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Bilaspur News: गरीबी के कारण जेल में बंद अंडर ट्रायल कैदियों को न्याय दिलाने की पहल
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हिमानी गौतम।
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हिमानी गौतम ने मुख्य सचिव को भेजा ज्ञापन, प्रदेशभर में समीक्षा और राहत की मांग
इस निर्णय से प्रदेश की जेलों में अनावश्यक भीड़ होगी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। इग्नू की सामाजिक कार्य की छात्रा हिमानी गौतम ने गरीब अंडर ट्रायल (विचाराधीन) कैदियों के लिए मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश को औपचारिक ज्ञापन भेजा है। इसमें उन्होंने प्रदेशभर में ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा और समय पर न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन में हिमानी गौतम ने विशेष रूप से बिलासपुर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अदालत ने जमानत दी, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर आरोपी जमानती राशि जमा न कर पाने या जमानतदार की व्यवस्था न कर पाने के कारण जेल में रह जाते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया गया है। उन्होंने ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब कैदियों को केवल आर्थिक अभाव के कारण जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटियां ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।
ज्ञापन में चार अहम मांगें रखी गई हैं। इनमें जिले में ऐसे अंडर ट्रायल कैदियों की तुरंत समीक्षा, उन्हें जमानत मिलने के बावजूद रिहाई नहीं मिली। पूरे प्रदेश में समान परिस्थितियों वाले कैदियों की पहचान के लिए जिला स्तर पर समीक्षा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटियों को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के कड़े आदेश। पात्र मामलों में राज्य स्तर पर सहयोग और सहायता की व्यवस्था की मांग शामिल है। कहा कि इस दिशा में ठोस कदम उठाने से गरीबों तक न्याय समय पर पहुंचेगा और प्रदेश की जेलों में अनावश्यक भीड़ कम होगी। उन्होंने राज्य सरकार से इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र और संवेदनशील कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
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इस निर्णय से प्रदेश की जेलों में अनावश्यक भीड़ होगी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। इग्नू की सामाजिक कार्य की छात्रा हिमानी गौतम ने गरीब अंडर ट्रायल (विचाराधीन) कैदियों के लिए मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश को औपचारिक ज्ञापन भेजा है। इसमें उन्होंने प्रदेशभर में ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा और समय पर न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन में हिमानी गौतम ने विशेष रूप से बिलासपुर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अदालत ने जमानत दी, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर आरोपी जमानती राशि जमा न कर पाने या जमानतदार की व्यवस्था न कर पाने के कारण जेल में रह जाते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया गया है। उन्होंने ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब कैदियों को केवल आर्थिक अभाव के कारण जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटियां ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।
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ज्ञापन में चार अहम मांगें रखी गई हैं। इनमें जिले में ऐसे अंडर ट्रायल कैदियों की तुरंत समीक्षा, उन्हें जमानत मिलने के बावजूद रिहाई नहीं मिली। पूरे प्रदेश में समान परिस्थितियों वाले कैदियों की पहचान के लिए जिला स्तर पर समीक्षा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटियों को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के कड़े आदेश। पात्र मामलों में राज्य स्तर पर सहयोग और सहायता की व्यवस्था की मांग शामिल है। कहा कि इस दिशा में ठोस कदम उठाने से गरीबों तक न्याय समय पर पहुंचेगा और प्रदेश की जेलों में अनावश्यक भीड़ कम होगी। उन्होंने राज्य सरकार से इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र और संवेदनशील कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।