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Bilaspur News: जन्मतिथि फर्जीवाड़ा मामले में पंचायत सचिव को अग्रिम जमानत

Sun, 26 Jul 2026 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:56 PM IST
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Anticipatory bail granted to Panchayat Secretary in date-of-birth fraud case.
अदालत बोली - जांच में कर रहा सहयोग, गिरफ्तारी की फिलहाल आवश्यकता नहीं
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सरकारी रिकॉर्ड में जन्मतिथि से कथित छेड़छाड़ का है मामला
धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर से जुड़े अपराधों में दर्ज है केस

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सरकारी रिकॉर्ड में जन्मतिथि से कथित छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े के मामले में आरोपी पंचायत सचिव को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई है। अदालत ने माना कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और उससे अब किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।
मामला थाना भराड़ी में वर्ष 2023 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने नौकरी के दौरान अपनी वास्तविक जन्मतिथि के स्थान पर दूसरी जन्मतिथि दर्ज करवाई। इसके लिए ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में कथित रूप से ओवरराइटिंग कर जन्मतिथि में बदलाव किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार इस पूरे प्रकरण में पंचायत सचिव की भी भूमिका रही।
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शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उसने न्यायालय का रुख किया। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त परिवार रजिस्टर की प्रतियों में कथित छेड़छाड़ सामने आने के बाद अदालत के निर्देश पर पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, कूटरचना और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
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अग्रिम जमानत याचिका में आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि पारिवारिक विवाद के कारण उसे झूठा फंसाया गया है। उसने अदालत को आश्वस्त किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा और जमानत की सभी शर्तों का पालन करेगा। अदालत ने पाया कि आरोपी अंतरिम जमानत की अवधि में नियमित रूप से जांच में शामिल होता रहा। जांच एजेंसी उसके हस्ताक्षर और लिखावट के नमूने पहले ही ले चुकी है। उससे किसी अन्य बरामदगी की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के फरार होने की संभावना नहीं है।

अदालत ने शर्त रखी कि आरोपी जांच अधिकारी और न्यायालय के बुलाने पर उपस्थित होगा, किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा। साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा तथा न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा।
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