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मुख्यमंत्री ने पेंशनरों को फिर दिया पुराना आश्वासन : वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:39 PM IST
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पेंशनरों की लंबित मांगों को जल्द पूरा करे प्रदेश सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन हिमाचल बिलासपुर के प्रधान चेतराम वर्मा सहित जिला एवं राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदेश सरकार पर पेंशनरों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि 25 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री की ओर से पेंशनरों के लिए की गई घोषणा वित्तीय वर्ष 2025 के बजट में की गई पुरानी बातों की पुनरावृत्ति मात्र थी, जिसमें पेंशनरों के हित में कोई नई घोषणा नहीं की गई।
एसोसिएशन के अनुसार मुख्यमंत्री पिछले तीन वर्ष से पेंशनरों को उनके वैध अधिकार देने के बजाय उन्हें भ्रमित करते आ रहे हैं और पेंशनरों को आयु वर्ग के आधार पर चार श्रेणियों 80 वर्ष, 75 वर्ष, 70 वर्ष से ऊपर और 58 से 70 वर्ष में बांट दिया गया है। वर्मा ने कहा कि पेंशनर चाहे 58 वर्ष का हो या 100 वर्ष का उसकी आर्थिक जरूरतें और देनदारियां समान होती हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार पर पेंशनरों के लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के बकाया लंबित हैं, जिनमें 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्तें दो डीए का एरियर सहित वर्षों से लंबित चिकित्सा बिलों का भुगतान शामिल है। सबसे अधिक प्रभावित वे पेंशनर हैं जो 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए, जिन्हें आज तक संशोधित वेतनमान के लाभ, लीव एनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और महंगाई भत्ता नहीं मिल पाया है। समय पर भुगतान न होने के कारण पेंशनरों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जबकि सरकार ने भुगतान योग्य राशि पर लगने वाला ब्याज भी हजम कर लिया। मुख्यमंत्री पूर्व सरकार पर दोष मढ़ते हुए खुद चालीस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बाद भी आर्थिक संकट का रोना रो रहे हैं। एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में पेंशनरों की मांगों को जायज माना था और मार्च तक समाधान तथा 30 दिनों के भीतर चिकित्सा बिलों के भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन दो माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
इसी तरह 17 दिसंबर 2025 को अखिल भारतीय पेंशनर्स दिवस पर घुमारवीं में 40 दिनों में चिकित्सा बिलों के भुगतान की घोषणा भी पूरी नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे पेंशनरों को बांटने की नीति छोड़कर सभी को समान दर्जा दें और लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए ठोस व्यवस्था करें। साथ ही सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में प्रदेश संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक बुलाकर पेंशनरों के आर्थिक मसलों का समाधान निकाला जाए। अन्यथा पेंशनरों को अपने वर्षों से लंबित अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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बिलासपुर। पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन हिमाचल बिलासपुर के प्रधान चेतराम वर्मा सहित जिला एवं राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदेश सरकार पर पेंशनरों को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि 25 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री की ओर से पेंशनरों के लिए की गई घोषणा वित्तीय वर्ष 2025 के बजट में की गई पुरानी बातों की पुनरावृत्ति मात्र थी, जिसमें पेंशनरों के हित में कोई नई घोषणा नहीं की गई।
एसोसिएशन के अनुसार मुख्यमंत्री पिछले तीन वर्ष से पेंशनरों को उनके वैध अधिकार देने के बजाय उन्हें भ्रमित करते आ रहे हैं और पेंशनरों को आयु वर्ग के आधार पर चार श्रेणियों 80 वर्ष, 75 वर्ष, 70 वर्ष से ऊपर और 58 से 70 वर्ष में बांट दिया गया है। वर्मा ने कहा कि पेंशनर चाहे 58 वर्ष का हो या 100 वर्ष का उसकी आर्थिक जरूरतें और देनदारियां समान होती हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार पर पेंशनरों के लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के बकाया लंबित हैं, जिनमें 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्तें दो डीए का एरियर सहित वर्षों से लंबित चिकित्सा बिलों का भुगतान शामिल है। सबसे अधिक प्रभावित वे पेंशनर हैं जो 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए, जिन्हें आज तक संशोधित वेतनमान के लाभ, लीव एनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और महंगाई भत्ता नहीं मिल पाया है। समय पर भुगतान न होने के कारण पेंशनरों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जबकि सरकार ने भुगतान योग्य राशि पर लगने वाला ब्याज भी हजम कर लिया। मुख्यमंत्री पूर्व सरकार पर दोष मढ़ते हुए खुद चालीस हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बाद भी आर्थिक संकट का रोना रो रहे हैं। एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में पेंशनरों की मांगों को जायज माना था और मार्च तक समाधान तथा 30 दिनों के भीतर चिकित्सा बिलों के भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन दो माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
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इसी तरह 17 दिसंबर 2025 को अखिल भारतीय पेंशनर्स दिवस पर घुमारवीं में 40 दिनों में चिकित्सा बिलों के भुगतान की घोषणा भी पूरी नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे पेंशनरों को बांटने की नीति छोड़कर सभी को समान दर्जा दें और लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए ठोस व्यवस्था करें। साथ ही सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में प्रदेश संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक बुलाकर पेंशनरों के आर्थिक मसलों का समाधान निकाला जाए। अन्यथा पेंशनरों को अपने वर्षों से लंबित अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।