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Bilaspur News: चरस तस्करी के आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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विशेष न्यायाधीश ने कहा, तथ्यों को छिपाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर की विशेष अदालत ने मादक द्रव्य अधिनियम के तहत गिरफ्तार एक नेपाली मूल के आरोपी को झटका दिया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी की ओर से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और अदालत को गुमराह करने के प्रयासों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले के अनुसार पुलिस थाना बरमाणा ने 18 दिसंबर 2025 को आरोपी के खिलाफ चरस तस्करी के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। आरोपी पर एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज है और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। आरोपी ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दावा किया गया कि उसकी कोई भी जमानत याचिका किसी अन्य अदालत में लंबित नहीं है लेकिन सरकारी वकील सीएस भाटिया ने कोर्ट को रिकॉर्ड के साथ बताया कि आरोपी ने पहले भी एक जमानत अर्जी इसी अदालत में लगा रखी है, जो अभी विचाराधीन है। इस तथ्य को वर्तमान याचिका में जानबूझकर छिपाया गया। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति अदालत का दरवाजा खटखटाता है, उसे सच्चाई के साथ साफ हाथों से आना चाहिए। तथ्यों को छिपाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरोपी ने जानबूझकर पिछली याचिका की जानकारी छिपाई, इसलिए उसकी अर्जी सुनवाई के योग्य नहीं है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर जाए बिना ही केवल कंसीलमेंट ऑफ फैक्ट्स (तथ्यों को छिपाने) के आधार पर इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबित जमानत याचिका की जानकारी छिपाना अदालत की प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। ऐसी याचिका को मेरिट पर सुनने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर की विशेष अदालत ने मादक द्रव्य अधिनियम के तहत गिरफ्तार एक नेपाली मूल के आरोपी को झटका दिया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी की ओर से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और अदालत को गुमराह करने के प्रयासों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले के अनुसार पुलिस थाना बरमाणा ने 18 दिसंबर 2025 को आरोपी के खिलाफ चरस तस्करी के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। आरोपी पर एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज है और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। आरोपी ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दावा किया गया कि उसकी कोई भी जमानत याचिका किसी अन्य अदालत में लंबित नहीं है लेकिन सरकारी वकील सीएस भाटिया ने कोर्ट को रिकॉर्ड के साथ बताया कि आरोपी ने पहले भी एक जमानत अर्जी इसी अदालत में लगा रखी है, जो अभी विचाराधीन है। इस तथ्य को वर्तमान याचिका में जानबूझकर छिपाया गया। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति अदालत का दरवाजा खटखटाता है, उसे सच्चाई के साथ साफ हाथों से आना चाहिए। तथ्यों को छिपाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरोपी ने जानबूझकर पिछली याचिका की जानकारी छिपाई, इसलिए उसकी अर्जी सुनवाई के योग्य नहीं है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर जाए बिना ही केवल कंसीलमेंट ऑफ फैक्ट्स (तथ्यों को छिपाने) के आधार पर इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबित जमानत याचिका की जानकारी छिपाना अदालत की प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। ऐसी याचिका को मेरिट पर सुनने का सवाल ही पैदा नहीं होता।