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Bilaspur News: जिला अस्पताल परिसर में रात 10 बजे के बाद बंद हो जाती हैं दवा की दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:59 PM IST
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आरकेएस की ओर से मरीजों की सुविधा के लिए परिसर में किया है आवंटन
आपात स्थिति में मरीजों को नहीं मिल पाती है दवाइयों की सुविधा
अस्पताल परिसर में दी गई सुविधा का नहीं मिल रहा पूरा फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) ने तीन दवाइयों की दुकानें आवंटित की हैं। इन दुकानों को आवंटित करने का उद्देश्य मरीजों को 24 घंटे दवा उपलब्ध कराना था, लेकिन लोगों का कहना है कि रात 10 बजे के बाद ये दुकानें बंद हो जाती हैं, जिससे आपात परिस्थितियों में दवाइयों की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है।
अस्पताल परिसर के अंदर आवंटित की इन दुकानों का किराया तो रोगी कल्याण समिति ले लेती है। लेकिन इनसे मरीजों और तीमारदारों को कितना लाभ मिल पाता है, इसकी कोई भी परवाह समिति को नहीं है। जब इन दुकानों को परिसर के अंदर शिफ्ट किया था तो इनका उद्देश्य था कि मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल दवाइयां मिलें और उन्हें आसपास की दुकानों तक जाने की आवश्यकता न पड़े। हालांकि, अस्पताल परिसर की यह सुविधा रात 10 बजे के बाद बंद होने के कारण मरीजों के लिए अप्रभावी साबित हो रही है। तीमारदार प्रकाश ठाकुर, विद्या देवी, जगदीश कुमार, किरपा राम सहित अन्य लोगों ने बताया कि रात में अचानक किसी मरीज को दवा की जरूरत पड़ती है, लेकिन दुकानें 10 बजे के बाद बंद हो जाती हैं। इस वजह से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी होती है। मरीजों और परिजनों का कहना है कि कई बार अचानक बीमारियों या पुरानी दवाओं की कमी के कारण रात में तत्काल दवा की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे समय में दुकानें बंद होने से लोग मजबूरी में बाहर जाकर दवा लेने को मजबूर होते हैं, जो कई बार मुश्किल और जोखिम भरा भी होता है।
रोगियों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और रोगी कल्याण समिति से आग्रह किया है कि रात 10 बजे के बाद भी दवाइयों की दुकानों को खुला रखने के आदेश जारी हों। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। यदि रात में स्टाफ की कमी है, तो शिफ्ट व्यवस्था के माध्यम से इसे पूरा किया जाए। कहना है कि अगर यह सुविधा रात 10 बजे के बाद भी चालू रहे, तो मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं और आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक दवाइयां आसानी से मिल सकती हैं। वहीं, इस संबंध में एमएस बिलासपुर डॉक्टर एके सिंह से फोन पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन वो फोन पर उपलब्ध नहीं हुए।
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आपात स्थिति में मरीजों को नहीं मिल पाती है दवाइयों की सुविधा
अस्पताल परिसर में दी गई सुविधा का नहीं मिल रहा पूरा फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) ने तीन दवाइयों की दुकानें आवंटित की हैं। इन दुकानों को आवंटित करने का उद्देश्य मरीजों को 24 घंटे दवा उपलब्ध कराना था, लेकिन लोगों का कहना है कि रात 10 बजे के बाद ये दुकानें बंद हो जाती हैं, जिससे आपात परिस्थितियों में दवाइयों की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है।
अस्पताल परिसर के अंदर आवंटित की इन दुकानों का किराया तो रोगी कल्याण समिति ले लेती है। लेकिन इनसे मरीजों और तीमारदारों को कितना लाभ मिल पाता है, इसकी कोई भी परवाह समिति को नहीं है। जब इन दुकानों को परिसर के अंदर शिफ्ट किया था तो इनका उद्देश्य था कि मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल दवाइयां मिलें और उन्हें आसपास की दुकानों तक जाने की आवश्यकता न पड़े। हालांकि, अस्पताल परिसर की यह सुविधा रात 10 बजे के बाद बंद होने के कारण मरीजों के लिए अप्रभावी साबित हो रही है। तीमारदार प्रकाश ठाकुर, विद्या देवी, जगदीश कुमार, किरपा राम सहित अन्य लोगों ने बताया कि रात में अचानक किसी मरीज को दवा की जरूरत पड़ती है, लेकिन दुकानें 10 बजे के बाद बंद हो जाती हैं। इस वजह से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी होती है। मरीजों और परिजनों का कहना है कि कई बार अचानक बीमारियों या पुरानी दवाओं की कमी के कारण रात में तत्काल दवा की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे समय में दुकानें बंद होने से लोग मजबूरी में बाहर जाकर दवा लेने को मजबूर होते हैं, जो कई बार मुश्किल और जोखिम भरा भी होता है।
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रोगियों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और रोगी कल्याण समिति से आग्रह किया है कि रात 10 बजे के बाद भी दवाइयों की दुकानों को खुला रखने के आदेश जारी हों। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। यदि रात में स्टाफ की कमी है, तो शिफ्ट व्यवस्था के माध्यम से इसे पूरा किया जाए। कहना है कि अगर यह सुविधा रात 10 बजे के बाद भी चालू रहे, तो मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं और आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक दवाइयां आसानी से मिल सकती हैं। वहीं, इस संबंध में एमएस बिलासपुर डॉक्टर एके सिंह से फोन पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन वो फोन पर उपलब्ध नहीं हुए।