। निजी संस्थानों को मुख्यालय की ओर से वेटिंग में रखा गया है। इनकी अनुमति मुख्यालय स्तर पर लंबित है। संवाद
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खेल नर्सरियों के लिए इस बार राजकीय, निजी संस्थानों और पंचायतों के जिलेभर से कुल 135 आवेदन प्राप्त हुए थे। विभाग ने मानकों पर खरे उतरने वाले 35 संस्थानों को नर्सरी चलाने की मंजूरी दी है। दूसरी ओर निजी शिक्षण संस्थानों को इस बार भी मंजूरी नहीं मिल पाई है, उन्हें प्रतीक्षा में रखा गया है। ऐसे में निजी स्कूलों के प्रबंधकों, कोच और खिलाड़ियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछली बार भी निजी संस्थान पूरा वर्ष मंजूरी का इंतजार करते रह गए थे। परंतु उन्हें मंजूरी नहीं मिली थी, बल्कि मंजूरी मिलने के बाद पांच खेल नर्सरियां बंद हो गई थी। बावजूद इसके विभाग की ओर से निजी संस्थानों को अनुमति नहीं दी। इस बार भी वही स्थिति नजर आ रही है।
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खेल विशेषज्ञों का मानना है कि निजी संस्थानों के पास बेहतर सुविधाएं, उपकरण व प्रशिक्षित कोच होते हैं। यदि इन संस्थानों को भी योजना में शामिल किया जाए, तो जिले में खेल प्रतिभाओं को और अधिक बेहतरीन अवसर व खिलाड़ियों को सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल मंजूर 35 खेल नर्सरियां शुरू हो गई हैं। अधिकारियों की ओर से इनका निरीक्षण भी किया गया है। परंतु पिछले वर्ष की तरह स्थिति बनी और नर्सरियां बंद हो गई तो खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ेगा। यदि समय पर कतार में खड़े संस्थानों को मंजूरी मिल जाती है तो खिलाड़ियों को और अधिक सुविधाएं मिलेंगी। प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निखार आए और प्रतिभाएं आयाम प्राप्त करेंगी। फिलहाल निजी संस्थानों को विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
जिला खेल अधिकारी शिल्पा गुप्ता ने कहा कि इस बार 135 संस्थानों ने अनुमति के लिए आवेदन किया था, इसमें से 35 खेल नर्सरियां मंजूर हुई हैं। निजी संस्थानों को मुख्यालय की ओर से वेटिंग में रखा गया है। इनकी अनुमति मुख्यालय स्तर पर लंबित है। संवाद