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Bilaspur News: जिले के विकास के लिए 1625.83 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:40 PM IST
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बिलासपुर में नाबार्ड की संभाव्यतायुक्त ऋण योजना का किया विमोचन करते अधिकारी। स्रोत: डीपीआरओ
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उपायुक्त ने नाबार्ड की संभाव्यतायुक्त ऋण योजना का किया विमोचन
कृषि और एमएसएमई पर रहेगा सबसे अधिक फोकस
फसल उत्पादन, यंत्रीकरण और बागवानी को मिलेगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से नाबार्ड ने वर्ष 2026-27 के लिए 1625.83 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की है। उपायुक्त राहुल कुमार ने नाबार्ड की ओर से तैयार संभाव्यतायुक्त ऋण योजना का विमोचन किया। यह योजना कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, आवास, शिक्षा, सामाजिक अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह को दिशा देने का कार्य करेगी।
सऋण योजना के अनुसार कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए 714.74 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए 771.35 करोड़ रुपये तथा अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए 139.74 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त ने कहा कि नाबार्ड की यह ऋण योजना भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कृषि क्षेत्र के अंतर्गत फसल उत्पादन, रखरखाव एवं विपणन के लिए 465.67 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। इसके अलावा जल संसाधन विकास के लिए 16.93 करोड़ रुपये, कृषि यंत्रीकरण के लिए 21.27 करोड़ रुपये, बागवानी, पौधरोपण एवं सेरीकल्चर के लिए 30.04 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वानिकी एवं बंजर भूमि विकास के लिए 5.71 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है, जिससे अनुपयोगी भूमि को उत्पादक बनाने में सहायता मिलेगी। कृषि अवसंरचना क्षेत्र के लिए कुल 16.80 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है। इसमें भंडारण संरचनाओं के निर्माण के लिए 5.65 करोड़ रुपये, भूमि विकास, मृदा संरक्षण एवं बंजर भूमि विकास के लिए 9.75 करोड़ रुपये तथा अन्य अवसंरचना गतिविधियों के लिए 1.39 करोड़ रुपये शामिल हैं। सहायक गतिविधियों के अंतर्गत खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण के लिए 10.16 करोड़, अन्य सहायक गतिविधियों के लिए 2.34 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। पशुपालन क्षेत्र के तहत डेयरी गतिविधियों के लिए 116.68 करोड़ रुपये, पोल्ट्री के लिए 7.49 करोड़ रुपये, भेड़-बकरी एवं सुअर पालन के लिए 6.52 करोड़ रुपये तथा मत्स्य पालन के लिए 11.61 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है।
इन गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे और किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए कुल 771.35 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के रूप में 432 करोड़ रुपये, टर्म लोन के रूप में 337.28 करोड़ रुपये तथा अन्य एमएसएमई गतिविधियों के लिए 2.07 करोड़ रुपये शामिल हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में शिक्षा के लिए 0.56 करोड़ रुपये, आवास क्षेत्र के लिए 16.01 करोड़ रुपये, सामाजिक अवसंरचना के लिए 75.81 करोड़ रुपये, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 3.06 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। इसके अलावा निर्यात ऋण के लिए 38.24 करोड़ रुपये, अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए 6.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त ने संबंधित विभागों और बैंक प्रबंधन को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय से विशेष जागरूकता शिविर आयोजित करें, ताकि किसानों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की जानकारी मिल सके।
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सऋण योजना के अनुसार कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए 714.74 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए 771.35 करोड़ रुपये तथा अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए 139.74 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त ने कहा कि नाबार्ड की यह ऋण योजना भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कृषि क्षेत्र के अंतर्गत फसल उत्पादन, रखरखाव एवं विपणन के लिए 465.67 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। इसके अलावा जल संसाधन विकास के लिए 16.93 करोड़ रुपये, कृषि यंत्रीकरण के लिए 21.27 करोड़ रुपये, बागवानी, पौधरोपण एवं सेरीकल्चर के लिए 30.04 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वानिकी एवं बंजर भूमि विकास के लिए 5.71 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है, जिससे अनुपयोगी भूमि को उत्पादक बनाने में सहायता मिलेगी। कृषि अवसंरचना क्षेत्र के लिए कुल 16.80 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है। इसमें भंडारण संरचनाओं के निर्माण के लिए 5.65 करोड़ रुपये, भूमि विकास, मृदा संरक्षण एवं बंजर भूमि विकास के लिए 9.75 करोड़ रुपये तथा अन्य अवसंरचना गतिविधियों के लिए 1.39 करोड़ रुपये शामिल हैं। सहायक गतिविधियों के अंतर्गत खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण के लिए 10.16 करोड़, अन्य सहायक गतिविधियों के लिए 2.34 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। पशुपालन क्षेत्र के तहत डेयरी गतिविधियों के लिए 116.68 करोड़ रुपये, पोल्ट्री के लिए 7.49 करोड़ रुपये, भेड़-बकरी एवं सुअर पालन के लिए 6.52 करोड़ रुपये तथा मत्स्य पालन के लिए 11.61 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता निर्धारित की गई है।
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इन गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे और किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए कुल 771.35 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के रूप में 432 करोड़ रुपये, टर्म लोन के रूप में 337.28 करोड़ रुपये तथा अन्य एमएसएमई गतिविधियों के लिए 2.07 करोड़ रुपये शामिल हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में शिक्षा के लिए 0.56 करोड़ रुपये, आवास क्षेत्र के लिए 16.01 करोड़ रुपये, सामाजिक अवसंरचना के लिए 75.81 करोड़ रुपये, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 3.06 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता आंकी गई है। इसके अलावा निर्यात ऋण के लिए 38.24 करोड़ रुपये, अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए 6.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त ने संबंधित विभागों और बैंक प्रबंधन को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय से विशेष जागरूकता शिविर आयोजित करें, ताकि किसानों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की जानकारी मिल सके।