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Bilaspur News: नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने दिया आदेश
कोर्ट बोला, आरोपी बाहर आया तो पीड़िता को फिर से डरा-धमका सकता है
कहा, पॉक्सो एक्ट में केवल मेडिकल रिपोर्ट ही सब कुछ नहीं
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को जमानत देने से इन्कार करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने सुरक्षा को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने कहा कि आरोपी और पीड़िता एक ही गांव के हैं। बच्ची को स्कूल जाने के लिए सुनसान जंगली रास्ते से गुजरना पड़ता है। ऐसे में अगर आरोपी जेल से बाहर आता है, तो वह पीड़िता को फिर से डरा-धमका सकता है। अदालत ने यह कहते हुए आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया कि उसकी रिहाई न्याय के साथ खिलवाड़ होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 14 अक्तूबर 2025 का है। बरमाणा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग बच्ची ने पुलिस को शिकायत दी थी। बच्ची का आरोप था कि गांव का ही 42 वर्षीय व्यक्ति उसे स्कूल जाते समय रास्ते में रोकता था। आरोपी ने जंगल में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर उसे व उसके परिवार को चाकू से गोदकर मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में सीमन की पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोई वैज्ञानिक साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को जेल में रखना प्री-ट्रायल पनिशमेंट है। जिला लोक अभियोजक सीएस भाटिया ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों में आरोपी की हर करतूत का खुलासा किया है। आरोपी रसूखदार है और बाहर आने पर पीड़िता को डरा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि पॉक्सो एक्ट में केवल मेडिकल रिपोर्ट ही सब कुछ नहीं है। पीड़िता के बयान बेहद गंभीर और सुसंगत हैं।
जज ने नोट किया कि रास्ता सुनसान और जंगली है। आरोपी का घर पास होने के कारण पीड़िता की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। अभी ट्रायल शुरू होना है और मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। इस स्थिति में जमानत देना गवाहों को प्रभावित करने जैसा होगा। बताते चलें कि आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर मामले दर्ज हैं। आरोपी 42 वर्ष का है और पीड़िता मासूम बच्ची। समाज पर ऐसे अपराधों का गहरा असर पड़ता है। मामले की गंभीरता और गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए आरोपी को रियायत नहीं दी जा सकती। संवाद
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कहा, पॉक्सो एक्ट में केवल मेडिकल रिपोर्ट ही सब कुछ नहीं
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को जमानत देने से इन्कार करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने सुरक्षा को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने कहा कि आरोपी और पीड़िता एक ही गांव के हैं। बच्ची को स्कूल जाने के लिए सुनसान जंगली रास्ते से गुजरना पड़ता है। ऐसे में अगर आरोपी जेल से बाहर आता है, तो वह पीड़िता को फिर से डरा-धमका सकता है। अदालत ने यह कहते हुए आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया कि उसकी रिहाई न्याय के साथ खिलवाड़ होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 14 अक्तूबर 2025 का है। बरमाणा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग बच्ची ने पुलिस को शिकायत दी थी। बच्ची का आरोप था कि गांव का ही 42 वर्षीय व्यक्ति उसे स्कूल जाते समय रास्ते में रोकता था। आरोपी ने जंगल में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर उसे व उसके परिवार को चाकू से गोदकर मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में सीमन की पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोई वैज्ञानिक साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को जेल में रखना प्री-ट्रायल पनिशमेंट है। जिला लोक अभियोजक सीएस भाटिया ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों में आरोपी की हर करतूत का खुलासा किया है। आरोपी रसूखदार है और बाहर आने पर पीड़िता को डरा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि पॉक्सो एक्ट में केवल मेडिकल रिपोर्ट ही सब कुछ नहीं है। पीड़िता के बयान बेहद गंभीर और सुसंगत हैं।
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जज ने नोट किया कि रास्ता सुनसान और जंगली है। आरोपी का घर पास होने के कारण पीड़िता की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। अभी ट्रायल शुरू होना है और मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। इस स्थिति में जमानत देना गवाहों को प्रभावित करने जैसा होगा। बताते चलें कि आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर मामले दर्ज हैं। आरोपी 42 वर्ष का है और पीड़िता मासूम बच्ची। समाज पर ऐसे अपराधों का गहरा असर पड़ता है। मामले की गंभीरता और गवाहों की सुरक्षा को देखते हुए आरोपी को रियायत नहीं दी जा सकती। संवाद