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Bilaspur News: चरस बरामदगी मामले में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी बरी
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अदालत से
बिलासपुर विशेष अदालत का फैसला, पुलिस की कहानी में मिले कई झोल
संदेह का लाभ देकर अदालत ने आरोपी को किया दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष न्यायाधीश की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने 124.12 ग्राम चरस रखने के आरोपी को साक्ष्यों के अभाव और पुलिस कार्रवाई में मिली गंभीर खामियों के चलते बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में विफल रहा है।
पुलिस के अनुसार, 13 जुलाई 2020 की रात करीब 12:05 बजे पुलिस टीम माकड़ी-मार्कंडेय लिंक रोड पर गश्त पर थी। इस दौरान सामने से पैदल आ रहे एक व्यक्ति ने पुलिस को देखकर अपनी जेब से एक पैकेट निकालकर फेंक दिया और भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे दबोच लिया और फेंके गए पैकेट से 124.12 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया गया। अदालत ने नोट किया कि माकड़ी-मार्कंडेय एक बड़ा गांव है और वहां लोग मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने किसी स्थानीय स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। केवल पुलिस कर्मियों को ही गवाह बनाया गया। गवाहों के बयानों में समय को लेकर बड़ा अंतर पाया गया। जहां एक ओर आरोपी को रात 12:05 बजे पकड़ने की बात कही गई, वहीं कागजी कार्रवाई करीब ढाई घंटे की देरी से 2:35 बजे शुरू की गई। इस देरी का पुलिस कोई ठोस कारण नहीं दे सकी।
कानून के अनुसार, तलाशी से पहले आरोपी को राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी लेने का विकल्प देना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं दिया गया। मौके पर ली गई तस्वीरों में न तो पुलिस की गाड़ी दिख रही थी और न ही कोई ऐसा पहचान चिह्न जिससे यह साबित हो सके कि घटना उसी स्थान की है। साथ ही बरामद चरस के नमूने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में नहीं लिए गए, जो धारा 52-ए का उल्लंघन है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अपराध जितना गंभीर होता है, उसके सबूत भी उतने ही पुख्ता होने चाहिए। पुलिस की जांच में मिली खामियां और आपसी बयानों में विरोधाभास यह दर्शाता है कि कहानी गढ़ी गई हो सकती है। ऐसे में आरोपी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। बरामद चरस को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
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बिलासपुर। नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष न्यायाधीश की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने 124.12 ग्राम चरस रखने के आरोपी को साक्ष्यों के अभाव और पुलिस कार्रवाई में मिली गंभीर खामियों के चलते बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में विफल रहा है।
पुलिस के अनुसार, 13 जुलाई 2020 की रात करीब 12:05 बजे पुलिस टीम माकड़ी-मार्कंडेय लिंक रोड पर गश्त पर थी। इस दौरान सामने से पैदल आ रहे एक व्यक्ति ने पुलिस को देखकर अपनी जेब से एक पैकेट निकालकर फेंक दिया और भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे दबोच लिया और फेंके गए पैकेट से 124.12 ग्राम चरस बरामद करने का दावा किया गया। अदालत ने नोट किया कि माकड़ी-मार्कंडेय एक बड़ा गांव है और वहां लोग मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने किसी स्थानीय स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। केवल पुलिस कर्मियों को ही गवाह बनाया गया। गवाहों के बयानों में समय को लेकर बड़ा अंतर पाया गया। जहां एक ओर आरोपी को रात 12:05 बजे पकड़ने की बात कही गई, वहीं कागजी कार्रवाई करीब ढाई घंटे की देरी से 2:35 बजे शुरू की गई। इस देरी का पुलिस कोई ठोस कारण नहीं दे सकी।
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कानून के अनुसार, तलाशी से पहले आरोपी को राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी लेने का विकल्प देना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं दिया गया। मौके पर ली गई तस्वीरों में न तो पुलिस की गाड़ी दिख रही थी और न ही कोई ऐसा पहचान चिह्न जिससे यह साबित हो सके कि घटना उसी स्थान की है। साथ ही बरामद चरस के नमूने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में नहीं लिए गए, जो धारा 52-ए का उल्लंघन है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अपराध जितना गंभीर होता है, उसके सबूत भी उतने ही पुख्ता होने चाहिए। पुलिस की जांच में मिली खामियां और आपसी बयानों में विरोधाभास यह दर्शाता है कि कहानी गढ़ी गई हो सकती है। ऐसे में आरोपी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। बरामद चरस को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश दिए गए हैं।