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आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम : श्री नयना देवी में बंजारा समाज ने निभाईं पारंपरिक रस्में
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श्रावण मास में देशभर के बंजारे शक्तिपीठ में जुटे, दर्शन करने के बाद हुआ दंगल
संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच मंदिर परिसर में हर वर्ष लगने वाला पारंपरिक बंजारों का मेला भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। 19 से 21 जुलाई तक इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से बंजारा समाज के लोग, जिन्हें पंजाब में गाड़ी वाले भी कहा जाता है, माता के दरबार में पहुंचे औरअपनी सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया।
बंजारा समाज के सदस्य पहले माता श्री नयना देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद पारंपरिक रूप से विशाल दंगल (कुश्ती प्रतियोगिता) का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर के भव्य स्टेडियम में आयोजित दंगल में युवा पहलवानों ने दमखम दिखाया। इसके साथ ही समाज के लोगों ने पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया। बंजारा समाज के रमेश ने बताया कि उनके पूर्वज भी हर वर्ष श्रावण मास में 19, 20 और 21 जुलाई को माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना के साथ दंगल का आयोजन करते थे। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों से मिली इस परंपरा को आज भी पूरा समाज पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है। हर वर्ष परिवार सहित माता के चरणों में हाजिरी लगाकर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कुश्ती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर के पुजारी लक्की शर्मा ने बताया कि बंजारा समाज वर्षों से श्रावण मास के इन विशेष दिनों में श्री नयना देवी पहुंचता है। यहां माता की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद समाज के लोग अपनी पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं। यह मेला आस्था, संस्कृति और विरासत का अनूठा संगम है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत रखा गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच मंदिर परिसर में हर वर्ष लगने वाला पारंपरिक बंजारों का मेला भी श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। 19 से 21 जुलाई तक इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से बंजारा समाज के लोग, जिन्हें पंजाब में गाड़ी वाले भी कहा जाता है, माता के दरबार में पहुंचे औरअपनी सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया।
बंजारा समाज के सदस्य पहले माता श्री नयना देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद पारंपरिक रूप से विशाल दंगल (कुश्ती प्रतियोगिता) का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर के भव्य स्टेडियम में आयोजित दंगल में युवा पहलवानों ने दमखम दिखाया। इसके साथ ही समाज के लोगों ने पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया। बंजारा समाज के रमेश ने बताया कि उनके पूर्वज भी हर वर्ष श्रावण मास में 19, 20 और 21 जुलाई को माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना के साथ दंगल का आयोजन करते थे। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों से मिली इस परंपरा को आज भी पूरा समाज पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है। हर वर्ष परिवार सहित माता के चरणों में हाजिरी लगाकर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कुश्ती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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मंदिर के पुजारी लक्की शर्मा ने बताया कि बंजारा समाज वर्षों से श्रावण मास के इन विशेष दिनों में श्री नयना देवी पहुंचता है। यहां माता की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद समाज के लोग अपनी पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं। यह मेला आस्था, संस्कृति और विरासत का अनूठा संगम है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत रखा गया है।
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